किसान आंदोलन के दबाव में आरसीईपी से बाहर रहने को मजबूर हुई मोदी सरकार – राजाराम सिंह


पटना 5 नवंबर 2019
अखिल भारतीय किसान महासभा के महासचिव, किसान संघर्ष समन्वय समिति के बिहार-झारखंड के प्रभारी तथा पूर्व विधायक राजाराम सिंह ने आज बयान जारी करके कहा है कि यह देश के किसानों के आंदोलन के कारण मोदी सरकार आरसीईपी से बाहर रहने के लिए मजबूर हुई है. कल 4 नवंबर को ही किसान संघर्ष समन्वय समिति के आह्वान पर आरसीईपी में शामिल होने के खिलाफ पूरे देश में किसानों ने जबरदस्त आंदोलन किया था. इसके लिए हम देश भर के किसान समुदाय को बधाई देते हैं, जिसने तानाशाह मोदी को भी पीछे हटने के लिए मजबूर किया है. आने वाले दिनों में भी यह संघर्ष जारी रहेगा.


उन्होंने कहा कि देश भर के 250 किसान संगठनों के सबसे बड़े मोर्चे अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने मोदी सरकार से आरसीईपी, क्षेत्रीय समग्र व्यापार संधि, जो कि 16 देशों के बीच एक बहुपक्षीय मुक्त व्यापार संधि है, में भारत को शामिल किए जाने पर प्रश्न उठाया था. किसान संगठनों ने जगह-जगह मोदी सरकार का पुतला जलाया था. समन्वय समिति ने इस बात पर जोर दिया था कि सरकार की किसान विरोधी कारपोरेटपरस्त नीतियों के कारण भारतीय किसान विश्व बाजार में अपनी फसलें बेच पाने में कम सक्षम हैं. विश्वभर में सरकारें फसलों की लागत में भारी छूट देती है और अपने किसानों को खेती की अच्छी सुविधाएं प्रदान करती हैं, जिसकी वजह से उनकी उपज के दाम बाजार में प्रतियोगी बने रहते हैं. भारत में लागत पर इतना भारी कर लगाया जाता है और किसानों को लाभकारी मूल्य नहीं दिया जाता कि किसान घाटे व कर्ज में रहते हैं. इसलिए किसान संगठन आरंभ से ही इसका विरोध कर रहे थे.

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