पोलित ब्यूरो सरकुलर

पार्टी की केन्द्रीय कमेटी के पोलितब्यूरो की बैठक कोलकता के समीप उत्तर 24 परगना जिला कमेटी कार्यालय में 7-8 सितम्बर 2018 को सम्पन्न हुई. बैठक की शुरूआत दिवंगत साथियों कामरेड डीपी बख्शी, प्रसिद्ध लेखक एवं लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रवक्ता कुलदीप नायर, सीपीएम के पूर्व बिहार राज्य सचिव विजयकांत ठाकुर और बिहार में सीपीएम के वरिष्ठ नेता कृष्णकांत सिंह, कोलकाता में भाकपा(माले) के वरिष्ठ साथी परितोष भट्टाचार्य और पिछली पीबी बैठक के बाद दिवंगत हुए अन्य सभी साथियों को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई. पोलितब्यूरो ने केरल में बाढ़ की तबाही और कोलकता में माझेरहाट पुल गिरने की घटनाओं में मृत लोगों के प्रति शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं. बैठक के प्रमुख विमर्श एवं निर्णय संक्षेप में इस प्रकार हैं.

केरल बाढ़ राहत अभियान: केरल में बाढ़ की तबाही के प्रति केन्द्र सरकार की उदासीनता और संघ ब्रिगेड के घृणास्पद व रूढि़वादी प्रचार की पोलितब्यूरो ने कड़ी निन्दा की है. पोलित ब्यूरो ने केरल के साथियों द्वारा किये गये त्वरित बचाव एवं राहत पहलकदमियों के लिए उन्हें बधाई दी है. केरल के बाढ़ पीडि़तों को हर सम्भव सहायता देने के केन्द्रीय कमेटी के आह्नान को अधिकांश राज्यों में साथियों ने गम्भीरता से लिया. तमिलनाडु के साथियों ने अनुकरणीय भूमिका प्रदर्शित करते हुए करीब दस लाख रुपये केरल राहत कोष में जमा कराये. इसमें एक अकेली यूनियन (को-ऑप्टेक्स के मजदूरों) ने ही पांच लाख रुपये इकठ्ठा किये, जिसमें कई सदस्यों ने अपनी एक दिन की मजदूरी का सहयोग किया. कन्याकुमारी के साथियों ने एक ट्रक सामग्री राहत अभियान में मदद करने के लिए भेजी. बिहार, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश की राज्य कमेटियों ने भी कुल दस लाख रुपये से अधिक का कोष जमा किया. जो राहत कोष जमा हुआ उसमें से एक हिस्सा केरल मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा किया गया और बाकी हमारे केरल के साथियों के माध्यम से पार्टी द्वारा चलाये गये राहत अभियान में सीधे खर्च किया गया.

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर हमला: मोदी सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर व्यवस्थित रूप में किये जा रहे हमलों की पोलितब्यूरो ने कड़ी भर्त्सना की है. एक ओर भीमा-कोरेगांव में दलितों पर हुए हमले के असली अपराधियों को राज्य बचा रहा है, दूसरी ओर देश के प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को ‘अर्बन नक्सल’ बताकर और उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हत्या की तथाकथित साजिश के झूठे मुकदमे में फंसा कर शातिराना ढंग से धरपकड़ चल रही है. विभिन्न प्रकार की लोकतंत्र पसंद शक्तियों द्वारा देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों और सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा हस्तक्षेप कर गिरफ्तारियों को रोकने एवं असहमति का गला घोंटने को ‘लोकतंत्र के सेफ्टी वाल्व पर चोट’ बताने का पोलितब्यूरो ने स्वागत किया है. हमें विरोध करने वाली ऐसी सभी शक्तियों तक पहुंचना चाहिए और लोकतंत्र के स्वरों को मजबूत बनाना चाहिए.

