बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी और बाबा साहब अंबेडकर के स्मृति दिवस पर देश भर में ‘संविधान बचाओ-धर्मनिरपेक्षता बचाओ’ मार्च

बाबरी मस्जिद की शहादत और बाबा साहब अंबेडकर के स्मृति दिवस के मौके पर वामपंथी दलों के संयुक्त आह्नान पर 6 दिसम्बर 2018 को देशभर में ‘संविधान बचाओ-धर्मनिरपेक्षता बचाओ’ मार्च निकाले गये, जिसमें भाकपा(माले) एवं अन्य वामपंथी पार्टियों समेत विभिन्न लोकतांत्रिक-प्रगतिशील पार्टियों व संगठनों के अलावा नागरिक समाज ने भी हिस्सा लिया। इस दिन देश भर में कई कार्यक्रम हुए। दिल्ली में वामपंथी दलों के संयुक्त आह्नान पर मंडी हाउस से संसद मार्ग तक ‘संविधान बचाओ-धर्मनिरपेक्षता बचाओ’ मार्च निकाला गया, जिसमें सीपीआई, सीपीएम, भाकपा(माले), आरएसपी, फॉरवर्ड ब्लॉक के साथ-साथ नागरिक समाज ने भी हिस्सा लिया। दिल्ली में सुबह 11 बजे बड़ी संख्या में लोग मंडी हाउस पर इकठ्ठा हुए और करीब 12 बजे वहां से जंतर-मंतर, संसद मार्ग की तरफ कूच किया। संसद मार्ग पर पहुंचकर यह मार्च सभा में बदल गया जिसे विभिन्न पार्टियों एवं संगठनों के नेताओं ने संबोधित किया।

संसद मार्ग पर हुई सभा को सम्बोधित करते हुए सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी, पूर्व महासचिव प्रकाश करात, पोलित ब्यूरो सदस्य वृंदा करात, सीपीआई नेता डी राजा, भाकपा(माले) के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य आदि नेताओं ने आज के हालात का जिक्र करते हुए देशवासियों को फासीवादी ताकतों से सावधान रहने का आह्नान किया। सभी नेताओं ने कहा कि आज ये फासीवादी ताकतें देश के संविधान को मिटाना चाहती हैं, जिससे पूरे लोकतंत्र को ही खतरा हो गया है। मोदी सरकार हर मोर्चे पर विफल हो गई है, और अब हार से बचने के लिए एक बार फिर देश को सांप्रदायिकता की आग में झोंकने की साजिश की जा रही है।

सीताराम येचुरी ने बुलंदशहर का जिक्र करते हुए कहा कि बुलंदशहर इसी साजिश का एक उदाहरण है जहां गौहत्या के बहाने एक बड़ा दंगा कराने की कोशिश की गई और एक पुलिस इंस्पेक्टर की हत्या कर दी गई। उन्होंने कहा कि जब ये अपने पुलिस इंस्पेक्टर को नहीं बचा सके तो ये देश को क्या संभालेंगे। उन्होंने कहा कि आज वक्त देश-संविधान और धर्मनिरपेक्षता को बचाने का संकल्प लेने का है। वृंदा करात ने कहा कि आज संविधान को बचाने की जरूरत है। ये सांप्रदायिक ताकतें आज सामाजिक सौहार्द्र और भाईचारे को खत्म करने की कोशिश कर रही हैं। इनके जब जुमले खत्म हो जाते हैं तो इसी तरह धर्म की राजनीति शुरू कर देते हैं।

भाकपा-माले नेता दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि आज पूरे देश में गुंडा राज कायम किया जा रहा है। कहीं भी किसी की भी हत्या कर दी जा रही है। ये केवल दलितों या मुसलमानों का मामला नहीं है बल्कि ये पूरे लोकतंत्र पर हमला है

दिल्ली के अलावा भी कई अन्य राज्यों में इस तरह के मार्च निकाले गए। बिहार की राजधानी पटना में भी वाम दलों के संयुक्त आह्नान पर ‘संविधान बचाओ-धर्मनिरपेक्षता बचाओ’ मार्च का आयोजन किया गया। इसमें पटना शहर के बुद्धिजीवियों ने भी भागीदारी की। कार्यक्रम की शुरूआत हाईकोर्ट परिसर स्थित डा. अंबेडकर की मूर्ति पर माल्यार्पण के साथ हुई। इसके बाद बड़ी तादाद में लोगों ने बांह पर काली पट्टी बांधकर गांधी मैदान तक मार्च किया। गांधी मैदान में गांधी मूर्ति के समक्ष एक संकल्प सभा आयोजित की गई। सभा में फासीवादी ताकतों को परास्त करने तथा देश-संविधान और धर्मनिरपेक्षता के लिए संघर्ष को तेज करने का संकल्प लिया गया।

