इंकलाबी नौजवान सभा का छठा राष्ट्रीय सम्मेलन: मोदी सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए आगामी फरवरी माह में नौजवानों के दिल्ली मार्च का संकल्प

इंकलाबी नौजवान सभा के आह्नान पर देश भर से जुटे हजारों युवाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में मार्च और रैली कर हुंकार भरी। नौजवानों ने शिक्षा और रोजगार के सवाल पर मोदी सरकार पर बुरी तरह फेल होने का आरोप लगाते हुए 2019 के चुनाव में मोदी सरकार को उखाड़ फेंकने का संकल्प लिया।

ये युवा इंकलाबी नौजवान सभा के छठे राष्ट्रीय सम्मेलन (15-16 दिसंबर 2018) के मौके पर वाराणसी में जुटे थे। 15 दिसंबर को दोपहर बारह बजे हजारों युवाओं ने कैंट स्टेशन से शास्त्री घाट तक रैली निकाली। युवा पूरे रास्ते ‘जुमला नहीं जवाब दो, पांच साल का हिसाब दो’, ‘नफरत नहीं रोजगार चाहिए, शिक्षा व अधिकार चाहिए’, ‘युवाओं ने भरी हुंकार, अब नहीं मोदी सरकार’ के नारे लगाते हुए चल रहे थे। मार्च का नेतृत्व जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष एन साईं बालाजी, इंकलाबी नौजवान सभा के महासचिव ओम प्रसाद, आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुचेता डे, सड़क पर शिक्षा आंदोलन चलाने वाले चर्चित युवा नेता मनोज मंजिल, इंकलाबी नौजवान सभा (उ.प्र.) के सचिव राकेश सिंह आदि कर रहे थे। जोशीले नारों, ढपली के थाप पर गीतों से पूरा बनारस गुंजायमान हो गया। बनारस के प्रमुख मार्गों से होता हुआ यह जुलूस शास्त्री घाट पहुंचा और सभा में तब्दील हो गया। सभा को युवा नेताओं के अलावा भाकपा(माले) के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने भी संबोधित किया।

अपने संबोधन में का. दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि मोदी सरकार ने रोहित वेमुला को आत्महत्या के लिए मजबूर किया, भीम आर्मी के नेता चन्द्रशेखर और इंकलाबी नौजवान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरजीत कुशवाहा को जेल में बंद कर युवाओं की आवाज को दबाने की कोशिश की, लेकिन वे नौजवानों की आवाज को दबाने में कामयाब नहीं हो सके। अभी पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आए हैं, उसमें युवाओं की हुंकार और किसानों का आक्रोश सुनाई देगा। मोदी राज में सबसे ज्यादा देश के नौजवान ठगे गये हैं। मोदी सरकार से युवाओं को उम्मीद थी कि वह उनके लिए काम करेंगे, लेकिन आज नौजवान ठगा महसूस कर रहे हैं। गुजरात और महाराष्ट्र में उत्तर प्रदेश और बिहार के नौजवानों को पीट-पीट कर भगाया गया। युवाओं के सामने सबसे बड़ा सवाल रोजगार है, लेकिन रोजगार के नाम पर अफवाह है, बेरोजगारी है, असुरक्षा है और युवाओं को बंधुआ बनाने की साजिश है। इस सरकार ने युवाओं को किसानों की तरह आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया। आज महंगाई आसमान छू रही है लेकिन आशाओं, रसोईयों, पैरा टीचर और तमाम योजनाओं में काम करने वाले युवाओं, महिलाओं को मामूली वेतन देकर उनके मान-सम्मान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। एक तरफ मोदी सरकार रोजगार नहीं दे पा रही हो, पढ़ाई के लिए स्कूल-कॉलेज नहीं दे पा रही है, इलाज के लिए अस्पताल नहीं दे पा रही है; लेकिन वह युवाओं को निर्देशित कर रही है कि वह क्या पहने, क्या खाए और कैसे रहे। मोदी सरकार ने दलित का स्वाभिमान और मान-सम्मान को कुचलने की कोशिश की है। दलित स्वाभिमान से भाजपा-आरएसएस के हिन्दू राष्ट्र को खतरा हो सकता है, लेकिन आधुनिक भारत के लिए दलितों-गरीबों, महिलाओं का स्वाभिमान और उनकी आजादी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि देश का नौजवान जाग गया है। नौजवानों ने भाजपा-आरएसएस-शिवसेना की साम्प्रदायिक उन्माद और नफरत की राजनीति को नकार दिया है। जब-जब देश में नौजवान सड़क पर उतरे हैं, चाहे वह आजादी या आपातकाल का दौर रहा हो या नक्सलबाड़ी का दौर हो, उन्होंने देश और समाज को बदलने में अहम भूमिका निभाई है। आज के दौर में भी युवा देश व समाज को बदलने के लिए सड़क पर उतर पड़ा है।

