एससी/एसटी ऐक्ट को कमजोर करने के खिलाफ ऐतिहासिक भारत बंद

[एससी/एसटी (अत्याचार निरोधक) अधिनियम को कमजोर बनाने के खिलाफ प्रतिवाद करने के लिए विभिन्न दलित संगठनों की ओर से भारत बंद का आह्नान किया गया था- भाकपा(माले) के 10वें महाधिवेशन ने इस अधिनियम को कमजोर बनाने के खिलाफ प्रतिवाद करने हेतु 2 अप्रैल को भारत बंद के इस आह्नान का समर्थन किया और पार्टी को इसमें शामिल होने का आह्नान किया था- पेश है ‘बंद’ में पार्टी की भागीदारी की रिपोर्ट]

एससी-एसटी (अत्याचार निरोधक) कानून को संशोधित कर कमजोर करने की कोशिशों के खिलाफ 2 अप्रैल 2018 को दलित संगठनों के भारत बंद के समर्थन में पटना में भाकपा(माले) के विधायक महबूब आलम, सत्यदेव राम व सुदामा प्रसाद के नेतृत्व में माले कार्यकर्ता सड़क पर उतरे और कानून में संशोधन के प्रस्ताव को वापस लेने की आवाज उठाई. कारगिल चौक पर प्रतिरोध सभा का आयोजन किया गया.
सभा को संबोधित करते हुए माले विधायकों ने कहा कि अत्याचार निरोधक कानून को संशोधित करने की किसी भी प्रकार की कोशिश का हमारी पार्टी पुरजोर विरोध करती है. हाल के दिनों में दलितों पर दमन-अत्याचार की घटनाओं में इजाफा हुआ है, लेकिन सरकार दलित उत्पीड़न की घटनाओं पर रोक लगाने की बजाय दलित अत्याचार निरोधक कानून को ही कमजोर करने में लगी हुई है. हम इस संशोधन को अविलंब वापस लेने की मांग करते हैं. इस प्रकरण ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा पूरी तरह दलित विरोधी है. इसके पूर्व विधानसभा में भी माले विधायकों ने एससी-एसटी कानून में संशोधन वापस लेने की मांग पर विधानसभा में प्रदर्शन किया और विधानसभा की कार्रवाई स्थगित करने की मांग की, जिसके फलस्वरूप विधानसभा की कार्रवाई स्थगित कर दी गई.

पटना के कार्यक्रम में पार्टी की राज्य कमेटी सदस्य समता राय, पन्नालाल सिंह, अनुराधा देवी, डा. प्रकाश, आइसा नेता निशांत सहित कई लोग शामिल थे. उधर आइसा के बिहार राज्य अध्यक्ष मोख्तार के नेतृत्व में आइसा कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से एससी-एसटी कानून में संशोधन के खिलाफ अशोक राजपथ को कई जगहों पर जाम किया तथा डाकबंगला चौराहे तक मार्च किया. मार्च में दर्जनों छात्र शामिल थे.
बंद के दौरान माले व दलित संगठन के कार्यकर्ताओं को जगह-जगह पर भाजपा, आरएसएस व बजरंग दल के हमले का शिकार होना पड़ा. खगडि़या में माले जिला सचिव अरुण कुमार दास पर भाजपा के लोगों ने बर्बरता से हमला कर उन्हें बुरी तरह घायल कर दिया. उनके माथे में 8 टांके पड़े हैं. वहीं दरभंगा के जोगियारा स्टेशन पर एबीवीपी के गुंडों ने माले व दलित कार्यकर्ताओं पर सभा करते वक्त हमला कर दिया. इस हमले में माले समर्थक मनोज बैठा बुरी तरह घायल हो गए. फिलहाल डीएमसीएच में उनका इलाज चल रहा है. वैशाली में जुलूस के उपरांत जब बंद समर्थक राजेन्द्र चौक पर सभा को संबोधित कर रहे थे, तो नीतीश कुमार की पुलिस की उपस्थिति में बजरंग दल व हिंदू पुत्र जैसे सांप्रदायिक संगठनों के लोगों ने लाठी से सभा पर हमला कर दिया. हमले का संगठित प्रतिरोध किया गया और हमलावरों को भगा दिया गया. कुछ देर बाद फिर से उत्पातियों ने सभा पर हमला करने की कोशिश की, जिसका मुंहतोड़ जवाब दिया गया. आरा में भी बंद समर्थकों पर भाजपा के लोगों ने हमला किया.