संकल्प सभा को सीपीआई के राज्य सचिव सत्यनारायण सिंह, भाकपा-माले के पोलित ब्यूरो सदस्य राजाराम सिंह, सीपीआईएम की केंद्रीय कमेटी के सदस्य अरुण मिश्रा, फारवर्ड ब्लॉक के अमेरिका महतो, आरएसपी के वीरेन्द्र ठाकुर, ऐपवा की बिहार राज्य सचिव शशि यादव, ऐडवा की रामपरी देवी तथा बिहार महिला समाज की निवेदिता झा ने संबोधित किया। संकल्प सभा का संचालन भाकपा(माले) के पोलित ब्यूरो सदस्य धीरेन्द्र झा, सीपीआई के रामनरेश पांडेय तथा सीपीआईएम के गणेश शंकर सिंह ने संयुक्त रूप से किया।

इस अवसर पर सीपीआईएम के राज्य सचिव अवधेश कुमार, माले के वरिष्ठ नेता केडी यादव, राजाराम, शिवसागर शर्मा व केन्द्रीय कमेटी सदस्य अभ्युदय, प्रसिद्ध समाजशास्त्री एम एन कर्ण, पटना विश्वविद्यालय इतिहास विभाग की पूर्व अध्यक्ष भारती एस कुमार, प्रो. संतोष कुमार, साक्षरता आंदोलन की उर्मिला, इसकस के अशोक कुमार, सीपीआई के रवीन्द्र नाथ राय व विश्वजीत कुमार, अनीश अंकुर, इपटा के बिहार महासचिव तनवीर अख्तर, कोरस की समता राय, शिक्षा आंदोलन के मो. गालिब, बिहार महिला समाज की सुशीला सहाय सहित कई लोग शामिल थे।

वाम नेताओं ने संकल्प सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जिन ताकतों ने बाबरी मस्जिद को गिराया था आज वे पूरे देश को लिंचिस्तान बना देना चाहते हैं। भाजपा-संघ परिवार न केवल देश में नफरत का माहौल पैदा कर रहा है बल्कि आजादी के आंदोलन के गर्भ से निकले संविधान की भी खुलेआम धज्जियां उड़ा रहा है। आज पूरे देश में इन ताकतों के सांप्रदायिक मंसूबे को नाकाम करने के लिए हम सब संघर्ष तेज करने का संकल्प लेते हैं।

सांप्रदायिक दंगे, घृणा, अपराध, फर्जी एनकाउंटर, दलितों पर अत्याचार, महिलाओं पर हमले भाजपा सरकार की चारित्रिक विशिष्टताएं बन चुके हैं। सांप्रदायिक ध्रुवीकरण कराने के लिए आज यूपी में एक बार फिर से नफरत का माहौल खड़ा किया जा रहा है. अब मॉब लिंचिंग में आम लोगों की बिसात क्या, पुलिस अधिकारियों की भी हत्या कर दी जा रही है।

उन्होंने कहा कि 2019 का चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है भाजपा व संघ हत्यारी भीड़ के माध्यम से मंदिर और गाय के नाम पर मुस्लिम विरोधी घृणा और उन्माद भड़काने के जहरीले अभियान द्वारा मूल सवालों से जनता का ध्यान भटकाने और उनकी एकता को तोड़ने की कोशिश में है। ऐसे सांप्रदायिक मंसूबे तो फेल होंगे ही, अगले चुनावों में भाजपा को सत्ता से भी बाहर होना है। राममंदिर बनाने हेतु सर्वाेच्च न्यायालय को नजरअंदाज कर केंद्र सरकार से कानूनी अध्यादेश लाने की मांग कर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करवाने की कोशिश हो रही है। संघ ब्रिगेड को आस्था के नाम पर संविधान और धर्मनिरपेक्षता की धज्जी उड़ाने की कभी इजाजत नहीं दी जाएगी।

पटना के अलावा भी बिहार के तमाम जिला मुख्यालयों पर इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए गए। नालंदा के बिहारशरीफ में वामपंथी दलों के संयुक्त आह्नान पर फ्संविधान बचाओ-लोकतंत्र बचाओ-धर्मनिरपेक्षता मार्चय् दोपहर 12 बजे देवीसराय चौराहा पर बाबा साहेब अम्बेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद शुरू हुआ- शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए गांधी पार्क पंहुच सभा भी की गई। मार्च का नेतृत्व माले जि़ला सचिव सुरेंद्र राम, मकसूदन शर्मा, पाल बिहारी लाल, रामधारी दास, मनमोहन और अन्य माले व वामपंथी नेताओं के साथ इंसाफ मंच के सरफराज खान ने किया। गया में वाम दलों भाकपा-माले, भाकपा, माकपा के सैकड़ों नेताओं-कार्यकर्ताओं ने गांधी मैदान से चौक टावर तक प्रतिवाद मार्च निकाला। जुलूस का नेतृत्व माले के जिला सचिव निरंजन कुमार, ऐपवा जिला सचिव रीता वर्णवाल, सुदामा राम, परशुराम राय, भाकपा के जिला मंत्री सीताराम शर्मा, राज्य सचिव मंडल के अखिलेश कुमार, मसूद मंजर, कुमार जितेन्द्र, माकपा के मो- शमीम ने किया।

