कश्मीर में पैलेट गन से बिहारी किशोर मो. शाहनवाज की आंखों की रोशनी का चला जाना दुखद : माले

प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा के लिए कानून बनाए सरकार, पलायन पर रोक लगाए.

पटना 2 जून 2019
भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने कश्मीर में पैलेट गन की वजह से बिहारी मजदूर मो. शाहनवाज की आंखों की रोशनी खत्म हो जाने पर गहरा दुख व्यक्त किया है और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई के साथ-साथ उनके उचित इलाज की मांग केंद्र सरकार से की है.
माले राज्य सचिव ने कहा कि शाहनवाज की आर्थिक हालत बेहद खराब है और वे अपना इलाज करवाने में पूरी तरह असमर्थ हैं. इसलिए केंद्र व बिहार सरकार को इसमें तत्काल पहलकदमी लेते हुए उनके इलाज की गारंटी की जानी चाहिए. प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा के सवाल को भाकपा-माले लंबे अरसे से उठाते आई है और इस पर कानून बनाने की मांग करते आई है. यदि उनके लिए सच में कानून बन गया होता तो शाहनवाज जैसे लोगों को उचित समय पर मदद पहंुचायी जा सकती थी और उनकी सुरक्षा की भी गारंटी हो सकती थी.


उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश जी की सरकार पलायन में कमी आने का दावा करती है लेकिन आज भी बिहार के युवा रोजी-रोजगार की तलाश में दर-दर की ठोकरें ख रहे हैं. कहीं अपमानित हो रहे हैं और कहीं पैलेट गन का शिकार हो रहे हैं.


विदित हो कि दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले में पिछले शुक्रवार को सुरक्षा-बलों द्वारा पैलेट गन की फायरिंग से बिहार के एक किशोर मजदूर के दाहिने आंख की रोशनी चली गयी। बिहार के अररिया जिला के पथराहा गांव निवासी बुलकी मियां के 14 वर्षीय पुत्र मो.शाहनवाज सुरक्षा-बलों के पैलेट गन का शिकार तब हुए, जब पिछले शुक्रवार को अंसार गजवातुल हिन्द (ए जी एच) प्रमुख और सुरक्षा-बलों द्वारा मोस्ट वांटेड कमांडर जाकिर मूसा के एक मुठभेड़ में मारे जाने के बाद स्थानीय निवासियों और बलों के बीच संघर्ष फूट पड़ा। पैलेट लगने से किशोर मजदूर के दाहिने आंख की रोशनी चली गयी। इस घटना को याद करते हुए मो.शाहनवाज ने कहा कि वह पुलवामा की एक मस्जिद में शुक्रवार की नमाज अता करने के बाद कुछ खाद्य-सामग्री खरीदने राशन-दुकान गया था। दुकानदार अन्य ग्राहकों को सामान देने में व्यस्त होने के कारण शाहनवाज को थोड़ा इंतजार करने को कहा। उसी समय सुरक्षा-बलों के खिलाफ कुछ युवाओं ने पत्थरबाजी शुरू की और सुरक्षा बलों ने जवाबी कारवाई में फायरिंग शुरू की जिससे तेज धमाके के साथ विस्फोट की आवाज आई और शाहनवाज इतना डर गया कि दुकान से भाग गया। कुछ समय बाद शाहनवाज फिर दुकान पर राशन लाने गया कि अचानक सुरक्षा-बलों ने उस पर पैलेट गन से फायरिंग कर दी। पैलेट गन के छर्रौ से वह जमीन पर गिर आधे घण्टे तक सड़क पर पड़ा रहा और फिर कुछ स्थानीय युवाओं ने उसे कंधे पर उठा पुलवामा जिला हस्पताल में भर्ती कराया। लड़के को आंख, चेहरा और सर पर पैलेट्स लगे थे। शाहनवाज को जिला अस्पताल पुलवामा से एस.एम.एच.एस श्रीनगर रेफर किया गया जहां उन्हें तीन दिन तक भर्ती रखा गया।


उनके बड़े भाई शाहवाज अभी उनकी देख-भाल पुलवामा के बेल्लाव गांव के एक किराये के कमरे में कर रहे हैं जिसमें पर्याप्त रोशनी भी नही है। उनके बड़े भाई ने बताया कि डॉक्टरों के अनुसार शाहनवाज के दाहिने आंख की रोशनी चली गयी है और बाएं आंख की रोशनी भी काफी कमजोर हो गयी है।श् ााहनवाज पिछले 7 मई को घाटी में आया था और पुलवामा में सिर्फ 9 दिन निर्माण मजदूर के रूप में काम कर पाया। इसकी भी मजदूरी उसे अभी तक नहीं मिली और आंखों की रोशनी खोने के बाद वह उस आदमी का पता लगाने में भी असमर्थ है जिसने उसे काम पर रखा था। शाहनवाज के बड़े भाई बताते हैं कि इस घटना ने उनके पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया। वे बताते हैं कि उनके छोटे भाई ने बिहार में बेरोजगारी की हालत से निजात पाने हेतु गांव के कुछ साथियों के साथ काम करने कश्मीर आया था। अपने घायल छोटे भाई को देखने कश्मीर आने के लिए उन्हें अपने पड़ोसी से 15000 रुपया उधार लेना पड़ा। वे बताते हैं कि उनका परिवार बिहार के एक गांव में झोपड़ी में रह गुजर-बसर करता है।उ न्हें तीन छोटी बहनों की जिम्मेदारी के साथ शारीरिक रूप से अक्षम मां और बूढ़े पिता की भी देखभाल करनी पड़ती है।ब ड़े भाई शाहवाज बताते हैं कि पूरा परिवार दोनों भाइयों की कमाई पर निर्भर हैं और आय का कोई दूसरा स्रोत नही है। अगर वे काम न करें तो उनके परिवार के सदस्यों को भूखे सोना होगा। उन्होंने बताया कि शाहनवाज के इलाज के लिये उन्हें अपने सहकर्मी से 11000 रुपए और चाचा से 15000 रुपए उधार लेने पड़े। अभी वे और उनके जख्मी भाई दोनों के पास काम या रोजगार नही है, ऐसे में वे नही जानते कि यह कर्ज कैसे चुका पाएंगे। अभी कुछ दिनों में जख्मी शाहनवाज के आंख और चेहरे की सर्जरी होनी है जिसको लेकर बड़े भाई शाहवाज चिंतित हैं कि आगे इलाज के लिए पैसों का इंतजाम कैसे करेंगे। शाहवाज ने लोगों और राज्य-सरकार से वितीय सहायता की अपील की है ताकि वे पैलेट गन से जख्मी भाई का इलाज करवा सकें।

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