उन्होंने भीड़ हिंसा, किसान संकट, भूख से मौत और रफाल घोटाले का जिक्र करते हुए मोदी सरकार को घेरा और कहा कि इस सरकार का सत्ता में आना सुनामी, भूकम्प जैसा हादसा था। इस सरकार ने देश के संविधान और लोकतंत्र के सामने खतरा पैदा कर दिया है। वर्ष 2019 में किसान, मजदूर, युवा, महिलाओं सहित समाज का हर हिस्सा अपने साथ हुए इस हादसे का बदला लेगा और मोदी सरकार को उखाड़ फेंकेगा।

जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष एन साईं बालाजी ने कहा कि मोदी ने सत्ता में आने से पहले खूब वादे किए थे लेकिन एक भी वादा पूरा नहीं किया। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू नहीं किया, और नोटबंदी व जीएसटी से लाखों लोगों का रोजगार छिन गया। सरकार मेहनतकशों के श्रम का एक-एक रुपया अडानी अंबानी को दे रहे हैं। गंगा को साफ करने के नाम पर वोट लिए लेकिन गंगा साफ नहीं हुई। मोदी जी वाराणसी के सांसद हैं जबकि सड़कें बुरी तरह टूटी हुई हैं। मोदी ने जियो यूनिवर्सिटी को करोड़ों रुपये दे दिए, जो अस्तित्व में ही नहीं है। बाला ने कहा कि मोदी देश के पीएम नहीं अंबानी के जीएम की तरह काम कर रहे हैं। हम मोदी को 15 दिन का समय देते हैं; अगर वे पंद्रह दिन में 24 लाख रिक्त पदों को नहीं भरेंगे तो हम देश के युवाओं को संगठित कर दिल्ली की तरफ कूच करेंगे।

बीएचयू आंदोलन की नेता अपर्णा ने कहा कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा देने वाले मोदी बनारस में जब आये तो छात्राओं की मांग को सुनने के बजाय रास्ता बदलकर चले गए। छात्रओं को इसलिए निष्कासित कर दिया गया क्योंकि वो अपनी आजादी और हक के लिए आवाज बुलंद कर रहे थे। नई चीफ प्रॉक्टर से उम्मीद थी कि वो हमारी आवाज सुनेंगी क्योंकि वे भी महिला हैं, लेकिन हुआ उल्टा।

आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुचेता डे ने कहा कि मोदी जी ने कहा था कि हमें गंगा मां ने बुलाया है- वे बनारस के माध्यम से उत्तर प्रदेश में साम्प्रदायिकता का माहौल बनाकर राज करना चाहते थे। पिछले साढ़े चार साल के मोदी शासन की सच्चाई ये है कि लोग कह रहे हैं कि चौकीदार ही चोर है। किसानों व नौजवानों से गद्दारी करके वे चाहते हैं कि उन्हें एक बार फिर से मैंडेट मिले। मोदी सरकार अडानी अंबानी के चरणों में देश का संसाधन लुटा देना चाहती है। आने वाले दिनों में कौन सरकार बनायेगा ये देश की जनता तय करेगी।

रसोइया आंदोलन की नेता सोहिला गुप्ता ने कहा कि चाय बेचने वाले की सरकार है तो चाय वालों की ही स्थिति सुधर जानी चाहिए थी। लेकिन पूरे देश को गाय गोबर, मंदिर-मस्जिद में उलझा दिया गया है। छोटी-छोटी बच्चियों के साथ रेप हो रहा है।

रैली को सम्बोधित करते हुए जन संस्कृति मंच के महासचिव मनोज कुमार सिंह ने कहा कि मोदी सरकार युवा भारत को बेरोजगार भारत बनाने का अपराधी है। बयालीस करोड़ युवाओं के इस देश में हताशा में हर वर्ष 17 हजार नौजवान आत्महत्या कर रहे हैं। बेरोजगारी उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है, लेकिन मोदी-योगी सरकार हजारों करोड़ रुपया सिर्फ मूर्तियां बनाने और दीप जलाने में खर्च कर रही है।

