अश्रुपूर्ण आंखों से अंतिम विदाई दी साथियों ने कामरेड डीपी बख्शी (प्रणव दा) को

देश भर से आए भाकपा(माले) और जन संगठनों के नेताओं तथा बिरादराना वामपंथी पार्टियों के नेताओं ने भाकपा(माले) पोलित ब्यूरो सदस्य कामरेड डीपी बख्शी (प्रणव दा) को अंतिम विदाई दी, जिनका 26 जुलाई को निधन हो गया था. 27 जुलाई को केवड़ातला शवदाह गृह में उनका दाह संस्कार किया गया.

अंतिम यात्रा से पूर्व कामरेड बख्शी का शव भाकपा(माले) के पश्चिम बंगाल राज्य कार्यालय में लाया गया जहां उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई. श्रद्धांजलि सभा में बिरादराना पार्टियों के अनेक लोगों ने हिस्सा लिया: माकपा से कामरेड विमान बोस व रबिन देव, फॉरवर्ड ब्लॉक के नरेन चटर्जी, भाकपा के उज्ज्वल चौधरी, आरएसपी के तपन मित्र और राजीव बनर्जी, एसयूसीआइ(सी) के शंकर साहा और मानव बेरा, पीडीएफ के समीर पुततुंडा और अनुराधा देव, दुर्गापुर आरई कॉलेज के छात्र और वरिष्ठ मार्क्सवादी चिंतक गौतम सेन, चुंचुड़ा के वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता सनत राय चौधरी (जो प्रणव दा को छात्र जीवन से ही जानते थे), चिंतन पत्रिका से प्रसेनजित बोस तथा संजय पाठक, पीडीएसएफ के डा. मृण्मय, श्रमजीवी भाषा पत्रिका के प्रतीप नाग और समुद्र दत्ता, भाकपा(माले) (संतोष राणा के नेतृत्व में) से वासव घोष.

अंतिम यात्रा में भाकपा(माले) के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य, पोलित ब्यूरो सदस्य का. स्वदेश भट्टाचार्य, कार्तिक पाल, पार्थ घोष, प्रभात कुमार, एस. कुमारस्वामी, शंकर, अमर, कुणाल, धीरेंद्र झा, मनोज भक्त, जनार्दन प्रसाद, राजाराम सिंह, केंद्रीय कंट्रोल कमीशन के अध्यक्ष तथा समकालीन लोकयुद्ध के संपादक बृज बिहारी पांडेय, केंद्रीय कमेटी सदस्य अभिजीत मजुमदार, शुभेंदु सेन, विनोद सिंह, गीता मंडल, मीना तिवारी, शशि यादव, सरोज चौबे, बालिंद्र सैकिया, युधिष्ठिर महापात्र, राधाकांत सेठी, बांगर राव, नागमणि, तिरुपति गोमांगो, ईश्वरी प्रसाद और सुधाकर यादव, साथ ही साथ विधायक राजकुमार यादव और सुदामा प्रसाद व जादवपुर के रंजीत (रुनु) बोस रेलवे से का. रवि सेन और एनएन बनर्जी, और पूरे पश्चिम बंगाल के अन्य नेतृत्वकारी कामरेड शामिल हुए.

अंतिम यात्रा के पूर्व श्रद्धांजलि सभा में बोलते हुए का. दीपंकर ने याद दिलाया कि 10वीं पार्टी कांग्रेस की तैयारियों का जायजा लेने के लिए सबसे पहले मानसा पहुंचने वाले नेताओं में से वे एक थे. उन्हें कैंसर की शिनाख्त हो जाने के बाद कई कामरेड उनसे मिलने गए. प्रणव दा ने पश्चिम बंगाल राज्य कमेटी की बैठक को चिट्ठी भेजकर आश्वस्त किया कि बीमारी चाहे जितनी भी गंभीर हो, इससे उनकी सक्रियता खत्म नहीं हो सकती है. कामरेड दीपंकर ने कहा कि “वास्तव में प्रणव दा अपने छात्र जीवन से ही सक्रिय रहे और अंतिम सांस तक संघर्ष करते रहे. मैंने उन्हें किसी भी जिम्मेदारी से ‘ना’ कहते नहीं सुना, उन्हें कभी पराजय स्वीकार करते नहीं सुना. 1970 के दशक ने हमें हमारी पार्टी दी, हमें क्रांतिकारी सपने प्रदान किए, हमें साहस दिया – लेकिन प्रणव दा में हमें उसका एक और ही उपहार देखने को मिला और वह था अच्छी या बुरी, तमाम परिस्थितियों में दृढ़तापूर्वक डटे रहने का संकल्प और जुझारूपन, पराजय की मानसिकता को कभी स्वीकार न करना. पश्चिम बंगाल, असम, ओडि़शा, झारखंड, छत्तीसगढ़ दक्षिणी राज्य – हर जगह वे प्रसन्न मन से काम करने चले गए. उन्होंने असमिया भाषा सीखी. हालांकि वे दक्षिण के राज्यों की भाषा नहीं समझते थे, लेकिन वे कामरेडों के दिलोदिमाग की भाषा समझते थे. कार्बी आंग्लांग के कामरेडों ने फोन करके बताया कि वे लोग प्रणव दा की स्मृति में शोक-समारोह आयोजित करेंगे. प्रायः हमारे अनुभव हमारे उत्साह को कम कर देते हैं, हमें थका डालते हैं; लेकिन प्रणव दा ने हमें अपने अनुभवों को नए अनुभव ग्रहण करने की भूख में तब्दील कर डालने, अपनी आंख और दिमाग को खुला रखने और अपने दरवाजे कभी बंद न करने की सीख दी है. उनसे हमें यही विरासत मिली है. उनके निधन पर हम सब को दुख और तकलीफ हो रहे हैं, लेकिन हम उनकी विरासत को ग्रहण करेंगे जो हमें शक्ति और आगे की राह दिखाने के लिए रोशनी देगी.”

