शिक्षा के बारे में भाजपा की भविष्य-दृष्टिकोण

सांप्रदयिक पुनरुत्थानवाद और उधार लिया हुआ रूढि़वाद

20 जनवरी 2018 को केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री और मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त सत्यपाल सिंह ने ऐलान किया कि ‘डार्विन का विकासवाद का सिद्धांत गलत है. 30-35 वर्ष पहले ही वैज्ञानिकों ने इसे खारिज कर दिया है. यह कहना गलत है कि मानवों का विकास बंदरों से हुआ है, और ऐसे प्रसंगों को स्कूल के इतिहास तथा विज्ञान के पाठ्यक्रमों से हटा दिया जाना चाहिए. हमारे पूर्वजों ने कभी भी बंदरों से आदमी बनते नहीं देखा है.’ मानो शिक्षा मंत्री की यह बकवास काफी न हो, आएसएस और भाजपा के विचारक राम माधव ने उनके समर्थन में ट्वीट किया और उन्होंने अमेरिका में ईसाई तत्ववादी दक्षिणपंथ द्वारा विकासवाद के खिलाफ ‘सृष्टिवादी’ प्रचार का एक उद्धरण भी पेश किया.

यह विडंबना है कि भाजपा और आरएसएस, जो अधिकांश भारतीय बुद्धिजीवियों पर ‘पश्चिमीकृत’ होने और ‘भारत की प्रतिभा’ से कटे-छंटे रहने की तोहमत लगते हैं, ईसाई तत्ववादी प्रचार से इतने मोहित हैं. ‘मेधावी योजना’ अथवा सृष्टिवाद – अर्थात् प्रजातियों के विकास का डार्विन सिद्धांत से नकार और यह दावेदारी कि ईश्वर ने दुनिया की रचना की है, जैसा कि ईसाई और इस्लाम मतों में दावा किया गया है – अमेरिका में ईसाई तत्ववादियों के बीच थोड़ा-बहुत प्रचलित है; और तुर्की में एर्दोगान की इस्लामी रूढि़वादी सरकार ने स्कूलों में वस्तुतः विकासवाद की पढ़ाई पर प्रतिबंध लगा दिया है – यह दावा करते हुए कि यह सिद्धांत ‘विवादास्पद है और छात्रों के लिए काफी जटिल है’. भाजपा और आरएसएस, जो ‘विज्ञान’ और ‘टेक्नोलॉजी’ को बढ़ावा देने की लंबी-चौड़ी बातें किया करते हैं, तत्ववादी बकवास का प्रचार करके दरअसल भारत में वैज्ञानिक शिक्षा का सबसे बड़ा नुकसान कर रहे हैं. यह गौरतलब है कि जहां भाजपा और आरएसएस भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के नाम पर ईसाइयों और मुस्लिमों की हत्या करने पर उतारू रहते हैं, वहीं अब वे ईसाई अैर इस्लामी तत्ववादी राजनीति की पुस्तकों से चंद बातें उधार भी ले रहे हैं.

भारत में वैज्ञानिक शिक्षा को लेकर भाजपा जो अजीबोगरीब हरकतें कर रही है, उसमें डार्विन के सिद्धांत का नकार सिर्फ एक चीज है. सत्यपाल सिंह ने यह भी कहा कि आइआइटी में छात्रों को रामायण में वर्णित पुष्पक विमान के बजाय राइट भाइयों (वायुयान के आविष्कारक) के बारे में क्यों बताया जाता है. राजस्थान विश्वविद्यालय में 72वें स्थापना दिवस समारोह में राजस्थान के शिक्षा मंत्री वासुदेव देवयानी ने ऐलान किया कि गुरुत्वाकर्षण के नियम की खोज आइजक न्यूटन के 1000 साल पूर्व ब्रह्मगुप्त ने की थी! देवयानी ने यह भी दावा किया कि गायें ऑक्सीजन गैस सांस से बाहर निकालती हैं.

स्वयं प्रधान मंत्री मोदी ने डॉक्टरों की एक सभा में संघी ‘बुद्धि’ को अभिव्यक्ति दी थी, “हम गर्व महसूस कर सकते हैं कि एक समय मेडिकल विज्ञान में हमारे देश ने क्या उपलब्धि हासिल कर रखी थी. महाभारत कहता है कि कर्ण अपनी मां के गर्भ से पैदा नहीं हुए थे. इसका मतलब यह हुआ कि उस समय जेनेटिक विज्ञान मौजूद था. … हम भगवान गणेश की पूजा करते हैं. उस समय जरूर कोई प्लास्टिक सर्जन रहा होगा जिसने एक आदमी के शरीर पर हाथी का सिर लगा दिया और प्लास्टिक सर्जरी की शुरूआत की.”

लगभग 3000 वैज्ञानिकों ने सत्यपाल सिंह को लिखकर बताया कि “तथ्यतः यह कहना गलत है कि वैज्ञानिक समुदाय ने विकासवाद के सिद्धांत को नकार दिया है. इसके उलट, हर नई खोज डार्विन की अंतर्दृष्टि को पुष्ट करती है. कदाचित आपने यह भी दावा किया है कि वेद में हर सवाल का जवाब मौजूद है. उपलब्ध साक्ष्य इस तरह के अतिरंजित दावों की पुष्टि नहीं करते हैं और यह भारतीय वैज्ञानिक परंपराओं के इतिहास पर वास्तविक शोध कार्यों का अपमान है…. मीमांसा शास्त्र हमें बताता है कि विवेकपूर्ण और तर्कसंगत विचार के जरिये कैसे वेदों का विश्लेषण किया जाए. आप जिन परंपराओं को बुलंद करने का दावा करते हैं, आपके दावे उन्हीं परंपराओं के खिलाफ चले जाते हैं. अगर देश में मानव संसाधन विकास के लिए काम करने वाला कोई मंत्री इस किस्म का दावा करता है, तो इससे आलोचनात्मक शिक्षा और आधुनिक वैज्ञानिक शोध के जरिये वैज्ञानिक विचारों और चेतना को प्रचारित करने के वैज्ञानिक समुदाय के प्रयासों को नुकसान पहुंचता है…. इसीलिए, हम आपसे आग्रह करते हैं कि आप तत्काल प्रभाव से अखिल भारतीय वैदिक सम्मेलन में अपने उस कथित भाषण को वापस ले लें और विकासवाद के सिद्धांत की पढ़ाई को लेकर मंत्रलय की नीति के बारे में स्पष्टीकरण जारी करें.”

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