पढ़ाई के लिए लड़ाई : कोइलवर का सड़क पर स्कूल आंदोलन

खुशी कुमारी का चेहरा ‘खुशी’ से दमक रहा है- भला क्यों नहीं, वे पिछले दिनों भोजपुर जिले के कोइलवर में चले सड़क पर स्कूल आंदोलन की ‘नायिका’ हैं- यह पूछने पर कि क्या बनना है, वे बताती हैं – ‘मैं आर्मी में जाना चाहती हूुं- लेकिन, अभी तो पढ़ाई करनी है (और इसके लिए लड़ाई भी)- खुशी इंटर की छात्र हैं- उनकी बहनें छोटी कुमारी और निक्की कुमारी 8वीं और 7वीं कक्षा में पढ़ती हैं, भाई विश्वकर्मा कुमार 3री में- उनकी मां और चाची बोल पड़ती हैं, ‘यह अपने भाई-बहनों समेत सबके लिए लड़ रही है-’

पढ़ाई के लिए लड़ी गई इस लड़ाई में वह अकेली नहीं हैं- उनके मियांचक मुहल्ले से वापस आदर्श कॉलोनी में आने पर, जहां भाकपा(माले) का स्थानीय कार्यालय भी है, एक दूसरी खुूशी कुमारी भी मिलती हैं- प्रिया, कोमल, रिपू, अंशु, रीतू, बबली, अमृता, आरती, नंदिनी, मीना, सीमा, छोटी, काजल, शालू, अंजलि, शोभा, साक्षी, अनु भी ‘सड़क पर स्कूल आंदोलन’ की नेताओं में रहीं- उन्होंने विद्यालय पुनर्निर्माण समिति के अभिषेक, प्रेमसागर, अजय, सिंधू, संतोष, गोलू और विकास के साथ मिलकर यह जीत हासिल की-

भाकपा(माले) प्रखंड कमेटी के सदस्य और बालू मजदूरों के जुझारू नेता कामरेड भोला यादव कहते हैं, ‘लगभग तीन साल पहले जब तारामणि भगवान साह उच्च माध्यमिक विद्यालय को पटना-बक्सर फोरलेन के निर्माण के लिए जमींदोज किया जा रहा था, भाकपा(माले) ने इसे रोकने के लिए आंदोलन किया था- प्रशासन ने तब हमें फ्रलड कंट्रोल की 1 एकड़ 57 डि- जमीन पर स्कूल के शीघ्र पुननिर्माण का आश्वासन दिया था- इस बीच तीन साल गुजर गये- सड़क बन गयी- नया पुल बन गया- सबका उद्घाटन हुआ, नेता आए, भाषण हुआ- सांसद और मंत्री सबने आश्वासन दिया कि स्कूल भी जल्द ही बन जाएगा- जब यह जुमला साबित हुआ तो हमें फिर से सड़कों पर उतरना पड़ा-’

वे बताते हैं, ‘मैं भी कभी इसी स्कूल का छात्र था- शत्रुघ्न राउत जो पूर्व शिक्षा मंत्री रामचंद्र पूर्वे के बहनोई भी थे, तब प्रधानाचार्य हुआ करते थे- वे बेहद अनुशासनप्रिय व शिक्षा प्रेमी थे जिन्होंने विद्यालय का नाम दूर-दूर तक फैलाया- पढ़ाई, स्पोर्ट्स, एनसीसी, बिल्डिंग, सफाई सभी मामलों में विद्यालय जिले में अव्वल माना जाता था- मैंने खुद अपने विद्यालय की तरफ से सुब्रतो कप (फुटबाल) खेल चुका हूं- सबसे शानदार था विद्यालय का सभा कक्ष जिसमें एक साथ हजार-बारह सौ लोग बैठ सकते थे- बड़ा सा खेल का मैदान, लेबोरेटरी, लाइब्रेरी, कॉमन रूम (छात्रें, छात्रओं और शिक्षकों के लिए अलग-अलग) भी था- विशाल स्कूल भवन जिसमें 25-30 कमरे थे- सेमल के दो विशाल पेड़- क्या नहीं था? हम बरसों तक फुटबॉल के जिला चैम्पियन रहे- एनसीसी का तो जिला कैम्प भी यहीं था- हर साल प्रथम श्रेणी से उतीर्ण होनेवालों की सूची में 25-30 छात्रें का नाम आता था- प्रधानाचार्य भी कई पुरस्कारों से नवाजे गए थे-
खुशी बताती हैं, ‘जब स्कूल टूटने लगा तो मैंने अपने शिक्षकों से पूछा – अब हम कहां पढ़ेंगे- अपने ही मुहल्ले की 50 लड़कियों को जुटा कर हंगामा भी किया- मेरे माता-पिता ने मुझसे कहा – ‘इतनी बड़ी लड़ाई तुम लड़ पाओगी?’ जब आइसा के लोग यहां पहुंचे तो मैंने पहला सवाल यही किया कि इतने दिनों तक आप लोग कहां थे?

