पिछले साढ़े चार वर्षों में अभूतपूर्व विभाजन पैदा करने और देश को बांटने के बाद मोदी ने ‘स्टैचू ऑफ युनिटी’ का अनावरण किया

31 अक्टूबर के दिन मोदी ने ‘स्टैचू ऑफ युनिटी’, सरदार वल्लभ भाई पटेल की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा, का अनावरण किया. सरदार पटेल कांग्रेस के नेता थे; फिर भी मोदी और आरएसएस संघ परिवार द्वारा पूजित नेताओं की श्रेणी में उन्हें हड़प लेने की जी-तोड़ कोशिशें करते रहे हैं. यह काफी विडंबनापूर्ण है, क्योंकि यह सुविदित है कि पटेल आरएसएस के कट्टर आलोचक थे और गृह मंत्री की हैसियत से उन्होंने गांधी की हत्या के बाद आरएसएस को प्रतिबंधित कर दिया था. आइये, हम देखते हैं कि आरएसएस के बारे में उनका क्या कहना था.

गांधी की मृत्यु के बाद, उनकी जिंदगी छीनने वाले जहरीले माहौल के लिए आरएसएस को सीधेसीधी जिम्मेदार मानते हुए पटेल ने तत्कालीन आरएसएस सरसंघचालक गोलवलकर को लिखा था, “उनके (आरएसएस के लोगों के) तमाम भाषण सांप्रदायिक जहर से भरे हुए थे. यह जहर फैलाने और हिंदुओं को प्रोत्साहित कर उनकी सुरक्षा के लिए उन्हें संगठित करने की कोई जरूरत नहीं थी. इस जहर के अंतिम नतीजे के बतौर देश को गांधीजी की बेशकीमती जिंदगी की कुर्बानी झेलनी पड़ी. … आरएसएस के लोगों ने गांधीजी की मौत के बाद खुशियां मनाईं और मिठाइयां बांटीं. इन परिस्थितियों में आरएसएस के खिलाफ कार्रवाई करना सरकार के लिए अनिवार्य हो गया.” (गोलवलकर को सरदार पटेल की चिट्ठी, 11 सितंबर 1948)

मोदी और संघ परिवार पटेल को हड़पने का हताशोन्मत्त प्रयास कर रहे हैं, क्योंकि संघ के पास ऐसा कोई शख्स नहीं है जिसकी उपनिवेशवाद-विरोधी संघर्ष में भागीदारी प्रमाणित की जा सके. इसी हताशा में आकर संघ ने पटेल पर नजर गड़ाई, जो रूढि़वादी दृष्टिकोण रखते हुए भी आरएसएस के बारे में कोई दो मत नहीं रखते थे.

मोदी ने इस प्रतिमा का नाम ‘स्टैचू ऑफ युनिटी’ (एकता की प्रतिमा) रखा है. यह भी काफी विडंबनापूर्ण है, क्योंकि उनकी सरकार ने सांप्रदायिक नफरत, मॉब लिंचिंग, इस्लाम-भीति तथा दलितों पर हमले फैलाने का हर संभव प्रयास किया है और हमारे समाज के धर्मनिरपेक्ष तानेबाने को अपूरणीय क्षति पहुंचाई है.

यह प्रतिमा सरदार सरोवर बांध के निकट बनाई गई है, लेकिन इस बांध के निर्माण के दौरान जिन किसानों व आदिवासियों की जमीन जलमग्न हुई थी, उन्हें आज तक मुआवजा नहीं मिला है. आसपास के ग्रामीणों ने अपने प्राकृतिक संसाधनों की लूट के खिलाफ निरंतर प्रतिवाद किए हैं. सरदार सरोवर बांध के निकट के 22 गांवों के मुखियों ने मोदी को खुली चिट्ठी लिखकर कहा कि स्टैचू ऑफ युनिटी के उद्घाटन पर ग्रामीण उनका स्वागत नहीं करेंगे. स्थानीय आदिवासी नेताओं ने भी इस स्मारक के चलते प्राकृतिक संसाधनों के नुकसान का हवाला देते हुए इस समारोह के बहिष्कार की घोषणा की थी. एक चिट्ठी में उन्होंने स्पष्ट किया था कि जहां इस प्रतिमा पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, वहीं इसके आसपास के गांवों में स्कूल, अस्पताल और पेय जल जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं.

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