नीतीश के इस्तीफे की मांग पर 2 मार्च को वाम दलों का जिला मुख्यालयों पर प्रतिवाद.

मोकामा शेल्टर होम मामले में नीतीश सरकार एक बार फिर बेनकाब : माले
शेल्टर गृहों में लड़कियों की हालत दिन-प्रतिदिन हो रही बदतर.

पटना 25 फरवरी 2019
भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा है कि मोकामा शेल्टर होम के नाटकीय घटनाक्रम ने एक बार फिर से भाजपा-जदयू सरकार को बेनकाब किया है. शेल्टर होमों में संगठित यौन उत्पीड़न की घटनाओं ने न केवल बिहार को बल्कि पूरे देश को हिला रख दिया था फिर भी इन शेल्टर होमों की हालत में किसी भी प्रकार का सुधार नहीं हुआ है. उलटे उनकी हालत बद से बदतर होती जा रही है. नीतीश कुमार को कहीं से भी सत्ता में बने रहने का अधिकार नहीं है. यदि उनके मन में महिलाओं के प्रति थोड़ा भी सम्मान है, तो उन्हें अपने पद से तत्काल इस्तीफा देना चाहिए. ऐसे भी पाॅक्सो कोर्ट ने उन पर सीबीआई जांच का आदेश दिया है.


माले राज्य सचिव ने आगे कहा कि अब खुद प्रशासन स्वीकार कर रहा है कि नाजरथ शेल्टर होम से लड़कियां भागी नहीं बल्कि भगाई गई थी. उन 7 लड़कियों में 4 लड़कियां मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले की गवाह भी हैं. पूरा घटनाक्रम कई प्रकार के सवाल खड़ा करता है. इसलिए हम सुप्रीम कोर्ट से आग्रह करते हैं कि इस मामले में संज्ञान ले और इसे भी सीबीआई जांच के दायरे में लाए.


कहा कि नाजरथ शेल्टर होम की लड़कियां भी वहीं आरोप लगा रही हैं जो टिस की रिपोर्ट में अन्य शेल्टर गृहों के मामले में सामने आ चुका है. उन्हें अब भी तरह-तरह से प्रताड़ित किया जा रहा है और उनकी जिंदगी को पूरी तरह कुचल कर रख दिया गया है. यह घोर अमानवीय है.
इस सवाल पर महिला संगठनों, भाकपा-माले व अन्य वाम दलों ने मिलकर संघर्ष किया है, तब कहीं जाकर इस मामले की सीबीआई जांच का आदेश हुआ था. लेकिन अब भी इसके राजनीतिक संरक्षण की जांच का मामला सीबीआई जांच मे शामिल नहीं है. लेकिन अब यह साफ हो चुका है नीतीश कुमार और कई सफेदपोश इस मामले में शामिल हैं. इसलिए इसकी संपूर्णता में जांच के लिए हम आंदोलन चलायेंगे. 2 मार्च को पूरे राज्य में प्रतिरोध होगा.

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