जलजमाव व बाढ़ पर भाजपा-जदयू की नुराकुश्ती जिम्मेवारियों से बचने की कवायद : माले

आपदा प्रबंधन में बिहार सरकार की असफलता एक बार फिर जगजाहिर.

पूरे राज्य में डेंगू- चिकुनगुनिया जैसी बीमारियों पर रोक के लिए अस्पतालों में आईसीयू की व्यवस्था करे सरकार.

बाढ़ व जलजमाव पीड़ितों को तत्काल राहत मुआवजा उपलब्ध कराया जाए.

जलजमाव के समय छात्र-नौजवानों व नागरिक समाज की पहलकदमी स्वागतयोग्य.

पटना 10 अक्टूबर 2019

भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा है कि जिस समय राजधानी पटना भीषण जलजमाव से तबाह था और लगभग पूरे राज्य में बाढ़ की स्थिति थी, उस वक्त इसकी जवाबदेही व जिम्मेवारी से बचने के लिए भाजपा व जदयू के लोग आपसी नूराकुश्ती में लगे थे ताकि लोगों का ध्यान भटकाया जा सके. भाजपा के नेता इसका सारा दोष जदयू पर मढ़कर अपने को पाक-साफ दिखलाने की कोशिश कर रहे थे जबकि विगत 15 साल से नगर विकास का विभाग भाजपा के ही पास है और पटना की सभी चारों विधानसभा सीट पर दो दशकों से भाजपा का ही कब्जा है. लोकसभा की दोनों सीट भी भाजपा के ही पास है. पटना नगर निगम पर भी भाजपा ही काबिज है. तब, इस भीषण जलजमाव के लिए भारतीय जनता पार्टी कैसे दोषमुक्त हो गई? भाजपाइयों को शर्म आनी चाहिए. इस विकट परिस्थिति में भी वे दंगा-फसाद खड़ा करने की कोशिश में हैं. आज जहानाबाद में सांप्रदायिक उन्माद फैलाने की कोशिश की गई, जो पूरी तरह निंदनीय है.

उन्होंने आगे कहा कि जब-जब इस प्रकार की त्रासदी सामने आती है बिहार सरकार का आपदा प्रबंधन लकवाग्रस्त हो जाता है. मशरख मीड डे मिल कांड से लेकर इंसेफ्लाइटिस से हुए बच्चों की मौत और अब राजधानी पटना में भीषण जल जमाव की स्थिति ने सरकार के आपदा प्रबंधन की पोल एक बार फिर जगजाहिर कर दी है. बिहार सरकार कह रही है कि उसने संभावित तबाही से लोगों को पहले ही सूचित कर दिया था. लेकिन सवाल यह है कि सरकार का काम सूचना उपलब्ध कराना मात्र है? जब ऐसी स्थिति की जानकारी सरकार को हो गई थी तो फिर उसने किसी भी प्रकार की व्यवस्था पहले से क्यों नहीं की? यह घोर आपराधिक लापरवाही का मामला बनता है.

एक तरफ जब पटना में जलजमाव की भीषण स्थिति थी और सरकार का आपदा प्रबंधन फेल हो चुका था, पटना के छात्र-नौजवानों व आम नागरिकों ने इस जिम्मेदारी को अपने कंधे पर लिया. पटना में आइसा, इनौस, माले सहित अन्य संगठनों ने कई दिनों तक राहत अभियान चलाया और पानी में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने से लेकर उनके बीच जरूरत की आवश्यक चीजों का वितरण किया. पटना के महमूदीचक, लोहानीपुर, पटना सिटी के रानीपुर पैजावा, दीघा के बिंद टोली आदि गरीबों के मुहल्ले में राहत अभियान चलाया गया. पटना के नागरिकों द्वारा उठाया गया यह कदम स्वागत योग्य है. पटना के अलावा भोजपुर, कटिहार, बेगूसराय, पटना ग्रामीण आदि जिलों में भी आइसा-इनौस-भगत सिंह युवा ब्रिगेड व माले कार्यकर्ताओं ने राहत अभियान को संगठित किया.

उन्होंने आगे कहा कि कई जगहों पर जलजमाव अभी भी है. सरकार खुद स्वीकार कर रही है कि डेंगू व चिकुनगुनिया व अन्य बीमारियों का प्रकोप तेजी से बढ़ा है. लेकिन इस मामले में भी सरकार की पहलकदमी बेहद कमजोर है. राजधानी पटना सहित सभी जिला मुख्यालयों पर अस्पतालों में आईसीयू की संख्या तत्काल बढ़ायी जानी चाहिए. अस्पतालों में अलग से डेंगू वार्ड का निर्माण होना चाहिए, खून आदि की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि लोगों का सही समय पर इलाज संभव हो सके और नुकसान को रोका जा सके.

माले राज्य सचिव ने यह भी कहा कि बाढ़ पीड़ितों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी इलाकों के गरीबों के लिए भी मुआवजा का प्रबंध किया जाना चाहिए. बाढ़ में अररिया का पूरा इलाका डूबा रहा. भागलपुर में 16 में से 14 प्रखंड बाढ़ की चपेट में रहे. पूर्णिया, कटिहार, भोजपुर, पटना ग्रामीण के अधिकांश इलाके बाढ़ की चपेट में रहे. अगस्त के महीने में आई बाढ़ का भी मुआवजा अभी बाढ़ पीड़ितों को नहीं मिल सका है. सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही जबकि जान-माल की भारी क्षति हुई है. राहत-मुआवजा की मांग पर 11 अक्टूबर को भोजपुर, 14 अक्टूबर को पटना में जिलाधिकारी के समक्ष प्रदर्शन किया जाएगा. अन्य जिलों में भी विरोध-प्रदर्शन का कार्यक्रम लिया गया है.

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