इसके बाद कामरेड डीपी बख्शी की अंतिम यात्रा पार्टी राज्य कार्यालय से शुरू होकर रासबिहारी होते हुए केवड़ातला विद्युत शवदाहगृह पहुंची. यात्रा में सैकड़ों साथी शामिल थे. आगे आगे झुके हुए लाल झंडे लिये हुए शोकाकुल मगर संकल्पबद्ध साथी चल रहे थे और उनके पीछे पार्टी नेता एवं कार्यकर्ता. पूरी अंतिम यात्रा के दौरान का. बख्शी की स्मृति में इंटरनेशनल का गायन चलता रहा.

कामरेड डीपी बख्शी की स्मृति में देशभर में शोक सभाएं की गईं. दिल्ली स्थित केंद्रीय पार्टी कार्यालय में आयोजित शोक सभा में केंद्रीय मुख्यालय के कामरेडों और दिल्ली के साथियों ने शिरकत की. पटना और बिहार के विभिन्न जिलों के पार्टी कार्यालयों, लखनऊ और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में, रांची तथा झारखंड के अनेक जिलों में, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु, कर्नाटक, असम और आंध्र प्रदेश के कई स्थानों पर शोक सभाएं संगठित की गईं. पुदुच्चेरी में उनकी स्मृति में कामरेडों ने जुलूस निकाला. उत्तराखंड के बिंदुखत्ता और लालकुआं में कामरेडों ने 28 जुलाई को का. चारु मजुमदार की बरसी के मौके पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की.

लखनऊ में लालकुआं स्थित पार्टी कार्यालय में शोक सभा हुई। दो मिनट के मौन और उनकी फोटो पर पुष्पांजलि अर्पित करके उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गयी। वक्ताओं ने कहा कि कामरेड बख्शी के निधन से भाकपा(माले) और कम्युनिस्ट आंदोलन को अपूरणीय क्षति हुई है। खासकर फासीवादी हमले के मौजूदा दौर में ऐसे तपे-तपाये मार्गदर्शक नेता की कमी सालती रहेगी। सभा में उनके सपनों को मंजिल तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया और उन्हें लाल सलाम पेश किया गया। इस अवसर पर माले के जिला प्रभारी रमेश सेंगर, जन संस्कृति मंच के कौशल किशोर, आइसा नेता शिवा व अतुल, रेलकर्मियों के नेता मधुसूदन मगन, स्कूटर्स इंडिया के रामबाबू सिंह एवं अन्य कई साथी मौजूद रहे। प्रदेश के अन्य जिलों में भी शोक सभाएं आयोजित कर गुजरे नेता को श्रद्धांजलि दी गयी। इलाहाबाद में भी 28 जुलाई को का. चारु मजुमदार के साथ-साथ का. डीपी बख्शी को श्रद्धांजलि देते हुए का. रामजी राय ने कहा कि कामरेड होने का मतलब सभी तरह के कठिनाइयों का सामना करते हुए हर चुनौती को सहर्ष स्वीकार कर लेना, जो कि डीपी बख्शी के अंदर बहुत ही साफ-साफ दिखाई देता है।

झारखंड के हजारीबाग जिला के रैलीगढ़ा में का. डीपी बक्शी को श्रद्धांजलि दी गई. यहां 1991 में 26 जुलाई को ही माफियागिरी के खिलाफ मजदूरों के रोजगार और मजदूरी के लिए लड़ते हुए आठ मजदूर शहीद हुए थे और प्रतिवर्ष उनका शहादत दिवस भी मनाया जाता है। का. डीपी बख्शी और उन शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कांटाघर से एक रैली निकाली गई जिसका नेतृत्व हजारीबाग के जिला सचिव का. पच्चू राणा, बैजनाथ मिस्त्री, सोहराय किस्कू आदि कर रहे थे. मार्च में शामिल सैकड़ों मजदूर लोकल सेल में काम, न्यूनतम मजदूरी, भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल विधेयक वापस लेने, श्रम विरोधी विधेयक वापस लेने की मांग करते हुए मोदी हटाओ-देश बचाओ, रघुवर भगाओ-झारखंड बचाओ के नारे लगा रहे थे. रैलीगढ़ा फुटबॉल मैदान में शहादत सभा हुई. का. रामवृक्ष बेदिया ने झण्डोत्तोलन किया. राज्य कमेटी सदस्य भुनेश्वर बेदिया, नरेश बड़ाइक, कौलेश्वर राम, सोनी तिरिया, देवकीनंदन बेदिया आदि ने कहा कि भाकपा(माले) के वरिष्ठ नेताओं में से एक का. डीपी बक्शी ने पार्टी के विस्तार में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उनके निधन से पार्टी को बड़ी क्षति हुई है।

