बिहार विधानसभा में माले विधायकों की भूमिका

16वीं बिहार विधान सभा का 10वां सत्र विगत 20 जुलाई 2018 को आरंभ हुआ. सत्र प्रारंभ होने के ठीक पहले बिहार में मुजफ्फरपुर बालिका गृह में 41 बच्चियों के साथ लगातार हुए बलात्कार कांड की घटना को लेकर बिहार का राजनीतिक तापमान गर्म था. ऐपवा ने इस मामले की हाईकोर्ट के न्यायाधीश की देखरेख में सीबीआई जांच करानेे और दोषियों को सजा दिलाने की मांग पर 20 जुलाई 2018 को विधान सभा के समक्ष प्रदर्शन किया था. भाकपा(माले) के विधायकों का. महबूब आलम, सत्यदेव राम और सुदामा प्रसाद ने विधान सभा में उसी दिन पोस्टर प्रदर्शन करते हुए उक्त मामले को उठाया. सदन में ही भाकपा(माले) विधायकों की पहल पर राजद, कांग्रेस, भाकपा(माले) एवं हम पार्टियों के विधायकों की बैठक हुई जिसमें तय हुआ कि प्रत्येक दिन एक-एक पार्टी जनता के ज्वलंत प्रश्न पर कार्य स्थगन प्रस्ताव लाएगी और सभी उसका समर्थन करेंगे. चूंकि 22 जुलाई तक के लिए सदन स्थगित हो गया इसलिए तय हुआ कि 23 जुलाई को राजद सुखाड़ और बिहार के किसानों की सरकारी उपेक्षा के कारण हो रही दुर्दशा पर कार्य स्थगन प्रस्ताव लाएगी. राजद द्वारा तैयार कार्यस्थगन प्रस्ताव पर चारों पार्टियों के विधायकों ने हस्ताक्षर किया. भाकपा(माले) की ओर से विधायक सुदामा प्रसाद ने हस्ताक्षर किया.

23 जुलाई को सदन प्रारंभ होने से पहले भाकपा(माले) के तीनों विधायकों ने विधान सभा परिसर में पोस्टर के साथ प्रदर्शन किया जिसमें बिहार को सुखाड़ ग्रस्त क्षेत्र घोषित करने, अविलंब राहत राशन का प्रबंध करने, तमाम नलकूपों को अविलंब चालू करने, सोन सहित सभी नदियों के नहरों में पानी देने आदि मांगों को उठाया. सदन के अंदर जमकर सरकार विरोधी नारेबाजी की गई तथा सरकार पर किसानों के साथ घोर उपेक्षा पूर्ण व्यवहार की निंदा की गई. सदन शुरू होते ही राजद सदस्यों द्वारा सदन में कार्य स्थगन प्रस्ताव लाया गया जिसपर विपक्ष की चारों पार्टियों के विधायकों ने खड़े होकर समर्थन किया और बहस की मांग की. भाकपा(माले) विधायक दल नेता का. महबूब आलम ने सदन में भी अपनी मांगों की तख्तियां प्रदर्शित की. भारी शोरगुल के बीच अध्यक्ष ने कार्य स्थगन यह कहते हुए नामंजूर कर दिया कि सत्र छोटा है और बहुत से विधायी कार्य पूरे करने हैं. लेकिन विपक्षी विधायकों के अड़े रहने के कारण उन्होंने बहस के लिए 24 जुलाई का अपराह्न का समय निधारित किया. इसके बाद पुनः विपक्षी पार्टियों के नेताओं की बैठक हुई. अगले दिन 24 जुलाई के लिए कांग्रेस कानून व्यवस्था के प्रश्न पर कार्य स्थगन देना चाहती थी लेकिन भाकपा(माले) विधायक दल नेता का. महबूब आलम ने कहा कि अभी सबसे ज्वलंत मुद्दा सरकारी संरक्षण में बेटियों के साथ हुई बलात्कार की घटनाएं हैं, इसमें सरकार कटघरे में है इसलिए भाकपा(माले) मुजफ्फरपुर बालिका गृह बलात्कार कांड पर कार्य स्थगन प्रस्ताव लाएगी. काफी ना नुकुर के बाद इस पर सहमति बनी. का. महबूब आलम द्वारा तैयार किए गए कार्य स्थगन प्रस्ताव पर विपक्षी विधायकों ने हस्ताक्षर किए.