भारत बंद के दौरान दरभंगा, आरा, जहानाबाद, मधुबनी, बेतिया आदि जगहों पर कई ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह ठप कर दिया गया. जिसकी वजह से इन रेलवे ट्रैकों पर रेलवे का परिचालन घंटों ठप रहा. नरकटियागंज में राप्ती सागर एक्सप्रेस ट्रेन को घंटों रोका गया. बंद के दौरान माले कार्यकर्ताओं ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में राष्ट्रीय व राज्य पथों पर भी परिचालन ठप्प कर दिया. बेगूसराय में माले कार्यकर्ताओं ने एनएच 31 पर घंटों परिचालन बाधित किया. मुजफ्फरपुर के बोचहां में एनएच 57 को अहियापुर चौक पर जाम किया गया और शहर में प्रतिवाद मार्च का आयोजन किया. दरभंगा में एनएच-57 को मब्बी में भी जाम किया गया. जहानाबाद में पटना-गया उच्च पथ, भोजपुर के जगदीशपुर एनएच 30, पटना-औरंगाबाद रोड को अरवल में, मधुबनी के रहिका में एनएच 105 आदि जगहों पर बंद के समर्थन में माले व दलित संगठनों ने मिलकर सड़क जाम किया. पूर्वी चंपारण में एनएच-28 को छतौनी मोड़ के पास जाम किया गया. दरभंगा के कर्पूरी चौक, बिरौल आदि इलाकों में भी सड़क जाम हुए. कटिहार में माले व आइसा कार्यकर्ताओं ने शहीद चौक और मिरचाईबाड़ी में सड़क जाम किया. पूर्णिया, जहानाबाद, गया, नवादा, बक्सर, रोहतास आदि जिलों में भी जगह-जगह जाम व प्रदर्शन किया गया. समस्तीपुर के ताजपुर में गांधी चौक के पास एन-एच को जाम किया गया.

रोड जाम के अलावा सिवान शहर व जिले के अन्य प्रखंडों में; पश्चिमी चंपारण के बेतिया, नरकटियागंज, सिकटा, बगहा में; पटना जिले के फुलवारी, धनरुआ, फतुहा में; समस्तीपुर, मधेपुरा, के कई इलाकों में प्रतिरोध सभाओं का आयोजन किया गया. पटना के बिहटा में 500 से अधिक भाकपा(माले) कार्यकर्ता सड़क पर उतरे और घंटों चौराहा जाम रहा. मार्च का नेतृत्व पूर्व सांसद रामेश्वर प्रसाद, सुरेन्द्र यादव, माधुरी गुप्ता आदि कर रहे थे. कार्यक्रम की अध्यक्षता गोपाल सिंह ने की.

भागलपुर में भाकपा(माले) सहित वाम-लोकतान्त्रिक दलों एवं दलितों-पिछड़ों व समाज के अन्य कमजोर तबकों के लोगों ने भगत सिंह चौक से झंडे-बैनर से लैस मार्च निकाला जिसे भारी जनसमर्थन मिला. समस्तीपुर में मालगोदाम चौक स्थित माले कार्यालय से विशाल प्रतिवाद मार्च निकला जिसका नेतृत्व जीवछ पासवान, सुरेन्द्र प्रसाद सिंह आदि ने किया.

झारखंड के रांची में भारत बंद के समर्थन में भाकपा(माले) कार्यकर्ता सड़क पर उतरे. राज्य कार्यालय से मार्च निकाल कर अल्बर्ट एक्का चौक पर प्रदर्शन किया गया और संशोधन के फैसले की प्रतियां भी जलाई गईं. अल्बर्ट एक्का चौक पर सड़क पर बैठकर बंद के समर्थन में नारे लगाये. रैली का नेतृत्व केन्द्रीय कमेटी सदस्य शुभेंदु सेन, जिला सचिव भुवनेश्वर केवट ने किया. पार्टी नेताओं ने कहा की सरकार और न्यायालय सामाजिक न्याय का गला घोंट रही है. लम्बे संघर्षों के बाद दलितों आदिवासियों के संरक्षण के लिए बने कानून में संशोधन लोकतंत्र पर सीधा प्रहार है.

