मोकामा शेल्टर होम मामले ने एक बार फिर सरकार की नाकामी को किया उजागर.

मुख्यमंत्री के पद पर बने रहते बालिका गृह कांडों की निष्पक्ष जांच संभव नहीं.
मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग पर पटना में महिला संगठनों का प्रतिवाद मार्च.
सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में संज्ञान लेने की अपील.

पटना 25 फरवरी 2019

मुजफ्फरपुर पाॅक्सो कोर्ट द्वारा बालिका गृह मामले में मुख्यमंत्री नीतीश पर जांच के आदेश और मोकामा के नाजरथ शेल्टर होम में लड़कियों की प्रताड़ना के खिलाफ आज महिला संगठनों ने पटना में प्रतिवाद मार्च निकालकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से तत्काल इस्तीफे की मांग की. बुद्ध स्मृति पार्क से मार्च निकला और डाकबंगला Chauraha पर सभा आयोजित की गई. मार्च का नेतृत्व ऐपवा की बिहार राज्य अध्यक्ष सरोज Chaube, बिहार महिला समाज की निवेदिता, ऐडवा की रामपरी, महिला सांस्कृतिक संगठन की साधना मिश्रा, वीमेंस नेटवर्क की कंचनबाला आदि महिला नेताओं ने किया. इनके अलावा ऐपवा की अनिता सिन्हा, महिला समाज की अनीता मिश्रा सहित दर्जनों महिलाएं मार्च में शामिल थीं.

डाकबंगला पर सभा को संबोधित करते हुए महिला नेताओं ने कहा कि नैतिकता का तकाजा है कि नीतीश कुमार को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए लेकिन वे ढीठ की तरह अभी तक अपने पद पर बने हुए हैं. सीबीआई बालिका गृह कांड के राजनैतिक संरक्षण की जांच से पीछे भागते रही है और इसीलिए सीबीआई एसपी को बीच में ही हटाया गया था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अच्छी पहलकदमी लेते हुए इसे कोर्ट की अवमानना करार देते हुए सीबीआई के हेड को सजा सुनाई.

मुजफ्फरपुर पाॅक्सो कोर्ट ने इस मामले में एक अर्जी की सुनवाई करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी जांच का आदेश दिया है. इसकी संभावना पहले से ही व्यक्त की जा रही थी. जब जांच की आंच सत्ता के शीर्ष तक पहुंच गई है, तब मुख्यमंत्री के अपने पद पर बने रहते निष्पक्ष जांच की उम्मीद कैसे की जा सकती है? यदि मुख्यमंत्री सचमुच महिला सशक्तीकरण के हिमायती हैं, तो उन्हें बालिकाओं के न्याय के पक्ष में अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए.

महिला नेताओं ने मोकामा के नाजरथ बालिका गृह मामले में सरकार की घोर लापरवाही, लड़कियों को भगाने की घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है. कहा कि बालिका गृहों की स्थितियां सुधरने की बजाए लगातार बिगड़ती जा रही हैं. नाजरथ बालिका गृह की लड़कियां एक बार फिर कह रही हैं कि उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जाता है, उन्हें किसी भी प्रकार की आजादी नहीं और उनकी जिंदगी को बद से बदतर बना दी गई है. भाजपा-जदयू के तथाकथित सुशासन राज में यह हो क्या रहा है? सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में तत्काल संज्ञान लेना चाहिए.

महिला नेताओं ने आशंका जाहिर की है कि भगाई गई 7 लड़कियों में 4 मुजफ्फरपुर मामले में गवाह भी हैं, यह गवाहों को नष्ट करने, धमकाने की कोशिश तो नहीं है? कुल मिलाकर स्थिति बहुत ही खराब है और बिहार के मुखिया इसके निशाने पर हैं.
इसलिए हम महिला संगठन मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग करते हैं. यदि ऐसा नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में पूरे बिहार में व्यापक आंदोलन किया जाएगा.

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