पूर्वी चंपारण के मोतिहारी में भाकपा माले, भाकपा एवं माकपा के संयुक्त तत्वावधान में स्टेशन परिसर से मीना बाजार गांधी चौक तक एक बड़ा जुझारू मार्च निकाला गया और ग़ांधी चौक पर रोड जामकर सभा की गई जिसे वामपंथी दलों के नेताओं ने संबोधित करते हुए कहा कि जिन ताकतों ने देश की आजादी की लड़ाई के समय गद्दारी की थी आज वही लोग संविधान को ठेंगा दिखा रही हैं और देश की एकता को तोड़ने के लिए हिन्दू राष्ट्रवाद के नाम पर उन्माद, दंगा-फसाद की हिंसक राजनीति कर रही हैं। ऐसी ताकतों से देश को बचाने की चुनौती वामपंथ को अपने कंधों पर लेनी होगी और फासीवादी ताकतों को करारी शिकस्त देना होगा। मार्च का नेतृत्व भाकपा-माले जिला सचिव प्रभुदेव यादव, विष्णुदेव यादव, भैरव दयाल सिंह, राघव साह, किसान नेता लालन यादव आदि ने किया.

कटिहार जिले के बारसोई में बाबरी मस्जिद की शहादत और बाबा साहेब अम्बेडकर स्मृति दिवस पर माले ने संविधान बचाओ मार्च निकाला जिसमें भाकपा(माले) के बलरामपुर विधायक, माले विधायक दल के नेता और केन्द्रीय कमेटी सदस्य का. महबूब आलम ने भी हिस्सा लिया। भागलपुर में भाकपा-माले, भाकपा व माकपा ने संयुक्त रूप से “संविधान बचाओ-धर्मनिरपेक्षता बचाओ मार्च” निकाला जो स्थानीय घंटाघर चौक से शुरू होकर स्टेशन चौक पर पहुंचा जहां डा. भीम राव अम्बेदकर को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। मार्च का नेतृत्व भाकपा-माले के राज्य कमिटी सदस्य एस के शर्मा, नगर प्रभारी मुकेश मुक्त, भाकपा के जिला सचिव डा. सुधीर शर्मा, देव कुमार यादव, माकपा के जिला सचिव दशरथ प्रसाद व मनोहर मंडल ने किया। नेताओं ने कहा कि रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य की गारंटी करने में नाकामयाब मोदी सरकार देश में साम्प्रदायिक-उन्माद पैदा करके संविधान व धर्मनिरपेक्षता को क्षति पहुंचा रही है और माहौल को विषैला बना रही है- वामदल संविधान, लोकतंत्र व धर्मनिरपेक्षता की रक्षा और शांतिपूर्ण माहौल, सद्भावना व न्याय के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं और उनको फासीवादी ताकतों को हराने के लिये कमर कस लेना होगा.

जहानाबाद में अम्बेडकर चौक से अरवल मोड़ तक “संविधान बचाओ-धर्मनिरपेक्षता बचाओ मार्च” निकाला गया. इसके अलावा दरभंगा, नवादा, पश्चिम चम्पारण, गया, जमुई आदि जिलों में मार्च निकाले गये. भोजपुर में इस दिन आइसा, इनौस और भगत सिंह युवा ब्रिगेड ने शिक्षा अधिकार आंदोलन के तहत सड़क पर स्कूल आयोजित किया.

उत्तर प्रदेश में भाकपा(माले) ने बाबरी मस्जिद विध्वंस की 26वीं बरसी और बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर की स्मृति में 6 दिसंबर को ‘संविधान व धर्मनिरपेक्षता’ दिवस मनाया. कई जिलों में अन्य वाम दलों के साथ संयुक्त कार्यक्रम हुए. इसके साथ ही बुलंदशहर में कथित गोकशी की आड़ में बजरंग दल समेत संघी संगठनों द्वारा प्रायोजित हिंसा व पुलिस इंस्पेक्टर सुजीत कुमार की हत्या की घटना में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार के रुख का कड़ा विरोध किया गया.