इधर रांची में आदिवासी होस्टल और महिला कॉलेज परिसर में बंद करने उतरे सैकड़ों छात्र-नौजवानों पर पुलिस ने बर्बर लाठीचार्ज किया. पुलिसवाले गर्ल्स हॉस्टल में जबरन गेट तोड़कर घुसे और उन्होंने अंदर जाकर छात्रओं से बदसलूकी की, और बड़े पैमाने पर गिरफ्तारी के बाद होस्टल खाली करवा दिया। रांची के मोरहाबादी मैदान में विभिन्न आदिवासी संगठनों के 500 से अधिक कार्यकर्ताओं को मैदान पहुंचते ही गिरफ्तार कर लिया गया।

भारत बंद के एक दिन पहले 1 अप्रैल को गिरिडीह के बगोदर में बंद के समर्थन में एकता मंच के जरिये एक विशाल मशाल जुलूस निकाला गया जिसमें भाकपा(माले) भी शामिल थी. गिरिडीह में भारत बंद के समर्थन में स्थानीय टॉवर चौक से एक प्रतिवाद मार्च निकाला गया और नुक्कड़ सभा में प्रधान मंत्री मोदी का पुतला जलाया गया. गिरिडीह जिले के बिरनी, सरिया, राजधनवार, जमुआ, गांडेय आदि विभिन्न प्रखंडों में बंद के समर्थन में बड़ी तादाद में पार्टी कार्यकर्ता उतरे. बरवाडीह में आयोजित मशाल जुलूस में सैकड़ों लोग शामिल हुए. इस जुलूस को कई ग्रुपों व संगठनों को जोशीला समर्थन हासिल था. बरवाडीह ब्लॉक में भाकपा(माले), राजद और और अन्य गैर-भाजपा संगठनों ने एससी/एसटी ऐक्ट में संशोधन के खिलाफ प्रतिवाद में हिस्सा लिया. संपूर्ण बाजार बंद रहा. लगभग 200 प्रतिवादकारियों को गिरफ्तार कर ब्लॉक के कैंप जेल में रखा गया. घाटशिला, बोकारो जिला में चास स्थित गरगा पुल पर और हजारीबाग जिले में पदमा में एनएच-33 को घंटों जाम कर दिया गया।

धनबाद में यह बंद ऐतिहासिक रूप से सफल रहा. यहां का. सुबल दास और कार्तिक हांड़ी के नेतृत्व में भाकपा माले कार्यकर्ता बड़ी तादाद में सड़क पर उतरे. धनबाद जिला मुख्यालय में हजारों लोग एक जुलूस में शामिल हुए जो सुबह में निकला था और विभिन्न जगहों और बाजारों से गुजरते हुए 2 बजे दिन तक चलता रहा था. सभी बाजार पूरी तरह से बंद रहे. जुलूस के बाद जिला कार्यालय के सामने सड़क जाम किया गया और यातायात पूरी तरह अवरुद्ध रहा. भाकपा(माले) कार्यकर्ताओं ने कोडरमा जिले के जयनगर ब्लॉक में कई घंटों तक रेल लाइन को जाम रखा. इस बंद के कारण राजधानी समेत कई रेलगाडि़यों का परिचालन बाधित हुआ. प्रतिवादकारियों ने नारे लगाए कि देश फासीवादी तरीके से नहीं, बल्कि संविधान के मुताबिक चलेगा. डालटनगंज रेलवे स्टेशन पर तीन घंटे तक रेल परिचालन को ठप्प कर दिया गया। देवघर जिले के मोहनपुर बाजार में कामरेड गीता मंडल और सहदेव यादव के नेतृत्व में, गढ़वा जिले में काली चरण मेहता के नेतृत्व में और रामगढ़ जिले में भी भुबनेश्वर बेदिया के नेतृत्व में माले कार्यकर्ता बंद के समर्थन में सड़क पर उतरे।

आंध्र प्रदेश भारत बंद के समर्थन में आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में येलेश्वरम मंडल में रैली निकाली गई और सड़क जाम किया गया. कामरेड गणेश्वर राव, अर्जुन राव और अन्य नेताओं की रहनुमाई में अनेक भाकपा(माले) कार्यकर्ता इसमें शामिल हुए.

उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति-जनजाति (अत्याचार निवारण, 1989) कानून या दलित ऐक्ट में संशोधन के जरिये उसे निष्प्रभावी करने के खिलाफ दलित संगठनों द्वारा 2 अप्रैल 2018 को आहूत भारत बंद को उत्तर प्रदेश में भी सफल बनाने के लिए भाकपा(माले) व जनसंगठनों के कार्यकर्ताओं ने पूरे प्रदेश में जोरदार प्रदर्शन किया और कानून में संशोधन को रद्द करने की पुरजोर मांग की। राजधानी लखनऊ में भाकपा(माले) की लखनऊ इकाई ने जिला प्रभारी का. रमेश सिंह सेंगर के नेतृत्व में लाल झंडे और बैनर के साथ लालकुआं कार्यालय से मार्च शुरू किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने हुसैनगंज चौराहा, बर्लिंग्टन, विधानसभा होते हुए हजरतगंज चौराहे पर अम्बेडकर प्रतिमा पर पहुंचकर वहां मौजूद दलित संगठनों के साथ एकजुटता व्यक्त की और जमकर नारेबाजी की। का. सेंगर ने कहा कि मोदी सरकार के सत्तासीन होने के बाद से पूरे देश में दलितों, अल्पसंख्यकों के ऊपर हमलों की बाढ़ आ गई है। एक साजिश के तहत संघ परिवार ने दलितों के सुरक्षा कवच को छिन्न भिन्न कर देने, उनके हमलावरों के मनोबल को बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का उपयोग किया गया है जिसे देश के लोकतंत्र पसंद लोग, दलित-उत्पीडि़त जनता बर्दाश्त नहीं करेगी। मार्च में राजीव गुप्त, मीना सिंह, मो. शकील कुरैशी, रमेश शर्मा, रामसेवक रावत समेत बड़ी संख्या में लोग शामिल थे।

