बाल संहारी योगी के इस्तीफे की मांग पर पटना में मानव शृंखला व विरोध सभा

आइसा, इनौस व ऐपवा ने कार्टूनों के जरिए किया अपने रोष का प्रदर्शन.
बाढ़ के कारण मारे गये लोगों को भी दी गयी श्रद्धांजलि.

पटना 18 अगस्त 2017
छात्र संगठन आइसा, इनौस व महिला संगठन ऐपवा ने आज संयुक्त रूप से पटना के कारिगल चैक पर बाल संहारी यूपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस्तीफे की मांग पर मानव शृंखला का आयोजन किया. मानव शृंखला के उपरांत विरोध सभा का भी आयोजन किया गया. विरोध सभा में बिहार में प्रलंयकारी बाढ़ से मारे गये लोगों को श्रद्धांजलि दी गयी और बिहार सरकार से राहत कार्य युद्ध स्तर पर चलाने की मांग की गयी.

मानव शृंखला कार्यक्रम का नेतृत्व ऐपवा की बिहार राज्य अध्यक्ष सरोज चौबे, पटना विश्वविद्यालय इतिहास विभाग की पूर्व अध्यक्ष प्रो. भारती एस कुमार, अनीता सिन्हा, आइसा के बिहार राज्य अध्यक्ष मोख्तार, आकाश कश्यप, बाबू साहेब, इनौस के मनीष कुमार सिंह, ऐक्टू नेता रणविजय कुमार, मधु, विभा गुप्ता, आइसा के रामजी यादव, नवनीत, हैदर, आलोक, निशांत, अपूर्व, जयंत, चंदन, राकेश, सत्यम, दीपक, संतोष, सुमन, विवेक, अजीत पटेल, राजीव, रंजीत आदि ने किया.

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बच्चे मौजूद थे, जो अपनी हाथों में तख्तियां लेकर गोरखपुर हादसे में मारे गये बच्चों के लिए न्याय मांग रहे थे. उन्माद, उत्पात की राजनीति बंद करो, नागरिक सुविधाओं का प्रबंध करो; चिकित्सा पर बजट का दुगुना खर्च करो; बाल संहारी योगी आदित्यनाथ इस्तीफा दो; मोदी-योगी शर्म करो; हादसा नहीं संहार है, आदित्यनाथ जिम्मेवार है आदि से संबंधित पोस्टर लेकर प्रदर्शन कर रहे थे. एक पोस्टर में संघ-भाजपा परिवार द्वारा किए जा रहे हमले के संबंध में ‘वंदे मारते हम’ का पोस्टर लेकर बच्चों ने प्रदर्शन किया. मानव शृंखला में बच्चों के साथ-साथ पटना आटर््स काॅलेज व पटना विश्वविद्यालय के छात्र बड़ी संख्या में शामिल थे.

तकरीबन 1 घंटे के मानव शृंखला के पश्चात विरोध सभा आरंभ हुई, जिसका संचालन आइसा नेता विकास यादव ने किया. सभा को संबोधित करते हुए प्रो. भारती एस कुमार ने कहा कि गोरखपुर की घटना सरकार की लापरवाही का नतीजा है. एक तो यह हादसा सरकार की गलती से हुई, उसपर योगी सरकार इसकी जिम्मेवारी लेने से बच रही है. यह ज्यादा खतरनाक है. यह दिखलाता है कि हम एक अघोषित आपातकाल में रह रहे हैं, जहां 63 बच्चों की आॅक्सीजन के अभाव में मौत के बावजूद सरकार जिम्मेवार नहीं है. उस पर मुख्यमंत्री योगी कह रहे हैं कि अगस्त में तो बच्चों की मौत होते ही रहती है, यह और शर्मनाक व हद दर्जे का गैर जिम्मेवाराना वक्तव्य है.

ऐपवा की बिहार राज्य अध्यक्ष सरोज चैबे ने कहा कि ऐसी हृदयविदारक घटना को महज प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा कहना सही नहीं होगा, बल्कि यह राज्य प्रायोजित जनसंहार है. 5 महीने से आॅक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी को महज 70 लाख रु. भुगतान न करने का नतीजा है कि इतने बड़े पैमाने पर बच्चों को मौत की नींद सोना पड़ा. ऐक्टू नेता रणविजय कुमार ने कहा कि गोरखपुर का इलाका लंबे समय से जापानी बुखार से पीड़ित है. योगी आदित्यनाथ लंबे समय से वहां के संासद व अब यूपी के मुख्यमंत्री हैं. इसलिए केवल तत्कालीन 63 बच्चों की दुखद मौत का सवाल नहीं है, बल्कि मूल सवाल यह है कि बच्चों के स्वास्थ्य व जीवन के प्रति ये सरकारें क्या कर रही हैं? हर दिन हिंदू-मुस्लिम में झगड़ा लगाने की कोशिश, देश में युद्धोन्माद भड़काकर अपनी राजनीति रोटी सेंकने वाले भाजपाइयों के लिए लोगों का स्वास्थ्य कोई सवाल ही नहीं है.

आइसा नेता आकश कश्यप ने कहा कि एक तरफ मोदी-योगी की सरकार पूरे देश में उन्माद-उत्पात फैलाकर लोगों में भय व आतंक पैदा कर रही है, तो दूसरी ओर स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषय की उपेक्षा करके जनसंहार रचा रही है. योगी प्रशासन का पूरा जोर यूपी में उन्माद-उत्पात फैलाने व अल्संख्यक समुदाय के लोगों को डराने में है, जाहिर है ऐसे में जरूरी नागरिक सेवायें सरकार के लिए कोई विषय ही नहीं बनेगी. यहां तक कि जिस कफील खान ने बच्चों की जान बचाने के लिए अथक परिश्रम किया, उसे भी योगी ने हटा दिया. जाहिर है कि इस दुख व वेदना की घड़ी में भी योगी अपनी सांप्रदायिक राजनीति से बाज नहीं आए.

अनीता सिन्हा नेे कहा कि यदि योगी सरकार इस्तीफा नहीं करती, तो हम अपने आंदोलन को और तेज करेंगे. जो सरकार अपने नागरिकों के प्रति संवेदनशील नहीं है, उसे सत्ता में बने रहने का कोई हक नहीं है. इनौस नेता मनीष कुमार सिंह ने भी सभा को संबोधित किया.

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