राजधानी लखनऊ में भाकपा(माले), माकपा, फारवर्ड ब्लॉक ने परिवर्तन चौक से अम्बेडकर प्रतिमा, हजरतगंज तक संयुक्त मार्च निकाला. मार्च में नारे लग रहे थे, ‘बाबरी मस्जिद विध्वंस के दोषियों को सजा दो’, ‘बुलंदशहर घटना की न्यायिक जाँच कराओ’, ‘इंस्पेक्टर सुजीत के हत्यारों को गिरफ्तार करो’, ‘बुलंदशहर घटना की जिम्मेदार योगी सरकार इस्तीफा दो’. मार्च का नेतृत्व माले के रमेश सेंगर, माकपा के प्रवीण पांडेय व फारवर्ड ब्लाक के यूएन सिंह ने किया.

बनारस में शास्त्री घाट से कचहरी तक भाकपा, माकपा और भाकपा(माले) का संयुक्त मार्च निकाला गया, जिसका नेतृत्व तीनों दलों के नेताओं क्रमशः विजय कुमार, नन्दलाल पटेल और मनीष शर्मा ने किया. कानपुर व गोरखपुर में धरना हुआ, जबकि फैजाबाद, इलाहाबाद और मुरादाबाद में वाम दलों द्वारा संयुक्त गोष्ठी का आयोजन किया गया. मथुरा में भी माले की ओर से गोष्ठी की गई.

भाकपा (माले) के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने सोनभद्र के राबर्ट्सगंज में पार्टी के मार्च का नेतृत्व किया. गाजीपुर में केन्द्रीय समिति सदस्य ईश्वरी प्रसाद कुशवाहा और जिला सचिव रामप्यारे राम के नेतृत्व में मार्च के बाद सरयू पांडेय पार्क में धरना दिया गया. सीतापुर में भी मार्च निकाला गया जो कचहरी पहुंचकर धरने में बदल गया. देवरिया, भदोही, मऊ में जिला मुख्यालय पर धरने दिए गए. जालौन के उरई, चंदौली के मुगलसराय, पीलीभीत के पूरनपुर के अलावा लखीमपुर खीरी में भी मार्च निकाले गये.

इस मौके पर जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजे ज्ञापन में बाबरी मस्जिद विध्वंस के दोषियों को सजा दिलाने के अलावा बुलंदशहर की घटना की न्यायिक जांच कराकर दोषयों को कड़ी सजा देने की मांग की गई.

इसमें कहा गया कि भाजपा, संघ और मोदी-योगी सरकार द्वारा मंदिर निर्माण को लेकर उन्माद पैदा करने तथा संविधान-सुप्रीम कोर्ट को नकारने की कार्रवाई ने देश, समाज, लोकतंत्र और संविधान के लिए बड़ा खतरा उपस्थित कर दिया है। बुलंदशहर की घटना ने दिखाया कि बजरंग दल, विहिप आदि संघी संगठन भय व नफरत की राजनीति के लिए कानून को अपने हाथ में लेने से लेकर हत्या करने की हद तक जा सकते हैं। मुख्यमंत्री योगी के प्रशासन का पूरा जोर उस फर्जी एफआईआर पर है, जिसे पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की हत्या के मुख्य अभियुक्त व बजरंग दल के संयोजक ने लिखाया है, जिसमें अल्पसंख्यक समुदाय के दो नाबालिग बच्चों को भी अभियुक्त बना दिया गया है. जबकि इंस्पेक्टर के हत्यारों को पकड़ना मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में नहीं है. इससे स्पष्ट है कि योगी सरकार असली गुनहगारों को बचाना चाहती है.