गोरखपुर में भाकपा माले कार्यकर्ताओं ने पुलिस लाइन के सामने स्थित पार्टी कार्यालय से जुलुस निकला जिसने शहर की विभिन्न सड़कों पर मार्च करते हुए गोरखपुर बन्द कराया। बंद के दौरान सभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले जिला सचिव राजेश साहनी ने कहा केंद्र सरकार दलितों को जो भी अधिकार मिला है उसको छीन लेना चाहती है।

वाराणसी में एससी/एसटी ऐक्ट को कमजोर किए जाने के विरोध में सोमवार को सर्किट हाउस, कचहरी पर भाकपा-माले की अगुवाई में विभिन्न जन-संगठनों द्वारा सभा का आयोजन किया गया और प्रतिवाद मार्च निकाला गया। भाकपा-माले की केंद्रीय कमेटी सदस्य मनीष शर्मा ने इस मौके पर कहा कि एससी-एसटी ऐक्ट के दुरुपयोग संबंधी बिना किसी अध्ययन और ठोस साक्ष्य के एक्ट को कमजोर करने की कोशिश की गई है. सभा को खेत मजदूर सभा के नेता अमरनाथ, इंसाफ मंच के संयोजक अमान अख्तर, जन अधिकार मंच के अनिल मौर्य, महिला जागृति समिति की सुमन देवी ने भी सम्बोधित किया. गाजीपुर में भाकपा(माले) के जुलूस व सभा में अन्य संगठन भी आ जुड़े और आंदोलनकारियों की संख्या बढ़ते-बढ़ते हजारों हो गई। सीतापुर, फैजाबाद, रायबरेली, चंदौली, मिर्जापुर, भदोही, देवरिया, बलिया, जालौन, मथुरा आदि जिलों में भी माले कार्यकर्ता जुलूस-प्रदर्शन आयोजित कर भारत बंद में शामिल हुए। इस मौके पर लखनऊ में पार्टी राज्य सचिव सुधाकर यादव ने एक बयान जारी कर भारत बंद की शानदार सफलता पर प्रदेशवासियों और देशवासियों को बधाई दी। उन्होंने दलितों की सुरक्षा के लिए बने केंद्रीय कानून (एससी/एसटी ऐक्ट, 1989) को बेहद हल्का बना देने के सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के लिए केंद्र की राजग सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वह दलितों को लेकर दोमुंही बातें करती है। सर्वोच्च न्यायालय मेें इस कानून पर फैसले के समय वह समर्थन की मुद्रा में रही और जब देश भर में उसकी भद्द पिटने लगी, तो मुंह छुपाने के लिए पुनर्विचार याचिका लेकर आयी है।
उन्होंने कहा कि इसके पीछे आरएसएस-भाजपा की विचारधारा काम कर रही है, जो दलितों का वोट लेने के समय सामाजिक समरसता और जातिविहीन समाज की बातें करती हैं, लेकिन असल व्यवहार में मनुवाद को लागू करती हैं। उन्होंने कहा कि मोदी और योगी की सरकार आने के बाद दलित उत्पीड़न की घटनाएं उफान पर हैं। गुजरात के ऊना, उत्तर प्रदेश के शब्बीरपुर (सहारनपुर), महाराष्ट्र के भीमा-कोरेगांव आदि घटनाएं तो कुछ बानगी हैं। उन्होंने एससी/एसटी ऐक्ट को पुराने स्वरूप में बहाल कर उसके प्रभावी क्रियान्वयन की मांग करते हुए कहा कि संघ-भाजपा की इतिहास के पहिये को विपरीत दिशा में घुमाने की कोशिशों का जमकर विरोध होगा और उसे कदापि सफल नहीं होने दिया जायेगा।

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