#CPIML ने चुनाव आयोग को सौंपा ज्ञापन, व्यापक भागीदारी व समान अवसर की गारंटी करे आयोग.

पटना 29 जून 2020

भाकपा-माले के वरिष्ठ नेता काॅ. राजाराम व राज्य कमिटी सदस्य उमेश सिंह की दो सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल ने आज मुख्य निर्वाची पदाधिकारी बिहार से मुलाकात की और पार्टी की ओर से बिहार विधानसभा चुनाव के संबंध में उन्हें ज्ञापन सौंपा.

भाकपा-माले ने चुनाव आयोग से मांग की है कि चुनाव में कोरोना महामारी को देखते हुए व्यापक जनता की भागीदारी और सभी दलों को समान अवसर प्रदान करने के बारे में आयोग को गंभीरता से विचार करना होगा. वर्चुअल प्रचार का तरीका सत्ताधारियों के लिए ही मुफीद साबित होगा और आर्थिक तौर पर कमजोर दल अपनी बातों को जनता तक पहुंचा ही नहीं पायेंगे. ऐसे में चुनाव जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों की सही अभिव्यक्ति नहीं हो सकता है.

ज्ञापन

सेवा में,
मुख्य निर्वाची पदाधिकारी, बिहार

विषय: बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में व्यापक जनता की भागीदारी और तमाम पार्टियों को समान अवसर देने के संबंध मंे.

महाशय,
आज पूरा समाज कोरोना महामारी की चपेट में है. बिहार में अभी तक 30 लाख से अधिक प्रवासी मजदूर लौटकर वापस आए हैं, जिनका अब तक कोरोना टेस्ट नहीं हो सका है और डब्लूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार अगस्त-सितंबर तक बिहार कोरोना के एक बड़े संेटर के रूप में विकसित हो सकता है. कोरोना को रोकने के लिए किए गए लाॅकडाउन ने गरीबों-मेहनकशों की कमर तोड़ दी है और सूबे की अधिकांश जनता आज भोजन तक का भयावह संकट झेल रही है. लाखों-लाख परिवारों के सामने जिंदगी बचाने का संकट उपस्थित हो गया है और वे लगातार एक पीड़ादायक स्थिति से गुजर रहे हैं. दूसरी ओर, यद्यपि लाॅकडाउन खत्म करने वाली प्रक्रिया और बहुत सी आर्थिक-सामाजिक गतिविधियां आरंभ हो गई हैैं, फिर भी राजनीतिक गतिविधियों पर रोक बरकरार है. आवागमन, अस्पताल, कोर्ट आदि की स्थिति अभी भी सामान्य नहीं हुई है.
इन्हीं परिस्थितियों में बिहार में विधानसभा चुनाव कराने की बात हो रही है. चर्चा आम है कि इस बार चुनाव प्रचार वर्चुअल तरीके से कराये जायेंगे. इसको लेकर आम लोगों के बीच कई प्रकार की दुविधायें व शंकायें हैं. इस संदर्भ में हमारी पार्टी आपसे निम्नलिखित बिंदुओं पर विचार करने की अपील करती है.