अयोध्या में ‘संविधान, धर्मनिरपेक्षता, शान्ति एवं सौहार्द के समक्ष चुनौतियां’ विषय पर सेमिनार प्रेस क्लब फैजाबाद में आयोजित किया गया। सेमिनार की अध्यक्षता साकेत महाविद्यालय के प्राध्यापक डा. अनिल कुमार सिंह, भाकपा जिला सचिव का. राम तीर्थ पाठक एवं भाकपा (माले) नेता का. राम भरोस के तीन सदस्यीय अध्यक्ष मंडल ने की तथा संचालन भाकपा नेता का. अशोक कुमार तिवारी ने किया। विषय प्रवर्तन भाकपा(माले) के जिला प्रभारी का. अतीक अहमद ने किया। सेमिनार में अपनी बात रखते हुए वरिष्ठ पत्रकार सुमन गुप्ता ने कहा कि आज ऐसी शक्तियां देश की सत्ता पर काबिज है जो डा. अम्बेडकर द्वारा बनाए गए संविधान को नष्ट करके मनुवादी व्यवस्था क़ायम करना चाहती हैं. उन्होंने कहा कि 1992 में सिर्फ एक धार्मिक स्थल को ही नहीं तोड़ा गया बल्कि देश के संविधान की आत्मा को भी चोट पहुंचाई गई। डा. अनिल कुमार सिंह ने कहा कि साम्प्रदायिकता की राजनीति को परास्त करने के लिए देश में मौजूद वर्ण व्यवस्था और जातिवाद के खिलाफ संघर्ष करना पड़ेगा। माकपा जिला सचिव का. माता बदल ने कहा कि आज संविधान को बचाने का मतलब देश को बचाना है. भाकपा नेता सूर्यकान्त पाण्डेय ने कहा कि बाबा साहेब ने देश के संविधान का मसौदा पेश करते हुए आशंका व्यक्त की थी यदि संविधान में दिए गए अधिकारों को वंचित समुदायों तक नहीं पहुंचाया गया तो संविधान की महत्ता अपने आप खत्म हो जाएगी। जनौस प्रदेश उपाध्यक्ष सत्यभान सिंह जनवादी ने कहा कि संविधान द्वारा प्राप्त अधिकारों, जिसमें शिक्षा, रोजगार, सामाजिक न्याय शामिल हैं, को सरकार एक-एक करके खत्म कर रही है और साम्प्रदायिक एजेंडे को आगे बढ़ा रही हैं। भाकपा(माले) नेता अफाक उल्लाह ने कहा कि वर्तमान साम्प्रदायिक राजनीति से एक ही धर्म नहीं बल्कि सभी धर्मों के लोग पीडि़त हैं. इसका मुकाबला हम सभी को मिलजुल कर करना होगा। इस अवसर पर जिले के तमाम प्रगतिशील बुद्धिजीवी एवं युवा उपस्थित रहे।
इलाहाबाद के इफ्को फूलपुर कारखाने के पास बाबरी मस्जिद विध्वंस की पूर्वसंध्या पर 5 दिसम्बर 2018 को भाकपा(माले) के नेतृत्व में सैकड़ों मजदूर कर्मचारियों ने बाबा साहब डा भीमराव अम्बेडकर को याद करते हुए कार्यक्रम किया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि संघ से जुड़े तमाम कट्टरपंथी हिन्दूवादी संगठनों ने योजनाबद्ध तरीके से विवादित बाबरी मस्जिद का विध्वंस 6 दिसंबर को इसलिए जानबूझकर किया, जिससे दुनिया भर को यह संदेश दिया जाए कि भारत मे कोई संविधान काम नहीं कर सकता है, यहां सिर्फ और सिर्फ मनुवाद चलेगा. वक्ताओं ने कहा कि नए भारत के निर्माण के लिए डा. अंबेडकर व भगत सिंह के विचारों के साथ बढ़ना होगा. कार्यक्रम में इंस्पेक्टर सुबोध सिंह हत्यारे तथाकथित गौभक्तों को तत्काल गिरफ्तार करने की मांग भी की गई. सभा में डा. कमल उसरी, देवानंद, त्रिलोकी, जयप्रकाश, नान्हू दास, त्रिभुवननाथ, राजनाथ, रामसिंह आदि लोग उपस्थित रहे।

झारखंड में 6 दिसंबर 2018 को वामदलों – सीपीआई(एम), सीपीआई, भाकपा(माले) और मार्क्सवादी समन्वय समिति – ने ‘संविधान और धर्मनिरपेक्षता बचाओ दिवस’ के रूप में मनाया. वक्ताओं ने कहा कि आज सांप्रदायिक और उन्माद की काली ताकतें राम मंदिर और आस्था के नाम पर देश के संविधान को कमजोर करने की साजिश कर रही हैं- आरएसएस पोषित संगठनों द्वारा अभियान चलाकर केंद्र सरकार से मांग की जा रही है कि सुप्रीम कोर्ट को दरकिनार कर विवादित जगह पर राम मंदिर के निर्माण के लिए कानून/अध्यादेश लाया जाए. केसरिया पलटन का यह प्रचार अभियान उसके सांप्रदायिक एजेंडे का ही हिस्सा है जिसमें भारतीय संविधान में उल्लिखित धर्मनिरपेक्षता की अवधारणा को ही निष्प्रभावी बनाना शामिल है. वामदल इस राष्ट्रविरोधी अभियान की कड़ी भर्त्सना करते हुए अयोध्या के मुद्दे पर आने वाले न्यायिक फैसला लिये जाने का समर्थन करते है. संघ परिवार को इस बात की इजाजत नहीं दी जा सकती है कि आस्था के नाम पर संवैधानिक प्रावधानों को कमजोर किया जाए.