युवा हुंकार रैली का संचालन इंकलाबी नौजवान सभा के प्रदेश सचिव राकेश सिंह ने किया। इस मौके पर भाकपा(माले) के पोलितब्यूरो सदस्य रामजी राय, केंद्रीय कमेटी सदस्य ईश्वरी कुशवाहा, श्रीराम चौधरी, मनीष शर्मा, भाकपा(माले) के राज्य सचिव सुधाकर यादव आदि भी मौजूद थे।

दूसरे दिन 16 दिसंबर को सम्मेलन शुरू होने से पहले जनकवि कृष्ण कुमार ‘निर्माेही’ के जनगीतों और मथुरा से आये साथियों के नाटक की प्रस्तुति हुई। सम्मेलन हॉल का नाम का- चंद्रशेखर हॉल, मंच का नाम रोहित वेमुला मंच, और गेटों के नाम का. रमा गैरोला और का-.मारिअप्पन गेट तथा नगर का नाम अशफाक-बिस्मिल नगर रखा गया था।

सम्मेलन में देश भर से आए कुल 350 प्रतिनिधि शामिल थे। डिस्कशन में 55 प्रतिनिधियों ने भाग लिया और कामकाज की रिपोर्ट पर बहस-मुबाहिसा की। सम्मेलन में सर्वसम्मति से 77-सदस्यीय राष्ट्रीय परिषद और 24-सदस्यीय कार्यकारणी का चुनाव हुआ। कामरेड नीरज कुमार को इंनौस का राष्ट्रीय महासचिव, का. मनोज मंजिल को राष्ट्रीय अध्यक्ष व का. अमरजीत कुशवाहा को सम्मानित अध्यक्ष चुना गया। का. संदीप जायसवाल, का. विमल व का. सजल राष्ट्रीय सचिव और का. राकेश को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चुना गया।

सम्मेलन में तीन प्रस्ताव पारित किए गए –
1. इनौस के राष्ट्रीय अध्यक्ष का. अमरजीत कुशवाहा पिछले तीन वर्षों से जेल में बंद हैं। यह जदयू-भाजपा के नेतृत्व में चल रही बिहार सरकार की योजनाबद्ध साजिश है। सम्मेलन मांग करता है कि का. अमरजीत कुशवाहा और भाकपा(माले) विधायक सत्यदेव राम पर लगाये गए फर्जी मुकदमों को तत्काल वापस लिया जाए.

2. मोदी सरकार के आने के बाद दलितों और आदिवासियों पर हमले लगातार बढ़े हैं। एससी / एसटी एक्ट को हल्का करने के खिलाफ देशभर के दलितों व आदिवासियों ने 2 अप्रैल 2018 को ऐतिहासिक भारत बंद किया था। भाजपा सरकारों ने न सिर्फ प्रदर्शनकारियों का दमन किया है, बल्कि उन पर फर्जी आपराधिक केस भी लगाये हैं। उन पर लगाये गए फर्जी आपराधिक मुकदमें वापस लिए जाएं। देश भर में मॉब लिंचिंग की घटनाओं में मारे गए लोगों के परिजनों को न्याय मिले तथा मॉब लिंचिंग के लिए उकसाने वाले अपराधियों को सजा मिले। भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर आजाद पर थोपे गये मुकदमें वापस लिए जाएं।

3. मोदी सरकार युवाओं को हर साल दो करोड़ रोजगार देने का वादा करके सत्ता में आई थी। पिछले पांच सालों से युवाओं से विश्वासघात पर विश्वासघात किया गया है। रोजगार के उपलब्ध सभी अवसरों को बर्बाद कर दिया गया है। बेरोजगरी बेहताशा बढ़ी है। इस सरकार ने पब्लिक फंडेड शिक्षा पर लगातार नियोजित हमले किये हैं। इन्हीं सालों में युवाओं और छात्रें ने मोदी सरकार के खिलाफ बड़े बड़े आंदोलन भी किये हैं। पांच सालों में हुए इन आंदोलनों को संगठित करके फासीवादी मोदी सरकार को हराना बेहद जरूरी है। दिल्ली में हुए ऐतिहासिक किसान मुक्ति मार्च से प्रेरणा लेते हुए देश भर के छात्र-नौजवान अगले साल फरवरी के पहले सप्ताह में सस्ती शिक्षा, सम्मानजनक रोजगार के लिए दिल्ली में मार्च करेंगे। देश भर में चल रहे आंदोलनों से जुड़े हुए छात्र-नौजवान इसमें हिस्सा लेंगे और मोदी सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकने का बिगुल बजाएंगे।

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