प्रधानमंत्री के नाम #AIARLA का खुला पत्र, 3 महीने के अंदर सबके वैक्सीनेशन की गारंटी हो

माननीय प्रधानमंत्री जी,

वैज्ञानिकों और डॉक्टरों के सुझावों की अवहेलना कर कोरोना पर विजय की घोषणा करने की मानसिकता ने देश के ऊपर विपत्ति का पहाड़ खड़ा कर दिया है। कोरोना की दूसरी लहर संक्रमण और मौतों की सुनामी बनकर आयी है क्योंकि इससे निपटने की हमने कोई तैयारी ही नही की थी। सत्ता में बैठे नेताओं के भाषण और व्यवहार ने जनता तक यह संदेश पहुंचा दिया कि कोरोना बीमारी आयी और चली गयी, और भारत इसमें विश्वविजेता बनकर उभरा। लेकिन स्थिति उलट गयी और आज भारत मे बढ़ता संक्रमण पूरी दुनिया के लिये चिंता का सबब बन गया है।शहर से लेकर गांव तक मौत का तांडव जारी है। दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश में लोग ऑक्सीजन के अभाव में तड़प तड़प कर मर रहे हैं। अस्पतालों में अचानक ऑक्सीजन समाप्त होने के चलते कई कई अस्पतालों में एक साथ अनगिनत मौतें हुई हैं। गांव-कस्बों की स्थिति तो और भयावह होती जा रही है क्योंकि वहां तक किसी किस्म का मेडिकल केअर पहुंच ही नही रहा है। मोबाइल मेडिकल टीम की कहीं कोई व्यवस्था नही है।कोरोना से निपटने को लेकर पंचायत स्तरीय जो ढांचा बनने चाहिए था वो नदारद है। पीएचसी में कोरोना केअर की कोई व्यवस्था नही है। यहां तक कि जिला अस्पतालों में आईसीयू बेड्स नही के बराबर हैं। प्रति लाख की आबादी पर डॉक्टर्स और मेडिकल स्टाफ़स के मामले में हम अन्य देशों से बहुत पीछे हैं। यही वजह है कि उत्तरप्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, झारखंड, आंध्र सहित अन्य राज्यों में ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मौतें हो रही हैं जो देश मे दर्ज हो रही मौतों की संख्या में शामिल नही है। गांव-गांव में बड़ी संख्या में लोग सर्दी,खांसी और बुखार से पीड़ित हैं लेकिन उनके बीच जांच के लिए कोई एजेंसी नही जा रही हैं। यह हाल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के बगल के गांव से लेकर सुदूरवर्ती गांव-पंचायतों की है। लोगों के पास लाशों को जलाने के लिए भी साधन नही हैं। यही वजह है कि बड़ी संख्या में लाशें गंगा, यमुना, सरयुग, शारदा आदि नदियों में तैर रही हैं। दक्षिण के कर्नाटक, आंध्र आदि राज्यों के हालत भी ऐसी ही हैं। बंगाल को तो लंबे समय तक चलने वाला चुनाव अभियान और उसमें होनी वाली बड़ी बड़ी रैलियों ने तो और तहस नहस कर दिया है।

इस स्थिति ने पूरे देश को भय और आतंक में जीने को मजबूर कर दिया है, वहीं बीमारी को लेकर जो वैज्ञानिक जागरूकता और बचाव के प्रति जरूरी सोच का घोर अभाव है।इस कठिन दौर में आशा, रसोइया, आंगनबाड़ी आदि स्कीम वर्कर्स जो फ्रंट लाइन वर्कर्स के बतौर काम कर रही हैं, उनके लिए जरूरी सुरक्षा कीट और जरूरी वाहन की कोई व्यवस्था नही है। उन्हें जीने लायक सम्मानजनक मज़दूरी देने के लिये भी केंद्र व राज्य सरकारें तैयार नही हैं। कुल मिलाकर पूरा देश हेल्थ इमरजेंसी के दौर से गुजर रहा है लेकिन हमारा तंत्र बूत की तरह खड़ा है। सरकार से लेकर पूरा सिस्टम अपाहिज हो गया है।लगता है कि देश एक गहरे पालिसी पैरालिसिस का शिकार हो गया है।

अभूतपूर्व त्रासदी के इस दौर में जान और जीविका दोनों पर गहरा संकट है। आपदा में अवसर तलाशने की अमानवीय सोच का बीज जो ऊपर से बोया गया,उसका नंगा और अमानवीय कारोबार चारों तरफ चल रहा है। ऑक्सीजन से लेकर दबाईयों की कालाबाज़ारी जारी है।चौतरफा तबाही के बीच जब देश का एक बड़ा तबका बेकारी, भूख-अर्द्ध भुखमरी का शिकार है,महिलाएं और बच्चे कुपोषित हैं; मंहगाई की बढ़ती मार ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। खाद्य सामग्रियों की बढ़ती कीमतें भूख-कुपोषण के भूगोल का दायरा बढ़ाती जा रही हैं। पूर्ण लॉकडौन-सीमित लॉकडौन और कोरोना की बढ़ती तबाही को लेकर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट्स ने स्पष्ठ निर्देश दिया है कि लोगों की जीविका पर सरकार अपेक्षित ध्यान दे। प्रधानमंत्री जी! आपने 5-5 किलो सूखा अनाज दो महीने तक देने की घोषणा करके अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली है। आप जानते हैं कि सूखा अनाज पूरा भोजन नही है। भोजन अधिकार का मतलब सम्पूर्ण भोजन की योजना पर अमल करना।फिलहाल पूरा ग्रामीण भारत भारी नकदी संकट से जूझ रहा है और कोरोना की दूसरी लहर ने रूरल डिस्ट्रेस को बढ़ा दिया है। लोगों के पास सर्दी, जुकाम और बुखार की दवा खरीदने के पैसे नही हैं। लाश जलाने के लिये लोग लकड़ी नही खरीद पा रहे हैं। किसानी चौपट है और कृषि उपज खरीद के सारे तंत्र ध्वस्त हैं।