भाकपा(माले) की प्रखंड कमेटी ने अगस्त महीने की पहली तारीख से ही स्कूल आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी-आइसा नेता विशाल कुमार ने बताया, ‘7 अगस्त से हमने स्कूल के पोषण क्षेत्र के गांवों में छात्र-छात्रओं की बैंठकें आयोजित करनी शुरू कर दी- कोइलवर और आसपास ही नहीं, बड़हरा प्रखंड और पटना जिला के बिहटा प्रखंड के भी कई गांवों के छात्र यहां पढ़ने आते थे- कुल 18-19 सौ का एडमिशन यहां था- सुरौंधा कॉलोनी, आदर्श कॉलोनी, रामस्वरुप टोला, बनपर, टोला, मियांचक, बिचली मोहल्ला समेत कोइलवर के सभी वार्डों-मुहल्लों में छात्र-छात्रओं और अभिभावकों की बैठकें हुईं- 14 अगस्त को मशाल जुलूस निकला- 15 अगस्त को झंडा फहराया गया- 17 अगस्त को आइसा नेता विशाल कुमार की अध्यक्षता में 11-सदस्यीय विद्यालय पुनर्निमाण समिति गठित की गई- अलग से छात्रओं की भी कमेटी बनाई गई- भाकपा(माले) के प्रखंड सचिव नंदजी, प्रखंड के वरिष्ठ माले नेता कामरेड ललन यादव व भोला यादव, आइसा नेता विशाल कुमार समेत कई नेता आंदोलन की तैयारी में लगे रहे- भाकपा(माले) पोलित ब्यूरो के सदस्य का स्वदेश भट्टाचार्य, आरवाइए के राष्ट्रीय अध्यक्ष व अगिआंव विधायक मनेाज मंजिल, युवा माले नेता राजू यादव, आइसा के राज्य सचिव सबीर कुमार और इनौस के नेता शिवप्रकाश स्कूल आंदोलन को खड़ा करने में दिन-रात लगे रहे.

विशाल कुमार ने बताया, ‘स्कूल पुनर्निर्माण समिति’ ने पुराना हरिपुर, नया हरिपुर, जमालपुर, चैनपुरा, खेसरहियां, महकमपुर, काजीचक समेत दर्जनों गांवों में भी छात्र-छात्रओं और अभिभावकों की बैठकें आयोजित की- इन बैठकों से पता चला कि लोग विद्यालय और शिक्षा के सवाल को बहुत अहमियत देते हैं और बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं- यह विश्वास भी जगा कि तारामणि भगवान साव $2 स्कूल कोइलवर ने कई पीढि़यों के भविष्य का निर्माण किया है- लोग जिले के सर्वाेत्तम विद्यालय में से एक रहे विद्यालय के गौरवशाली इतिहास को बर्बाद नहीं होने देंगे-’

भाकपा(माले) के प्रखंड सचिव नंदजी बताते हैं, ‘जब 1 सितंबर को फोरलेन पर ही स्कूल लगाने का तय कर लेने के बाद अंधाधुंध काम हुआ – लगातार बैठकें, चंदा इकट्ठा करना और अन्य सारी तैयारियां- कामरेड ललन यादव जैसे अनुभवी कामरेडों के मार्गदर्शन व प्रभाव से हमने इसे पूरा किया- मरे लिए तो यह स्कूल नहीं, इम्तहान था-’
एक नेशनल टीवी के लोकल संवाददाता कहते हैं, ‘ कोइलवर में मैंने अबतक ऐसा अांदोलन होते नहीं देखा- यह अभूतपूर्व था- इस जीत से मैं भी खुश हूं-’ भाकपा(माले) के राज्य सचिव कॉ- कुणाल कहते हैं – ‘मोदी-नीतीश सरकार शिक्षा विरोधी है- छात्र-छात्रओं को स्कूलों से बाहर करना चाहती है, हम इसे सफल नहीं होने देंगे-’

संतोष सहर

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