सुगौली बॉयलर विस्फोट जनसंहार के लिए सरकार दोषी : भाकपा-माले

एनजीओकरण की प्रवृत्तियों ने लूट व लापरवाही को बढ़ावा दिया है.

सरकार इस बड़े हादसे को दबाने की कर रही है साजिश

भाकपा-माले ने घटना की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच की मांग की.

चार मजदूरों की मौत की पुष्टि और कई अन्य अभी तक लापता, लापता लोगों की खोज करे सरकार.

मृतकों के परिजनों को अभी तक कोई मुआवजा नहीं, घायलों के इलाज में भारी लापरवाही.

18 अक्टूबर 2019

पूर्वी चंपारण के सुगौली में विगत दिनों भीषण बाॅयलर विस्फोट की घटना, जिसमें कई लोगों की मौतें हुईं, की जांच में दिनांक 17 नवंबर को भाकपा-माले की एक उच्चस्तरीय जांच टीम सुगौली पहुंची. जांच टीम ने इस भीषण घटना के विभिन्न पहलुओं की जांच की और इसके लिए मूल रूप से राज्य सरकार, जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और एनजीओ को सम्मिलित रूप से जिम्मेवार ठहराया है. नीतीश राज में विभिन्न संस्थानों में एनजीओ के व्यापक हस्तक्षेप से इस प्रकार की घटनाएं लगातार घट रही हैं. एनजीओ के मार्फत सरकारी विद्यालयों में भोजन बनाने के निर्णय से छात्रों का तो भला नहीं हो रहा है, लेकिन ऐसे संस्थानों की चांदी है. लूट व लापरवाही चरम पर है.

पूर्वी चंपारण जिला के सुगौली में मध्यान्ह भोजन के तहत बने एनजीओ आधारित केंद्रीकृत किचेन और स्थापित बाॅयलर में हुए महा विस्फोट की जांच के लिए भाकपा माले की उच्चस्तरीय टीम कल वहां पहुंची. घटना स्थल, स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और मोतिहारी सदर अस्पताल का दौरा किया गया. जांच टीम में भाकपा माले के पोलित ब्यूरो के सदस्य धीरेन्द्र झा, भाकपा माले विधायक सह खेग्रामस के सम्मानित राज्य अध्यक्ष सत्यदेव राम, पार्टी के पूर्वी चंपारण के सचिव प्रभुदेव यादव, विष्णुदेव यादव आदि थे. जांच टीम की रिपोर्ट और निष्कर्ष निम्नलिखित हैं-

सुगौली बाजार से पहले ही बंगरा गाँव मे भाजपा नेता रामगोपाल खण्डेवाल का रोड के किनारे गोदाम था, जिसमंे चावल, यूरिया आदि का भंडारण होता था. इसी कैंपस में पिछले महीने 16 अक्टूबर को केंद्रीकृत किचेन का उद्घाटन जिला शिक्षा पदाधिकारी और बीडीओ ने किया. केंद्रीकृत किचेन का ठेका ‘नवप्रयास’ नामक एनजीओ को दिया गया था और उसके संचालक नरेंद्र कुमार सिंह थे. 57 स्कूलों के 1100 बच्चों को मिड डे मिल पहुंचाने का ठेका मिला था. बड़ा बायलर मुख्य सड़क से जीरो दूरी पर कच्चे बुनियाद पर खड़ा किया गया था. इसको लेकर सुरक्षा अथवा अन्य मानकों का अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं लिया गया था. कोयला झोंककर स्टीम तैयार किया जाता था और उस स्टीम से भोजन बनता था. 13 मजदूर बॉयलर चलाने, भोजन बनाने और अन्य कार्य मे लगे थे जो दिन-रात यहीं रहते थे. भोजन बन जाने पर अन्य मजदूर और वाहन ड्राइवर आते थे जो स्कूलों में भोजन पहुंचाते थे.

16 नवम्बर की सुबह सभी मजदूर अपने काम मे लग गए. सब्जी, दाल और चावल की व्यवस्था होने लगी. बॉयलर चलाने वाला मजदूर ने कहा कि बायलर चालू हो रहा है, आपलोग अपना काम शुरू कर दो. तकरीबन 4.50 में महाविस्फोट हुआ. पूरा इलाका थर्रा गया. बायलर का हजारों किलो का ऊपरी हिस्सा उड़कर रोड के उस पार 100 मीटर की दूरी पर गिरा. आफिस का दीवार ध्वस्त हो गया, यहां तक कि बगल के मकान का दीवार भी. लाश का चिथड़ा चिथड़ा उड़कर रोड और धान के खेत में चला गया. चीख-पुकार सुनकर अगल-बगल के लोग दौड़े और लोगों ने ईंट के तले दबे घायल कराहते लोगों को निकाला और उन्हें अस्पताल भिजवाया. तीन मजदूरों की मौत तो घटनास्थल पर ही हो गयी और एक अस्पताल जाने के क्रम में दम तोड़ दिया. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि 6 से ज्यादा मजदूर मरे हैं. 13 मजदूर जो उस रात वहां थे, की पूरी रिपोर्ट आने पर ही पूरी स्थिति साफ होगी.

प्रशासन और एनजीओ की इस मामले में चुप्पी बनी हुई है और इतने बड़े हादसे पर मुख्यमंत्री अथवा बयानवीर उपमुख्यमंत्री का कोई बयान नहीं आया है.

मजदूर स्थानीय नहीं थे, अगल बगल के प्रखंडों के थे, इसलिये भी पूरी स्थिति साफ नहीं हुई है। साला-बहनोई एक साथ इसमें मरा है. ज्यादातर मजदूर 20 से 30 साल के थे. मृतक परिवारों जिनकी पहचान हो चुकी है, को अभीतक कोई मुआवजा नहीं मिला है. मोतिहारी सदर अस्पताल में गुड्डू और नवीन कुमार का इलाज चल रहा है. उन्हें बेड भी नही मिला है। सीरियस हेड इंज्यूरी रहने के बावजूद कल रात तक स्कैन भी नहीं हुआ है. इलाजरत मजदूर नवीन कुमार की मां मालती देवी ने कहा कि अभी तक कोई हाकिम देखने भी नहीं आया है. हमलोग पैंचा उधार लेकर ईलाज करवा रहे हैं. अन्य लापता मजदूरों की खोज खबर लेने वाला कोई नहीं है. सरकार और प्रशासन मामले को दबाने में लगा है।

भाकपा-माले मांग करती है कि इस घटना की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए. प्लांट में कार्यरत मजदूरों की स्थिति, श्रम विभाग के निबंधन, बाॅयलर आदि की शेफ्टी को लेकर राज्य सरकार बिहार की जनता को रिपोर्ट दे और कंेद्रीकृत किचेन-एनजीओ के प्रबंधन पर रोक लगाए तथा स्कूल आधारित मध्यान्ह भोजन व्यवस्था को मजबूत बनाए.

भाकपा-माले और बिहार राज्य विद्यालय रसोइया संघ मृतक परिजनों को 10 लाख रु. मुआवजा, घायलों का समुचित इलाज, घटन के लिए जिम्मेवार भाजपा नेता रामगोपाल खंडेलवाल और नवप्रयास एनजीओ के संचालन नरेन्द्र सिंह को गिरफ्तार करने, उस एनजीओ को अविलंब काली सूची में डालने आदि की मांग करता है.

धीरेन्द्र झा, पोलित ब्यूरो सदस्य, भाकपा-माले
सरोज चौबे, महासचिव, विद्यालय रसोइया संघ
आर एन ठाकुर, महासचिव, ऐक्टू

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