एनआरसी और नागरिकता संशोधन विधेयक: असम में भारी संख्या में लोगों को एनआरसी के फाइनल ड्राफ्ट से बाहर रखने को पोलितब्यूरो ने गम्भीरता से लिया है. इन चालीस लाख लोगों में भारी बहुमत भारतीय नागरिकों का है, जो असम समेत विभिन्न राज्यों से आते हैं और दशकों से वहां हैं व काम कर रहे हैं. इस अन्यायपूर्ण बहिष्करण को जल्द दुरुस्त कराने की जगह भाजपा ने तत्काल ही उन्हें घुसपैठिया घोषित कर दिया और अन्य राज्यों में भी एनआरसी लाने का अभियान शुरू कर दिया है, खासकर पश्चिम बंगाल में जो स्पष्टतः वहां एनआरसी का उपयोग करके आगामी चुनाव से पहले तीखे साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण को अंजाम देने की मंशा से किया जा रहा है. इस कदम ने लोगों में व्यापक असुरक्षा व अनिश्चयता का वातावरण बना दिया है जो देश की बहुसंख्यक आबादी के सामने मौजूद आजीविका, आजादी और सम्मान के मूलभूत एजेण्डा के लिए एक खतरा है. भाजपा एनआरसी से उपजी व्यग्रता को नागरिकता संशोधन विधेयक का लालच दिखा कर संतुलित करने की कोशिश कर रही है. नागरिकता के सवाल को साम्प्रदायिक रंग देने के अलावा ऐसी हरकत धूर्तता की हदों को पार करने वाली भी है. विभिन्न अंतरालों में भारत में बस गये शरणार्थियों और आप्रवासियों द्वारा झेली गयी वंचना और बहिष्करण का हल नागरिकता देने के वायदे से नहीं हो सकता. मात्र नागरिकता होने भर से लोग कॉरपोरेट लूट, आर्थिक वंचना और लोकतंत्र के निषेध से बच नहीं पाते. हमें जनता के मूलभूत मुद्दों पर केन्द्रित करते हुए एनआरसी और नागरिकता संशोधन विधेयक पर भाजपा की विभाजनकारी और धूर्ततापूर्ण चाल का दृढ़ता के साथ विरोध करना होगा.

चुनावी तैयारियां: जैसे जैसे चुनाव निकट आ रहे हैं, भाजपा की हताशा भी बढ़ती जा रही है. हमें सतर्कता बनाये रखनी होगी और संघ गिरोह की किसी भी साजिश को सिर उठाते ही कुचल देना होगा. वोटर लिस्टों से मजबूत भाजपा विरोधी वोटरों के नाम बड़ी संख्या में काटने की कोशिशें व्यवस्थित रूप में चल रही हैं. मतदाता सूचियों को अद्यतन करने की चल रही प्रक्रिया पर हमें कड़ी नजर रखनी होगी और इस बात की गारंटी करनी होगी कि हमारे सभी सम्भावित मतदाताओं का नाम मतदाता सूचियों में हो. बिहार में चुनावी तालमेल की सम्भावनाएं अभी भी काफी धुंधली हैं. झारखण्ड में अन्य विपक्षी शक्तियों के साथ हमारे तालमेल की किसी भी सम्भावना के रास्ते में कोडरमा से, जहां हम 2014 में दूसरे नम्बर पर थे, बाबूलाल मराण्डी द्वारा चुनाव लड़ने पर जोर प्रमुख अवरोध है. सीटों में व्यापक आधार पर तालमेल की किसी भी सम्भावना के प्रति खुला रुख रखते हुए हमें अपनी स्वतंत्र तैयारियों पर पूरा ध्यान केन्द्रित करना होगा. पोलितब्यूरो ने कुछ संसदीय क्षेत्रों की सूची बनायी है जहां किसी तालमेल के न होने पर हम अवश्य चुनाव लड़ेंगे. 2019 के महायुद्ध की तैयारी में राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में होने वाले विधानसभा चुनावों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी. भाजपा की हार को सुनिश्चित करने के लिए इन राज्यों में सभी सीटों पर अभियान चलाने के साथ-साथ यदि सम्भव हुआ तो हमारी ओर से अन्य वाम दलों के साथ सीटों का तालमेल बनाने और कुछ चुनिन्दा सीटों पर चुनाव में उतरने की कोशिश की जायेगी.

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