24 जुलाई को सदन आरंभ होने से पहले माले विधायकों ने गर्दनीबाग में लगातार गरीबों को उजाड़े जाने के प्रश्न पर पुनः विधान सभा परिसर में पोस्टर प्रदर्शन के माध्यम से अपनी बातें उठाई जिसमें गर्दनीबाग में गरीबों को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के उजाड़े जाने का पुरजोर विरोध किया गया. माले विधायकों ने गर्दनीबाग की 10 प्रतिशत जमीनों पर गरीबों को बसाने की मांग उठाई. सदन के अंदर भाकपा(माले) विधायक दल नेता का. महबूब आलम ने अपना कार्य स्थगन प्रस्ताव सदन के सामने रखा और समर्थन में संपूर्ण विपक्ष खड़ा हुआ. भारी शोर-गुल हंगामे के बीच अध्यक्ष ने कार्य स्थगन को पुरानी बातें दुहराते हुए नामंजूर कर दिया. विरोध में संपूर्ण विपक्ष ने सदन का बहिष्कार कर दिया और बाहर आकर पोर्टिकों में सरकार विरोधी नारेबाजी के साथ मुजफ्फरपुर बालिका गृह सामूहिक बलात्कार कांड की सीबीआइ से जांच कराने की मांग उठाई. विपक्ष के रुख को भांपते हुए सरकार ने मुजफ्फरपुर बालिका गृह बलात्कार कांड पर अगले दिन 25 जुलाई को जवाब देने का आश्वासन दिया. सदन में दो बजे सुखाड़ पर बहस आरंभ हुई. पार्टी की ओर सेे विधायक सुदामा प्रसाद ने बहस में हिस्सा लिया. उन्होंनेे सरकार पर किसानों के प्रति बरती जा रही नकारात्मक रवैया की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि किसानों को कृषि रोड मैप का लॉली पॉप थमा दिया गया लेकिन उनके लिए कुछ भी नहीं हुआ. नीतीश कुमार जी के तीसरे शासन काल में एक इंच भी अतिरिक्त सिंचाई की व्यवस्था नहीं हुई और न ही कृषि क्षेत्र का विद्युतीकरण हुआ. पहले से चली आ रही सिंचाई परियोजनाएं समाप्ति के कगार पर हैं. एक भी सरकारी नलकूप चालू नहीं है. सोन नहरों के तटबंध का आधुनिकीकरण की मांग लंबे समय से लंबित है. इसका पानी सिंचाई बर्बाद हो जाता है. साथ ही कोसी और गंडक के नहरों का भी यही हाल है. किसान बाढ़-सुखाड़ से मर पछड़ कर जो भी फसल उपजाते हैं उन्हें एमएसपी नहीं मिल पाता, न ही सरकारी खरीद हो पाती. किसान बाजार के हाथों अपने को लूटाने को मजबूर है और ऐसी हालत में सरकार सिर्फ लंबी-लंबी बातें करती है लेकिन जमीन पर कुछ भी नहीं. हमें इस हालात से उबरना होगा. सरकारें किसानों के लिए बयानबाजी बंद करें अन्यथा उन्हें किसानों के कोपभाजन होना होगा.