गढ़वा में भाकपा(माले) की जिला कमेटी ने लोहिया भवन में वरिष्ठ नेता का. डीपी बख्शी को श्रद्धांजलि दी. वक्ताओं ने उनके संघर्षमय जीवन को याद करते हुए कहा कि आपातकाल के बाद जेल से रिहा होने के बाद वे पूरे देश में पार्टी विस्तार व सुदृढ़ीकरण के काम में जुट गये. पश्चिम बंगाल के अलावा असम, झारखंड, ओडि़शा, तमिलनाडु, आन्ध्रप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाकपा(माले) के विस्तार में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही. मजूदर वर्ग मोर्चे पर, विशेषकर रेलवे मजदूरों के बीच, पार्टी निर्माण में भी उन्होंने केन्द्रीय भूमिका निभाई. अपने खराब स्वास्थ्य के बावजूद दूर-दूर राज्यों में यात्राएं कर वे पार्टी की विभिन्न जिम्मेदारियों को पूरे मनोयोग से पूरा कर नयी पीढ़ी को वे प्रेरणा देते रहे. अपने सौम्य व्यवहार और हर तरह की कठिन परिस्थिति में धैर्यपूर्वक काम करते रहने के स्वभाव से वे साथियों में अत्यंत लोकप्रिय थे। शोकसभा मे जिला सचिव कालीचरण मेहता, सुषमा मेहता, किशोर कुमार, वीरेंद्र चौधरी, एस एन पाठक, लालमुनि गुप्ता, कामेश्वर विश्वकर्मा आदि दर्जनों लोग शामिल हुए।

गिरिडीह जिले के जमुआ स्थित पार्टी कार्यालय में का. डीपी बख्शी को श्रद्धांजलि दी गई जहां जिला सचिव का. मनोज भक्त की उपस्थिति में शोकसभा की गई. यहां पार्टी के स्थानीय नेता अशोक पासवान, प्रखंड सचिव विजय पांडे, मीना दास आदि उपस्थित थे. बगोदर में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम को पार्टी केंद्रीय कमेटी सदस्य और बगोदर के पूर्व विधायक विनोद कुमार सिंह, झामस महासचिव परमेश्वर महतो, पूनम महतो, पवन महतो, भोला मंडल, पूरन महतो, गजेंद्र महतो, सरिता महतो, प्रखंड प्रमुख मुस्ताक अंसारी, संदीप जायसवाल, उप प्रमुख सरिता साव समेत बीसियों लोग उपस्थित थे। वक्ताओं ने कहा कि बगोदर सहित पूरे गिरीडीह-कोडरमा में पार्टी को मजबूत करने में उनकी अविस्मरणीय भूमिका रही। वे यहां अभिभावक माने जाते थे. श्रद्धांजलि कार्यक्रम बिरनी जिले के सहित विभिन्न प्रखंडों में आयोजित किये गये. इसके अलावा रांची स्थित राज्य पार्टी कार्यालय, रामगढ़, बोकारो, धनबाद, डालटनगंज, पांकी, देवघर आदि लगभग सभी जिलों, में का. डीपी बख्शी को श्रद्धांजलि दी गई और उनके जीवन से शिक्षा लेकर पार्टी कार्याे को आगे ले जाने का संकल्प लिया गया।

कामरेड डीपी बख्शी को पटना सहित बिहार के विभिन्न जिलों में श्रद्धांजलि दी गई. पटना स्थित पार्टी के बिहार राज्य कार्यालय में उनके चित्र पर पुष्पांजलि और दो मिनट के मौन के बाद सभा को का. बृजबिहारी पांडे, राज्य सचिव का. कुणाल, का. राजाराम सिंह, का. केडी यादव, का. आर.एन. ठाकुर और का. शिवसागर शर्मा ने सम्बोधित किया. सभा में केन्द्रीय कमेटी सदस्य का. अमर, का. सरोज चौबे, का. अभ्युदय, विधायक दल के नेता महबूब आलम, सुदामा प्रसाद, सत्यदेव राम, नवीन, उमेश सिंह, परवेज कुमार, प्रकाश कुमार, अरविंद कुमार सिंह, संतलाल, अनीता, विभा गुप्ता, मंजू आदि दर्जनों कामरेड उपस्थित थे. 17 अगस्त 2018 को कोलकाता स्थित युव केन्द्र में कामरेड डीपी बख्शी की स्मृति में एक बड़ी सभा आयोजित की जाएगी.

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