“सुशासन” में शांति-सद्भाव के लिए आयोजित ‘अमन मार्च’ पर भी बर्बर लाठीचार्ज.

बिहार की नीतीश-लालू सरकार “सुशासन” का दावा करते नहीं अघाती. लेकिन मुख्यमंत्री के गृह जिले नालंदा में ‘भीड़ द्वारा की जा रही हत्या’ और अमरनाथ आतंकी हमले में मारे गये लोगों को श्रद्धान्जलि देने के लिए नागरिकों द्वारा आयोजित अमन मार्च भी प्रशासन को नागवार गुजर रहा है. इंसाफ मंच के बैनर से 17 जुलाई को बिहारशरीफ में सैकड़ों की तादाद में अल्पसंख्यक समुदाय और प्रगतिशील नागरिक अमन मार्च करते हुए सड़कों पर उतरे. प्रशासन ने कानून-व्यवस्था का बहाना बनाकर मार्च निकालने की इजाजत नहीं दी. मार्च कर रहे लोगों ने कहा कि प्रशासन जान-बूझकर इजाजत नहीं दे रहा. अमन मार्च तो शांति की बहाली के लिए है, इससे कौन सी शांति भंग हो रही है. हां कुछ दिन पहले इसी प्रशासन ने बजरंग दल वालों को हथियार से लैस होकर मार्च करने पर एक सवाल तक नहीं किया. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि प्रशासन मार्च की इजाजत नहीं दे रहा, तो वह उन्हें गिरफ्तार करे, हम गिरफ्तारी के लिए तैयार हैं. लेकिन धूर्त प्रशासन ने 20-25 बच्चों को गिरफ्तार कर लिया. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बच्चों को गिरफ्तार करने की बजाए प्रशासन उन्हें गिरफ्तार करे. प्रदर्शनकारियों की इस मांग को प्रशासन ने उकसावे के बतौर लिया और उन पर लाठियां चला दीं, जिसमें कई लोग बुरी तरह घायल हुए और कई लोगों को जेल में बंद कर दिया.

भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने इंसाफ मंच के बैनर से बिहारशरीफ में भीड़ द्वारा की जा रही हत्या और अमरनाथ यात्रियों पर बर्बर आतंकी हमले के खिलाफ निकाले गए अमन मार्च पर बर्बर पुलिसिया दमन की कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि नीतीश-लालू केवल शब्दों में भाजपा का विरोध कर रहे हैं, हकीकत यह है कि वे भाजपा के ही नक्शे कदम पर शासन व्यवस्था चलाना चाहते हैं. यह कैसा सुशासन है, जहां आतंकी कार्रवाईयांे में मारे गये लोग को श्रद्धांजलि देने पर भी लाठी खानी पड़ रही है.

माले राज्य सचिव ने कहा कि इंसाफ मंच को बिहारशरीफ प्रशासन द्वारा संदेहास्पद बताना बेहद हास्यास्पद है. इंसाफ मंच लंबे समय से मुजफ्फरपुर से लेकर पूरे बिहार में दमन-उत्पीड़न के शिकार दलितों-अकलियतों के न्याय के लिए लड़ने वाला मंच रहा है, जिसका राज्यस्तरीय ढांचा है. इंसाफ मंच में भाकपा-माले के नेताओं, कार्यकर्ताओं सहित प्रगतिशील विचार के लोग शामिल हैं. कार्यक्रम के संयोजक मनमोहन कुमार जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र और इलाके में भाकपा-माले के स्थापित नेता हंै. इसलिए इंसाफ मंच के कार्यक्रम पर प्रशासन ने सचेत रूप से हमला किया है, जिसमें पचासो लोग बुरी तरह घायल हुए हैं.

उन्होंने कहा कि घटना की जांच के लिए माले विधायक महबूब आलम और सरोज चौबे के नेतृत्व में एक जांच टीम आज बिहारशरीफ गयी है. यह टीम पूरे मामले का जायजा लेगी और घायलों व गिरफ्तार साथियों से मुलाकात करेगी.

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