राजधानी रांची में वामदलों ने अल्बर्ट एक्का चौक से संयुक्त मार्च निकाला जो शहीद चौक होते हुए राजभवन पहुंच कर सभा में तब्दील हो गया. मार्च का नेतृत्व सीपीआई के भुवनेश्वर प्रसाद मेहता, सीपीआई(एम) के गोपीकांत बक्शी, भाकपा(माले) के जनार्दन प्रसाद और मासस के मिथिलेश सिंह कर रहे थे. राजभवन के समक्ष हुई सभा की अध्यक्षता माकपा के राज्य सचिव गोपीकांत बक्शी ने की. सभा को भाकपा(माले) के शुभेंदु सेन, भाकपा के भुवनेश्वर प्रसाद मेहता, माकपा के राजेंद्र सिंह मुंडा एवं अन्य नेताओं ने संबोधित किया. मौके पर प्रकाश विप्लव, सुदामा खलखो, अजय सिंह, रामचंद्र ठाकुर, सुरजीत सिन्हा, अजबलाल सिंह, सिनगी खलखो, शांति सेन समेत वाम दलों के सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल थे.

भाकपा(माले) की रामगढ़ जिला कमेटी ने रामगढ़ शहर में 6 दिसंबर 2018 को बाबरी मस्जिद विध्वंस के खिलाफ ‘संविधान बचाओ-लोकतंत्र बचाओ’ प्रतिवाद मार्च निकाला जो भाकपा-माले पार्टी कार्यालय से नया बस स्टैंड तक गया। मार्च में जिला सचिव का. भुनेश्वर बेदिया, देवकी नंदन बेदिया, नीता बेदिया, हीरा गोप, नरेश बडाईक, जयनंदन गोप, जयबीर हांसदा, देवानंद गोप, लालचंद ठाकुर के नेतृत्व में सैकड़ों लोग शामिल थे। सुभाष चौक पर सभा की गई जिसमें नेताओं ने कहा कि आज भाजपा की सरकार से देश में खतरा है, राष्ट्र की एकता एवं अखंडता को तोड़ा जा रहा है। सरकार साम्प्रदायिक सौहार्द के वातावरण को भंग कर नफरत की भावना फैलाने में लगी है।

गिरिडीह जिले के बगोदर सहित विभिन्न प्रखंडों में भाकपा(माले) ने विभिन्न कार्यक्रम किये. जमुआ में बाबासाहेब अंबेडकर की बरसी पर लोकतंत्र व संविधान पर हमले के खिलाफ काला दिवस मनाया गया. भाकपा(माले) ने जमुआ चौक को अंबेडकर चौक घोषित करके वहां बाबासाहेब अंबेडकर की कटआउट तस्वीर लगाई थी जिसे भाजपाई गुंडों व सामंती शक्तियों ने 5 दिसम्बर को रात में चुपके से हटा दिया. इसकी कड़ी निंदा करते हुए प्रतिवाद मार्च निकाला गया और चौक पर अम्बेडकर की तस्वीर टांगते हुए चेतावनी दी गई कि ऐसी फासिस्ट हरकत के खिलाफ जबर्दस्त आंदोलन होगा. मार्च में का. अशोक पासवान, जमुआ प्रखंड सचिव विजय पांडे, किसान महासभा नेता रीतलाल, इंनौस प्रखंड अध्यक्ष मोहम्मद असगर अली आदि दर्जनों लोग शामिल थे। बगोदर में भाकपा माले ने प्रतिवाद मार्च निकाला और बस स्टैंड स्थित मोटर कामगार यूनियन के अहाते में नुक्कड़ सभा की। इस अवसर पर भीमराव अंबेडकर की स्मृति में पुष्पांजलि देकर संविधान को बचाने की लड़ाई को और तेज करने का संकल्प लिया गया। राजधनवार के लालबाजार में ‘संविधान बचाओ-धर्मनिरपेक्षता बचाओ’ दिवस मनाते हुए मोदी-रघुवर सरकार की दमनकारी तथा जन विरोधी नीतियों पर जोरदार हमला किया गया तथा ‘भाजपा हटाओ-देश बचाओ’ नारे के साथ 2019 में इसे उखाड़ फेंकने का निर्णय लिया गया। कार्यक्रम में राजधनवार और बगोदर विधानसभा क्षेत्रें से हजारों की तादाद में लोगों ने शिरकत की।

कोडरमा के जयनगर बाबरी मस्जिद विध्वंस के खिलाफ काला दिवस मनाया गया. धनबाद में वाममोर्चा के नेतृत्व में ‘धिक्कार मार्च’ निकाला गया, जो जिला परिषद मैदान से रंधीर वर्मा चौक होते हुए डा. भीमराव अम्बेडकर चौक पहुंचा जहां डा. अम्बेडकर की मूर्ति पर माल्यार्पण करके सभा की गई। वाम पार्टियों में भाकपा(माले), माकपा, भाकपा, फारवर्ड ब्लॉक व मासस के नेताओं व कार्यकर्ताओं एवं लोकतंत्र पसंद नागरिकों की भागीदारी हुई।

