नागरिकता संशोधन बिल वापस लो, 6 नवंबर को भाकपा-माले का देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन.

असम के डीटेंशन कैम्प में 27 लोगों की मौत क्यों-मोदी-शाह जवाब दो?
पटना में कारगिल चैक पर होगी प्रतिवाद सभा.

पटना 4 नवंबर 2019

भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा है कि असम के डीटेंशन कैंपों में अब तक 27 लोगों की मौत हो चुकी है. इसके लिए पूरी तरह से मोदी-शाह की जोड़ी जिम्मेवार है. भाजपा ने असम के लगभग 19 लाख लोगों की नागरिकता को खतरे में डाल दिया है. इन लोगों को डीटेंशन कैंपों में डाला जा रहा है जहां लोगों की लगातार मौतें हो रही हैं. हमारी पार्टी ने इसके खिलाफ आगामी 6 नवंबर को देशव्यापी प्रतिवाद मनाने का फैसला किया है. इतना ही नहीं, भाजपा-आरएसएस के लोग पूरे देश में एनआरसी थोपना चाहते हैं. हम भारत भर में एनआरएसी की योजना का पुरजोर विरोध करते हैं और नागरिकता संशोधन बिल को अविलंब वापस लेने की मांग करते हैं.

उन्होंने आगे कहा कि असम के डीटेंशन कैम्पों में एनआरसी की फाइनल सूची से पहले 25 लोगों की, और उसके बाद दुलाल चंद्र पाल और फालू दास की मौतें हुईं. दुलाल पाल और फालू दास के परिवार ने उनके शव लेने से इंकार करते हुए कहा है कि अगर वे बांग्लादेशी थे, तो बांग्लादेश में उनके परिवार को तलाशिये, और शव को बांग्लादेश भेजिए. नहीं, तो मानिये कि वे भारत के नागरिक थे जिनकी हत्या सरकार द्वारा डीटेंशन कैम्प में हुईं.

अमित शाह अब देश भर में एनआरसी लागू करवाने पर आमादा हैं, जिसमें हर किसी को कागजात के जरिए साबित करना होगा कि 1951 में उनके पूर्वज भारत में वोटर थे. अमित शाह हर राज्य में डीटेंशन कैम्प खुलवा रहे हैं- महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल में ऐसे कैम्प बन रहे हैं. गरीब तो बीपीएल की सूची, वोटर लिस्ट, आधार आदि से भी बाहर रह जाते हैं. वे 1951 के अपने पूर्वजों के कागजात कहाँ से लाएंगे? अगर न ला पाएं तो उन्हें डीटेंशन कैम्प में डाल दिया जाएगा. मोदी – शाह कह रहे हैं कि अगर आप मुसलमान हैं तो आपको देश से निकाल दिया जाएगा, पर अगर आप हिन्दू या गैर मुसलमान हैं, तो हम नागरिकता कानून में संशोधन करके आपको शरणार्थी मान लेंगे.

इस तरह आज नागरिकों की नागरिकता पर भाजपा-आरएसएस ने खतरा पैदा कर दिया है. उन्हें या तो डीटेंशन कैम्प में मारा जाएगा, या नागरिक के बजाय शरणार्थी बना दिया जाएगा.

भाकपा-माले भाजपा-आरएसएस की इन कोशिशों को कभी कामयाब नहीं होने देगी. आने वाले दिनों में एनआरसी को वापस करने की मांग हमारे आंदोलनांे की एक प्रमुख मांग होगी. आगामी 6 नवंबर को पटना सहित राज्य के विभिन्न जिला केंद्रों पर विरोध-प्रदर्शन का कार्यक्रम आयोजित किया गया है.

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