यह है जनता का आदमी – राजकुमार यादव

कोडरमा लोकसभा क्षेत्र से भाकपा-माले के उम्मीदवार हैं।ये राजधनवार के विधायक भी हैं। विधान सभा चुनाव में राजकुमार ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कोडरमा के पूर्व सांसद बाबूलाल मरांडी को हराया है।बाबूलाल जी मुख्यमंत्री जब थे तब भाजपा में थे।उसके बाद उन्होंने भाजपा से अलग होकर जे वी एम(झारखंड विकास मोर्चा) बनाया।जे.वी.एम. से चुनाव लड़कर कोडरमा के सांसद हुए।2014 के लोकसभा चुनाव में वे यह सीट छोड़ चुके थे।यहाँ से भाजपा के रविन्द्र कुमार राय थे चुनाव मैदान में।वे ही यहाँ से विजयी हुए।राजकुमार यादव दो लाख छियासठ हजार वोट पाकर दूसरे नंबर पर रहे।2014 में इतने बड़े समर्थन का विशेष मतलब होता है।तथाकथित मोदी लहर में दो लाख छियासठ हजार वोट ।रविंद्र राय कुछ समय तक जे.वी.एम.में भी थे बाबूलाल जी के साथ।इस तथ्य को झुठलाया नहीं जा सकता।फिलवक्त वे चुनाव में नहीं हैं।उनकी जगह ले ली हैं राजद छोड़ आनन-फानन आईं अन्नपूर्णा देवी।वे ही भाजपा प्रत्याशी हैं।इस तरह तीन प्रत्याशी हुए।एक राजकुमार यादव,दूसरे बाबूलाल मरांडी और तीसरे अन्नपूर्णा देवी।इस तरह यहाँ का चुनाव काफी दिलचस्प हो गया है।दिलचस्प कई अर्थों में है।अन्नपूर्णा देवी ने जिस आनन-फानन में राजद छोड़ भाजपा ज्वाइन किया ,उसको लेकर सामाजिक न्याय की पैरोकार शक्तियां,बुद्धिजीवी,गरीब, अल्पसंख्यक सकते में हैं।पर,वे इस बात से वाकिफ हैं कि यह सत्तापक्ष की राजनीति का चाल-चरित्र और चेहरा है।


बाबूलाल जी जे एम एम,कांग्रेस और जे वी एम की तरफ से हैं।वे भाजपा हराओ के नारे के साथ तो हैं पर उनका असल इरादा कुछ और है।वे भली-भाँति जान रहे हैं कि राजकुमार यादव ही यहां के वास्तविक उम्मीदवार हैं।राजकुमार ही जनसंघर्षों के चैंपियन नेता हैं।जन जन के बीच का।सुख-दुख के साथी।


राजकुमार के तथाकथित विरोधी भी इस बात को स्वीकार करते दिख रहे हैं कि भाई यह आदमी काम कर-करा रहा है।और काम करने वाले नेता को ही चुनना ठीक रहता है।
राजकुमार यादव सहज उपलब्ध जननेता हैं।जुझारू।ये ही कोडरमा के असली लाल हैं।इनकी जीत से इस क्षेत्र के चेहरे की लाली-हरियाली में इजाफा होगा।

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