जिंदा जलाने का प्रयास, फिर भी धारा 307 नहीं, महबूब आलम ने प्रोफेसर संजय कुमार से की मुलाकात

पटना 18 अगस्त 2018

भाकपा-माले विधायक दल के नेता, पार्टी के वरिष्ठ नेता राजाराम, राज्य कमिटी सदस्य कुमार परवेज, आइसा के बिहार राज्य अध्यक्ष मोख्तार, आकाश कश्यप, आइसा के पटना विश्वविद्यालय संयोजक विकास यादव, रामजी यादव, संतोष कुमार आर्या, दानिश अनवर, रिजवान, आदि नेताओं ने पीएमसीएच में जाकर संघी गुंडों के हमलों के शिकार मोतिहारी केंद्रीय विश्वविद्यालय में कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसर संजय कुमार से मुलाकात की व उनका हालचाल लिया.

उनका हालचाल लेने के बाद माले विधायक महबूब आलम ने कहा कि आरएसएस आज पूरे देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला कर रहा है और खौफ का माहौल कायम कर रहा है. यह बेहद शर्मनाक है. उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय हमलावरों को केंद्रीय मंत्री राधामोहन सिंह का खुलेआम संरक्षण है. पुलिस प्रशासन भी उनके प्रभाव में है. इतने जघन्य अपराध के बावजूद भी पुलिस-प्रशासन अपराधियों को बचाने में लगा है.

प्रो. संजय कुमार जब एफआईआर करने गए तो उसमें तीन से चार घंटे का समय लगाया गया. मुकदमा हुआ तो पुलिस ने जानबूझकर धारा 307 नहीं लगाया, जबकि उनके शरीर पर पेट्रोल छींटकर उन्हें जिंदा जलाने का प्रयास किया गया. उसके बाद अस्पताल मंे इलाज में लापरवाही बरती गई. विरोध करने पर वहां के एसपी ने पीएमसीएच रेफर न करने का दबाव बनाया. काफी मशक्कत के बाद पीएमसीएच रात के साढ़े नौ बजे रेफर किया गया.

प्रो. कुमार का कसूर केवल इतना था कि उन्होंने वाजपेयी से संबंधित एक पोस्ट फेसबुक पर डाली थी. बीजेपी व आरएसएस से जुड़े गुंडों ने बस इसी बात पर उन पर हमला बोल दिया. उनके कपड़े फाड़ डाले और उनको जलाने की नीयत से उनके ऊपर पेट्रोल डाल दिया. हमलावरों में शमि वाजपेयी, अमन वाजपेयी, राहुल आर पांडेय, ज्ञानेश्वर गौतम, पुरूषोत्तम शर्मा, कमलेश कुमार आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं.

भाकपा-माले ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद सोशल मीडिया पर लिखे गए वक्तव्यों को लेकर हमला करना लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है. ये घटनाएं साबित करती हैं कि वाजपेयी ने जिस राजनीति के बीज बोए थे आज वह पूरी तरह फल-फूल रहा है और देश में एक अघोषित आपातकाल है.

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