हरियाणा के जींद में भाकपा(माले) ने बाबासाहब अम्बेडकर की स्मृति में तथा साम्प्रदायिक नफरत और हिंसा के खिलाफ एक धरना संगठित किया. इस अवसर पर हरियाणा के पार्टी प्रभारी कामरेड प्रेम सिंह गहलावत ने कहा कि भाजपा नेता एलके आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, विनय कटियार, साध्वी ऋतम्भरा, विष्णु हरि डालमिया, राम विलास वेदांती, महंत नृत्यगोपाल दास, चम्पक राय बंसल, बैकुंठ लाल प्रेम एवं अन्य लोग बाबरी मस्जिद विध्वंस के अपराध में आरोपी हैं. उन्होंने साम्प्रदायिक नफरत और फूटपरस्ती की आग को हवा दी है. 26 साल बीत जाने के बावजूद अभी तक इसका न्याय नहीं किया गया है. ये सारे के सारे अपराधी छुट्टा घूम रहे हैं. पार्टी की जींद जिला इकाई के सचिव का. विनोद कुमार ने कहा कि हरियाणा में गाैरक्षा के नाम पर साम्प्रदायिक नफरत फैलाई जा रही है. पशुपालक पहलू खान की हत्या दिखलाती है कि मनोहर लाल खट्टर की सरकार साम्प्रदायिकता को बढ़ावा दे रही है. वे आम आदमियों की समस्याओं का समाधान ही नहीं करना चाहते.

पश्चिम बंगाल के कोलकाता में विशाल मार्च आयोजित किया जिसमें हजारों लोग शामिल हुए. मार्च का नेतृत्व सभी वामपंथी पार्टियों के जाने-माने नेतागण कर रहे थे. पश्चिम बंगाल के अन्य जिलों एवं शहरों में भी भारत के संविधान की रक्षा में साम्प्रदायिक फासीवाद विरोधी मार्च संगठित किये गये जिनमें आम लोगों ने बड़ी तादाद में हिस्सा लिया.

पुदुच्चेरी में इस दिन “संविधान और धर्मनिरपेक्षता रक्षा दिवस” मार्च निकाला गया जिसे तमाम वामपंथी पार्टियों ने संयुक्त रूप से संगठित किया था. भाकपा(माले) के पोलितब्यूरो सदस्य का. शंकर, सीपीआई(एम) के पोलितब्यूरो सदस्य का. जी. रामकृष्णन, भाकपा के राष्ट्रीय सचिव नारायण, भाकपा(माले) केन्द्रीय कमेटी सदस्य व पुदुच्चेरी इकाई के सचिव का. बालसुब्रह्मण्यन, एवं अन्य वामपंथी नेताओं ने मार्च का नेतृत्व किया और जनसभा को सम्बोधित किया.

इसी प्रकार के मार्च आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, कर्नाटक, पंजाब, राजस्थान, असम, त्रिपुरा एवं अन्य राज्यों में भी आयोजित किये गये.

 

देश की बहुसांस्कृतिक पहचान पर हमलावर ताकतों का प्रतिरोध करें

[6 दिसम्बर 2018 को नई दिल्ली के संसद मार्ग पर हुए संविधान व धर्मनिरपेक्षता बचाओ मार्च में कामरेड दीपंकर भट्टाचार्य का भाषण]

जिन लोगों ने 6 दिसम्बर 1992 को बाबरी मस्जिद का विध्वंस किया था वे ही आज हमारे देश की सत्ता पर काबिज हैं. इससे साफ जाहिर है कि आज वही खतरा कई गुने बढ़कर सामने खड़ा है. उस दिन वह केवल किसी मस्जिद पर हमला नहीं था, बल्कि वह हमारे संविधान, हमारी लोकतांत्रिक राजनीतिक प्रणाली, कानून के शासन और हमारे अपने देश की मूल पहचान की बुनियादी आधारशिला पर ही हमला था.

आज वही लोग संविधान, कानून के शासन और संसदीय प्रणाली में तोड़फोड़ कर रहे हैं. उनका मस्जिद पर हमला, शहरों का नाम बदला जाना, हमारे राष्ट्र की मुस्लिम पहचान को मिटा देना – यह सब हमारे देश की पहचान पर एक साजिशाना हमला है. आज हमें अपने संविधान, लोकतंत्र और राष्ट्र की पहचान की रक्षा करने के लिये ऐसी ताकतों के खिलाफ सशक्त प्रतिरोध का निर्माण करना होगा.

