किसान नेताओं ने संसद के विशेष सत्र की मांग की

भारत के राष्ट्रपति से अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के 18-सदस्यीय कार्यकारिणी समूह ने मुलाकात की. समन्वय समिति ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंप कर संसद का विशेष सत्र बुलाने का आग्रह किया, ताकि भारत में कृषि संकट पर विस्तार से चर्चा की जा सके और भारत के किसानों द्वारा सूत्रबद्ध ‘किसान मुक्ति बिलों’ पर विचार और उन्हें पारित किया जा सके.

समन्वय समिति के संयोजक वीएम सिंह ने राष्ट्रपति को इस समिति के बारे में और इसके द्वारा आयोजित अखिल भारतीय किसान मुक्ति यात्रा, नवंबर 2017 में संसद मार्ग (दिल्ली) पर संगठित किसान मुक्ति संसद, बिलकुल लोकतांत्रिक ढंग से निर्मित तथा लोकसभा सदस्य श्री राजू शेट्टी और राज्य सभा सदस्य श्री के के रागेश द्वारा ‘प्राइवेट मेंबर्स बिल’ के बतौर सौंपे गए दो ‘किसान मुक्ति बिलों’ के बारे में जानकारी दी.

राष्ट्रपति को यह भी बताया गया कि मार्च 2018 में 21 राजनीतिक पार्टियों ने इन बिलों का समर्थन किया और अप्रैल 2018 में इन पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं ने इन बिलों को और भी चुस्त-दुरुस्त बनाया. शिव सेना जैसे एनडीए संश्रयकारी समेत इन राजनीतिक दलों ने मार्च 2018 में कंस्टीट्यूशन क्लब में एक राउंड टेबुल बैठक करके एक औपचारिक प्रस्ताव पर भी दस्तखत किए हैं.

यह स्मरण करना जरूरी है कि श्री अटल बिहारी वाजपेयी के शासन काल में तीन गन्ना उत्पादकों की मौत के बाद गन्ना किसानों के संकट पर विचार-विमर्श करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया गया था. आज भारत में किसानों के चरम संकट की स्थिति में इस किस्म का विशेष सत्र बुलाना जरूरी हो गया है, ताकि इस संकट का कोई संस्थागत समाधान निकाला और लागू किया जा सके. प्रतिनिधिमंडल ने जोर देकर पूछा, अगर जीएसटी के लिए संसद का विशेष मध्य रात्रि सत्र बुलाया जा सकता है, तो भारत में कृषि संकट पर विचार-विमर्श के लिए कोई सत्र क्यों नहीं बुलाया जा सकेगा ?

राष्ट्रपति ने अपना विचार बताया कि ये दोनों मांगें (सुनिश्चित लाभकारी मूल्य और कर्ज मुक्ति) वास्तव में बहुत महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने अपना समर्थन जाहिर किया और इन अधिकारों की प्राप्ति के लिए कठोर प्रयासों की जरूरत बताई.

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