25 जुलाई को सदन आरंभ होने से पहले भाकपा(माले) विधायकों ने बालू मजदूरों व नाविकों का मुद्दा उठाया. साथ ही बीएड में बढ़ी फीस का भी मामला उठाया गया. पोस्टर प्रदर्शन के माध्यम से सत्र प्रारंभ होने से पूर्व विधान सभा परिसर में अपनी मांगों को उठाया. सदन के अंदर मुजफ्फरपुर मामले में सरकारी जवाब के खिलाफ भारी हंगामा हुआ और अंत में सरकार को सीबीआई जांच कराने की घोषणा करनी पड़ी. माले और अन्य विपक्षी पार्टियां पटना उच्च न्यायालय के निर्देशन व निश्चित समय में सीबीआई जांच कराने की मांग पर अड़ी रही और अंत में सदन से बर्हिगमन किया. इसके बाद चारों विपक्षी पार्टियों के विधायक दल नेताओं एक टीम बनी और ठीक उसी वक्त मुजफ्फरपुर की घटना की जांच हेतु मुजफ्फरपुर के लिए रवाना हो गई. इधर मुजफ्फरपुर की घटना में समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा के पति के नाम आने पर उनकी बर्खास्तगी और मंजू वर्मा के पति चंद्रशेखर वर्मा की गिरफ्तारी की मांग पर दिन भर विधान सभा में हंगामा होता रहा और अंत में विधान सभा स्थगित करनी पड़ी.

26 जुलाई को विधान सभा परिसर में पोस्टर प्रदर्शन के माध्यम से भाकपा(माले) विधायकों ने समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा को बर्खास्त करो और उनके पति चंद्रशेखर वर्मा को गिरफ्तार करो, की मांगें उठाईं. पुनः सदन प्रारंभ होते ही यही मामला सदन में हंगामा का रूप धारण कर लिया और 20 मिनट में ही सदन भोजनावकाश तक स्थगित कर दिया गया. लेकिन जब भोजनावकाश के बाद दो बजे सदन पुनः शुरू हुआ तो उक्त मांगों पर पुनः हंगामा शुरू हो गया. हंगामा नहीं रूकते देख और विपक्ष द्वारा अपनी मांगों पर अड़ा देख अध्यक्ष ने सदन को स्थगित करने की घोषणा कर दी.

इस तरह चारों दिन सदन में गहमागहमी रही और विपक्ष सरकार पर भारी पड़ता दिखा. पहली बार भाकपा(माले) की पहल पर विपक्षी एकता बनती दिखी और विपक्षी एकता के दबाव के कारण ही सरकार ने मुजफ्फरपुर घटना की सीबीआई जांच का आदेश दिया. एक तरह से सरकार कठघरे में खड़ी नजर आई.

इसके अलावे भाकपा(माले) विधायकों ने शून्यकाल एवं तारांकित प्रश्नों के माध्यम से भी जनता के कई प्रश्न उठाए जिसमें प्रमुख गोपालगंज के सहकारिता घोटाला, बीएड में बढ़ी फीस का मामला, बालू मजदूरों व नाविकों के मामले, मुजफ्फरपुर सरकारी संरक्षण में बलात्कार का मामला, गर्दनीबाग में गरीबों को उजाड़े जाने के मामले, बिहार कॉलेज ऑफ फिजियोथेरापी एवं अकुपेशनलथेरापी में फिजियोथेरापी विभाग के विभागाध्यक्ष नियुक्त करने के मामले. मक्का किसानों के लिए एमएसपी तय करने के मामला नकली बीजों का मामला, कई सड़क, पुल, पुलिया का मामला सदन में उठाए गए, मदरसा शिक्षकों के मामले भी सदन में उठाए गए.

कुल मिलाकर सदन में ऐसा लगा कि भाकपा(माले) की सही मायने में विपक्ष है और सदन की बीच में नीतीश कुमार जी ने कहा कि सही मायने में विपक्ष की भूमिका तो भाकपा(माले) ही निभा रहा है. यद्यपि यह उनका कूटनीतिक बयान था.

इसी बीच 24 जुलाई को गर्दनीबाग में गरीबों को उजाड़े जाने के खिलाफ मांगों का एक ज्ञापन लेकर भाकपा(माले) विधायकों ने मुख्यमंत्री से विधान सभा परिसर स्थित चेंबर में मुलाकात की और बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए गरीबों को उजाड़ने पर रोक लगाने की मांग की.
उमेश सिंह

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