जब चुनाव नजदीक आ रहे हैं तो ये लोग फिर से मंदिर का मुद्दा उठा रहे हैं क्योंकि उन्होंने हर साल दो करोड़ रोजगार के अवसर सृजन करने का वादा नहीं पूरा किया है, वे यकीनन इस सवाल का भी जवाब नहीं देंगे कि किसानों की समस्याओं पर गंभीरतापूर्वक विचार न करने की वजह से उनके शासनकाल में हमारे चार लाख किसानों ने क्यों आत्महत्या कर ली; इसलिये वे साजिशाना ढंग से मंदिर के मुद्दे को जोरशोर से उठाने की कोशिश कर रहे हैं. जहां तक बाबरी मस्जिद का सवाल है, तो उससे सम्बन्धित आपराधिक और दीवानी, दोनों मुकदमे अभी भी सर्वोच्च न्यायालय के नियंत्रणाधीन पड़े हुए हैं . उन लोगों के खिलाफ जिन्होंने बाबरी मस्जिद का विध्वंस किया था, और साथ ही बाबरी मस्जिद की जमीन के मालिकाने से सम्बंधित मुकदमा भी. मगर वे लोग इसलिये यह चीख-पुकार मचा रहे हैं कि राम मंदिर के निर्माण के लिये संसद कानून बनाये, क्योंकि उनको हमारे सर्वोच्च न्यायालय पर भरोसा नहीं है.

हमारा संविधान इस बात की गारंटी करता है कि कोई नागरिक चाहे किसी भी धर्म या आस्था को माने, उन सब के बीच समानता कायम रहेगी. स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा हमारे संविधान की भूमिका में मौजूद हैं. मगर ये ताकतें हमारे देश को हिंदू राष्ट्र में तब्दील करने के लिये हमारे संविधान की धज्जियां उड़ाने की कोशिश कर रहे हैं. मगर उन्हें नहीं भूलना चाहिये कि डा. बाबासाहब अम्बेडकर, जिनका परिनिर्वाण दिवस आज मनाया जा रहा है, ने कहा था कि भारत पर हिंदू राज लादने की कोशिश हमारे देश के लिये सबसे बड़ी आपदा साबित होगी.

आज हमको अवश्य ही यह सौगंध लेनी होगी कि हम उन ताकतों के खिलाफ लड़ेंगे जो सामाजिक परिवर्तन, समानता और न्याय के खिलाफ सक्रिय हैं और जो हमारे देश के संविधान में तोड़-फोड़ करने की कोशिश कर रही हैं, हमारी गंगा-जमनी तहजीब तथा हमारे देश की बहुसांस्कृतिक पहचान को क्षति पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं. आज हमारे देश के हर हिस्से में वामपंथी पार्टियां हजारों की तादाद में सड़कों पर उतर कर यह संकल्प ले रही हैं. हमने देखा है कि कैसे उत्तर प्रदेश में गुंडा राज, यातना, जो पहले मुसलमानों, महिलाओं और कमजोर तबकों के खिलाफ हमले की शक्ल में शुरू हुआ था, उसने अपने पंजे फैलाकर आज पूरे प्रदेश को इस तरह शिकंजे में जकड़ लिया है कि समूचे राज्य में कोई भी सुरक्षित नहीं है, इसलिये विनोद तिवारी को इन्काउंटर दिखाकर गोलियों से उड़ा दिया गया और एक उन्मादी भीड़-गिरोह के हाथों इंस्पेक्टर सुबोध सिंह को जान गंवानी पड़ी. अब यह हमारी जिम्मेवारी है कि इस आतंक के शासन को लड़कर परास्त करें.

आज वे लोग हमारी शैक्षणिक संस्थाओं में तोड़-फोड़ मचा रहे हैं, और पाठ्यक्रम बदल रहे हैं. वे लोकतंत्र की जगह भीड़-गिरोह का शासन लाना चाहते हैं और हमें क्या खाना चाहिये और क्या पहनना चाहिये, ऐसी चीजों को हम पर लादने की कोशिश कर रहे हैं. योगी, मोदी और अमित शाह इस भीड़-गिरोह द्वारा शासन के आतंक का नेतृत्व कर रहे हैं. आइये, हम इन भीड़-गिरोहों के खिलाफ संविधान, लोकतंत्र और बहुसांस्कृतिक पहचान की रक्षा करें.

अभी पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, इसलिये वे कोशिश कर रहे हैं कि किसानों, नौजवानों, महिलाओं इत्यादि के प्रमुख मुद्दों से जनता का ध्यान मंदिर के नाम पर साम्प्रदायिक प्रचार करके भटका दिया जाय. हमें एक लोकतांत्रिक आधुनिक भारत की, जिसमें सभी लोगों के लिये स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे की गारंटी हो, डाक्टर अम्बेडकर की स्वप्नदृष्टि को हर गांव और कस्बे-शहर तक ले जाने के लिये और ज्यादा मजबूत एवं व्यापक एकता का निर्माण करना होगा- हमें लड़ना होगा और इस बात की गारंटी करनी होगी कि इतिहास का वह काला दिन, जब बाबरी मस्जिद का विध्वंस किया गया था, भविष्य में फिर कभी दुहराया न जा सके.

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