शहीद रतन के परिवार से मिला भाकपा-माले टीम, झूठे और खोखले घोषणाओं में व्यस्त है सरकार


20 फरवरी, भागलपुर , पुलवामा में शहीद हुए जवानों में से एक रतन कुमार ठाकुर के शोक – संतप्त परिवार से आज भाकपा-माले की एक टीम ने उनके गांव मदारगंज, रतनपुर (भागलपुर जिला का सन्हौला प्रखंड) में जाकर मुलाकात की और शोक संवेदना जाहिर करते हुए परिवार के इस अवर्णनीय दुख में भागीदार हुए । टीम में शामिल माले नेताओं-कार्यकर्ताओं ने शहीद के परिवार व ग्राम वासियों के साथ मिलकर शहीद रतन कुमार ठाकुर की तस्वीर पर माल्यार्पण व दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी ।

टीम में भाकपा-माले के राज्य कमिटी सदस्य एस. के. शर्मा, नगर प्रभारी व ऐक्टू के राज्य सचिव मुकेश मुक्त, जिला सचिव बिंदेश्वरी मंडल, जिला कमिटी सदस्य व अखिल भारतीय किसान महासभा के जिला उपाध्यक्ष रणधीर यादव, स्थानीय माले नेता विजय यादव, बादल तांती व राजू मंडल शामिल थे ।

टीम ने बताया कि शहीद रतन कुमार ठाकुर अपने पीछे पत्नी – राजनंदनी देवी, पुत्र – कृष्णा कुमार (3 वर्ष), पिता – राम निरंजन ठाकुर, छोटा भाई – मिलन कुमार, छोटी बहन – नीतू कुमारी …कुल 5 सदस्य छोड़ गए है । सभी शहीद रतन कुमार ठाकुर पर ही आश्रित थे । गर्भवती पत्नी गहरे सदमे में है, पुरे परिवार का हाल बुरा है । इस गहरे आघात में पूरा गांव शहीद परिवार के साथ खड़ा है । पूरे देश में जहां एक तरफ जवानों के शहादत के बहाने माहौल बिगाड़ने के लिए साम्प्रदायिक – फासीवादी ताकतें सक्रिय है वहीं शहीद के गांव में गहरी साम्प्रदायिक सद्भावना दिखी । गांव पहुंचते ही टीम की अगुवानी अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने किया । ग्रामीण युवा मो. मंजूर ने आगे बढ़कर टीम का स्वागत किया और शहीद के घर ले जाकर बैठने की व्यवस्था की ।

टीम ने बताया कि सरकार सिर्फ झूठी और खोखले में घोषणाओं में व्यस्त है । शहादत के 6 दिन बीत जाने के बाद भी अब तक सरकार की ओर से शहीद परिवार को कुछ नहीं मिला, कोई सहायता नही मिली है । शहीद के पिता ने बताया कि दाह संस्कार के बाद कोई भी प्रशासनिक पदाधिकारी सुध लेने नही आया । फोन करने पर स्थानीय डॉक्टर पुष्पलता देवी बहु को देखने अवश्य आ जाते है । CRPF के दो जवान घर पर मजूद है । शहीद के पिता एवं ग्रामीण दिवाकर सिंह ने सवाल करते हुए कहा कि आतंकी पाकिस्तान से तो आए नहीं थे ? …सुरक्षा व्यवस्था में चूक हुई । सुरक्षा व्यवस्था ठीक रहता तो शहादत नही होती ! आतंकी हमले का शिकार हमेशा गरीब का बेटा ही क्यों होता है …बड़े और पैसे वाले घरों से तो सेना में लोग जाते नही ! आखिर कब तक गरीब के बेटों की कुर्बानी दी जाती रहेगी ?

कमलाकांत ठाकुर (शहीद के ससुर) ने कहा कि अभी हमारे बेटों की शहादत के बहाने हंगामा किया जा रहा है …पूरी जिंदगी तो इस आघात को अकेले ही झेलना है । सत्ता के खेल में हमारे बेटों की कुर्बानी इस देश की नियति बन गई है । मौत का व्यापार बंद होना चाहिए । नफरत फैलाकर आतंकवाद को बढ़ाने के बजाय इसे खत्म करने के बारे में सोचा जाना चाहिए ।

टीम ने अर्पण ठाकुर, राहुल कुमार, किशन ठाकुर, सोएब आलम, सुशील कुमार, बिहारी सिंह, राघवेंद्र ठाकुर आदि दर्जनों ग्रामीणों से भी मुलाकात की । ग्रामीणों ने बताया कि बरसात में गांव की टूटी, जर्जर सड़के घुटने भर पानी में डूबा रहता है । चलना मुश्किल हो जाता है । पानी निकासी का कोई साधन नही है और पेय जल की घोर कमी है, इसका इंतजाम करने के लिए प्रशासन ने कोई प्रयास भी नही किया कभी । नीतीश की सात निश्चय योजना शहीद के गांव में पूरी तरह फैल है ।

भाकपा-माले ने मांग की कि –

● सरकार ने जो सहायता राशि घोषित की वह अविलम्ब शहीद परिवार को उपलब्ध कराया जाय ।
● शहीद के पत्नी औऱ भाई को सरकारी नौकरी दिया जाय
● शहीद के गांव को आदर्श ग्राम बनाया जाय ।

इस गहरे आघात की घड़ी में भाकपा-माले शहीद परिवार के साथ खड़ा है और हर प्रकार के दुख में बराबर का भागीदार है ।

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