  1. चुनाव का तकाजा है कि जनता की व्यापक भागीदारी सर्वोच्च प्राथमिकता में होनी चाहिए, लेकिन माहौल बहुत चुनौतीपूर्ण बना हुआ है. महामारी के आतंक और जिंदा रहने की जद्दोजेहद के बीच व्यापक मेहनतकश जनता की चुनाव में भागीदारी की गारंटी करना बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण है. अगर इसकी गारंटी नहीं होती तो चुनाव अपने संपूर्ण लोकतांत्रिक औचित्य को ही खो देगा. हमारी पार्टी जानना चाहती है कि चुनाव आयोग ने इस संदर्भ में कौन-कौन से ठोस कदम उठाए हैं.
    विशेषज्ञों का मानना है जिस रफ्तार से कोरोना महामारी फैल रही है, अगस्त-सितंबर आते-आते देश में संक्रमण की दर 2 लाख प्रति रोज हो जाएगी. बिहार में भी यह तेजी से फैल रहा है. वैसे हालात में लाखों-लाख संक्रमित व क्वारंटाइन मतदाताओं के मतदान की गारंटी की व्यवस्था के बारे में चुनाव आयोग की सोच क्या है?
  2. अंदेशा प्रबल है कि यदि प्रचार का तरीका वर्चुअल अपनाया गया तो जिन पार्टियों के पास सत्ता, ताकत और पैसा है; उनके लिए वर्चुअल तरीका ज्यादा मुफीद साबित होगा और वे चुनाव को निर्णायक रूप से प्रभावित कर पाने में सक्षम होंगे. इस तरह, केवल सत्ताधारी दलों की ही बात जनता तक पहुंचेगी और विपक्षी पार्टियों की बात पहुंच ही नहीं पाएगी या आंशिक रूप से पहुंच पाएगी. ऐसी स्थिति में जनता सही-गलत के बीच फैसला कर नहीं कर पाएगी और एकांगी रूप से सत्ताधारी दल पूरे चुनाव को ही हथिया लेने में सफल हो जायेंगे. इस तरह चुनाव जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ क्रूर मजाक बन कर रह जाएगा. भाजपा ने करोड़ों-करोड़ रुपए खर्च करके वर्चुअल रैली आरंभ भी कर दी है. वर्चुअल रैली भाजपा को ही एकतरफा रूप से फायदा पहुंचाने का हथियार बन जाएगा. अतः हमारी पार्टी वर्चुअल रैली का पुरजोर विरोध करती है.
  3. चुनाव की संपूर्ण प्रक्रिया में तमाम पार्टियों को समान अवसर मिलना चाहिए. हमारी पार्टी पंजीकृत राष्ट्रीय पार्टी है जिसके बिहार में तीन विधायक भी हैं, लेकिन चुनाव आयोग विचार-विमर्श करने के लिए सिर्फ राष्ट्रीय अथवा राज्यस्तरीय मान्यता प्राप्त पार्टियों को ही बुलाती है. इससे लोकतंत्र का दायरा संकुचित होता है. आयोग को समावेशी रूख अख्तियार करना चाहिए और चुनाव लड़ने वाली तमाम पार्टियों से विचार-विमर्श करना चाहिए.
  4. अखबारों में खबर आई है कि कोराना से बचाव के लिए तमाम चुनावकर्मी पीपीइ का इस्तेमाल करेंगे. यह सही भी है. लेकिन मतदान के दौरान बूथों पर भीड़ स्वभाविक है. सरकार ने अभी तक किसी सामूहिक आयोजन में भागीदारी की अधिकतम संख्या 50 तय कर रखी है. आयोग ने बूथ पर वोटरों की संख्या घटाकर अधिकतम 1000 करने का फैसला किया है. लेकिन क्या यह भी एक बड़ा जमावड़ा नहीं होगा? ऐसे में मतदाताओं के बीच कोरोना के संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए चुनाव आयोग कौन से उपाय करेगा? लक्षण रहित संक्रमित मतदाता से अन्य मतदाता में संक्रमण नहीं फैलने के क्या उपाय किए जाएंगे? सरकारी आंकड़ा कहता है कि देश में कुल संक्रमित का 80 प्रतिशत लक्षण रहित संक्रमितों का है. बार-बार इवीएम का बटन दबाने से संक्रमण के संभावित फैलाव को रोकने े लिए आयोग कौन से कदम उठाएगा?

हमें उम्मीद है कि हमारी आशंकाओं व सुझावों पर चुनाव आयोग गंभीरता से विचार करेगा और चुनाव में व्यापक जनता की भागीदारी तथा सभी दलों को समान अवसर प्रदान करने की गारंटी करेगा. साथ ही, चुनाव कोरोना महामारी फैलाने का जरिया न बन जाए, इसकी भी गारंटी करेगा.

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