भारत में लेनिन का मतलब है भगत सिंह, लेनिन का मतलब है अशफाकउल्ला खान.

Ramji Rai

 

त्रिपुरा चुनाव में बदलाव के लिए मिले जनादेश की व्याख्या हिटलरवादी संघी-भाजपाई लेनिन की मूर्ति पर बुलडोजर चलाने के रूप में, कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं और उनके कार्यालयों पर हमला करने के रूप में कर रहे हैं। कह रहे हैं लेनिन का भारत से क्या वास्ता।

नीत्शे-मुसोलिनी-हिटलर को अपना रोलमॉडल मानने वाले इन फ़र्ज़ी देशभक्तों को यह नहीं पता कि भारत के आज़ादी की लड़ाई का सबसे महान मस्तिष्क, जिसे उपनिवेशवादी ताकतों ने असमय ही सुला दिया, वह हमारा देश का प्यारा भगत सिंह लेनिन को अपना रोलमॉडल मानता था। जेल से जिसने रूसी क्रांति की वर्षगांठ पर बधाई पत्र भेजा था। जिन दिनों ऐसी किताबें रखने-पढ़ने को भारी अपराध माना जाता था वह रूसी क्रांति से संबंधित किताबें जुटा कर बहुत ध्यान से पढ़ता और अपने साथियों को भी पढ़ने के लिए प्रेरित करता था। जो फांसी दिए जाने के कुछ मिनट पहले तक लेनिन की एक किताब पढ़ रहा था और जेल के अधिकारियों से कह रहा था – “क्या मुझे लेनिन की किताब का एक अध्याय भी ख़त्म नहीं करने देंगे ? ज़रा एक क्रांतिकारी की दूसरे क्रांतिकारी से मुलाक़ात तो ख़त्म होने दो।”

नहीं पता उनका यह खत लेनिन को कभी मिला भी या नहीं लेकिन आज़ादी की लड़ाई के एक और दीवाना-विचारक अशफाकउल्ला खां ने लेनिन को पत्र लिख कर उनसे मिलने की इच्छा जाहिर की थी।

पाश की एक कविता “सबसे खतरनाक होता है हमारे सपनों का मर जाना” जो कोर्स में लगी थी, जिसे तुम लोगों ने खरनाक कविता मानते हुए कोर्स से हटवा दिया, उसने एक कविता लिखी थी, ‘शहीद भगत सिंह’, जिसमें उन्होंने लेनिन और भगत सिंह के संबंध को अपना विषय बनाया।

तुम हिटलर की चाल चलो
लोग भगत सिंह के रास्ते आगे बढ़ते जाएंगे

तुम साम्राज्यवादियों के आगे माथा झुकाओ
लोग उनके नाश के दिन नज़दीक ले आएंगे।

शहीद भगत सिंह
पाश

पहला चिंतक था पंजाब का
सामाजिक संरचना पर जिसने
वैज्ञानिक नज़रिए से विचार किया था

पहला बौद्धिक
जिसने सामाजिक विषमताओं की, पीड़ा की
जड़ों तक पहचान की थी

पहला देशभक्त
जिसके मन में
सामाजिक सुधार का
एक निश्चित दृष्टिकोंण था

पहला महान पंजाबी था वह
जिसने भावनाओं व बुद्धि के सामंजस्य के लिए
धुंधली मान्यताओं का आसरा नहीं लिया था

ऐसा पहला पंजाबी
जो देशभक्ति के प्रदर्शनकारी प्रपंच से
मुक्त हो सका

पंजाब की वीचारधारा को उसकी देन
सांडर्स की हत्या
एसेम्बली में बम फेंकने और
फांसी के फंदे पर लटक जाने से
कहीं अधिक है
भगत सिंह ने पहली बार पंजाब को
जंगलीपन, पहलवानी व जहालत से
बुद्धिवाद की ओर मोड़ा था

जिस दिन फाँसी दी गई
उनकी कोठरी में लेनिन की किताब मिली
जिसका एक पन्ना मुड़ा हुआ था
पंजाब की जवानी को
उसके आख़िरी दिन से
इस मुड़े पन्ने से बढ़ना है आगे,
चलना है आगे।

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