ऐसी स्थिति में गांव और गरीबों को बचाने और कोरोना को मात देने के लिये केंद्र सरकार को बड़ी पहल और बड़े पैकेज के साथ आना होगा। ग्रामीण गरीबों-मज़दूरों के बीच कार्यरत संगठन-खेग्रामस के 20 राज्यों के नेताओं की ज़ूम बैठक से प्राप्त जमीनी रिपोर्ट के आधार पर हम निम्नलिखित मांगो को आपके समक्ष रख रहे हैं। उम्मीद है कि आपकी सरकार अपेक्षित और त्वरित नीतिगत निर्णय लेकर जरूरी कदम उठाएगी।

हमारी मांगें

1. राष्ट्रीय हेल्थ इमरजेंसी मानते हुए सरकार सबों के लिये मुफ्त जांच, टीका, इलाज और भोजन अधिकार की गारंटी करे। सभी जरूरतमंद कम आय वाले परिवारों को 6000 रुपये की मासिक सहायता का प्रावधान कम से कम 6 महीने के लिये करे।

2. सभी ग्राम पंचायतों में कोविड केअर सेंटर की व्यवस्था हो जहां मुफ्त जांच, टीका और क्वारंटाइन की व्यवस्था हो। यहां प्राथमिक इलाज की व्यवस्था हो तथा मरीजों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा जिला अस्पतालों तक पहुंचाने के लिये एम्बुलेंस की व्यवस्था हो। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को अपग्रेड किया जाए और वहां ऑक्सीजन युक्त बेड्स तथा सक्षम डॉक्टर्स की तैनाती हो। कम्युनिटी हेल्थ सेन्टर, रेफेरल अस्पताल और जिला अस्पतालों में आईसीयू बेड्स की तत्काल व्यवस्था हो तथा वहां 24×7 इमरजेंसी सुविधा की गारंटी हो।

3. इस दौर में हो रही हर मौतों को कोरोना रिलेटेड मौत मानकर सरकार पीड़ित परिवारों को 10 लाख का मुआबजा दे।

4. कोरोना को लेकर व्याप्त भ्रांतियों, अंधविश्वासों, टोटकों आदि के खिलाफ सरकार के जनसंपर्क विभाग के द्वारा व्यापक अभियान चलाया जाए और बीमारी को लेकर वैज्ञानिक सोच समाज मे स्थापित किया जाए। गाय,गोबर और गोमूत्र से कोरोना के उपचार के अंधविश्वासों का खंडन सभी प्रचार माध्यमों के जरिये हो।

5. महामारी के दौर में सभी मनरेगा मज़दूरों द्वारा 50 कार्यदिवस का डीम्ड वर्क मानकर उन्हें पारिश्रमिक का भुगतान सरकार करे। काम चाहने वाले सभी मज़दूरों को सरकार काम दे।50 वर्ष की उम्र सीमा का सर्कुलर वापस लिया जाए।

6. सभी माइग्रेंट वर्कर्स, आशा-आंगनबाड़ी-रसोइयों को सरकार 10 हज़ार रुपये का विशेष कोरोना भत्ता दे। सामाजिक सुरक्षा के लाभार्थियों को सरकार 5हज़ार रुपये का पेंशन दे।

7. सभी राशन कार्डधारियों समेत छोटे-मझोले किसानों को सरकार एकमुश्त 35 किलो सूखा अनाज के साथ 5000 रुपये के साथ विशेष मासिक सहायता दे। कृषि उपज खरीद की गारंटी सरकार करे।

8. 3 महीने के भीतर बच्चों समेत सभी नागरिकों को मुफ्त टीका देने की गारंटी सरकार करे।

9. सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले सभी छात्र-छात्राओं को सरकार स्मार्ट मोबाइल दे और ऑनलाइन क्लासेज की व्यवस्था हो।

10. किसानों-मज़दूरों के सभी तरह के कर्ज की माफी हो। स्वयं सहायता समूह और माइक्रो फाइनेंस के सभी कर्ज़ की माफी हो!कर्ज़ वसूली और मालगुजारी वसूली पर रोक लगे।

निवेदक

रामेश्वर प्रसाद, सम्मानित राष्टीयअध्यक्ष राष्ट्रीय, पूर्व सांसद

 धीरेन्द्र झा, राष्टीय महासचिव

श्रीराम चौधरी, राष्टीयअध्यक्ष

सत्यदेव राम, महबूब आलम, बीरेंद्र गुप्ता,गोपाल रविदास, बंगर राव, बालू, अरूप मोहंती, तिरुपति गोमांगो, सजल अधिकारी-असम] देवकी नंदन बेदिया-झारखंड] राजेश साहनी-उत्तरप्रदेश, भगवंत –पंजाब, श्याम गोहिल-महाराष्ट्र

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