युवाओं के रोजगार के लिए आइसा-इनौस का देशव्यापी अभियान: रोजगार मांगे इंडिया

वर्तमान मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल का 4 साल पूरा कर लिया है। इसके लिए ‘साफ नीयत और सही विकास’ के दावे के साथ सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च कर विज्ञापन बंटवाये! लेकिन इस देश के छात्रों और युवाओं को पता है कि देश को बेरोजगारी में धकेलने की ‘नीयत’ के साथ इस सरकार ने नौकरियों में कटौती का ही ‘विकास’ किया है।

क्या है देश में रोजगार की स्थिति: सीएमआइई (सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी) के आंकड़ों के अनुसार केवल मार्च 2017 से अप्रैल 2018 के बीच देश में बेरोजगारी दर 4-7% से बढ़कर 6% हो गई। नोटबंदी के बाद पहले दो महीने में 1.26 करोड़ लोगों का रोजगार खत्म हो गया, जिसकी भरपाई आज तक नहीं हो सकी है (महेश व्यास, सीएमआइई)। पिछले एक वित्तीय वर्ष में अकेले एसबीआइ ने 15,700 पदों को घटाकर 10,300 कर दिया है। इस सरकार के शुरूआती दो साल के कार्यकाल में ही केन्द्र की नौकरियों में 89% की कटौती हुई है – इसे सरकार के ही एक मंत्री ने लोकसभा में रखा था (29 मार्च 2017, इंडियन एक्सप्रेस)।

नौकरी देने के सबसे बड़े सेक्टर रेलवे में रोजगार की स्थिति: वर्षों से लाखों पदों को खाली रखने के बाद हाल में रेलवे ने 92,000 पदों पर बहाली की घोषणा की। यह संख्या रेलवे की जरूरतों और उसमें खाली पदों की तुलना में काफी कम है। दूसरी ओर, इन पदों पर आवेदन आमंत्रित कर लेने के बाद भी अब तक बहाली परीक्षा की तिथि नहीं घोषित की गई है। इतना ही नहीं, हाल में रेलवे ने इसी एक साल में कुल 11,000 पदों को हमेशा के लिए खत्म करने का निर्णय ले लिया। जबकि, कर्मचारियों और व्यवस्था की कमी के कारण ट्रेनों के लेट होने और कैंसिल होने की घटनायें बढ़ती जा रही हैं।

याद कीजिये, इसके पूर्व मोदी सरकार ने घोषणा की थी कि कि पांच सालों से रिक्त पड़े सभी पदों को खत्म कर दिया जाएगा। पहले पद खाली रखो और फिर उसे खत्म कर दो! न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी’!

एसएससी में पेपरलीक, धांधली और सरकार की मंशा: एसएससी परीक्षाओं में हुई व्यापक धांधली और उसके विरोध में उभरे तीव्र आंदोलनों को हम सबने देखा है। इस बीच जिस आशिम खुराना के अध्यक्ष रहने के दौरान ये सब हुआ, सरकार ने उसका कार्यकाल बढ़ा दिया। इस परीक्षा को आयोजित करने वाली प्राइवेट कंपनी ‘सिफि’ के साथ ‘कंट्रैक्ट’ भी बढ़ा दिए गए। इतना ही नहीं, जिस सीजीएल टायर-2 की परीक्षा पर सरकार ने सीबीआई जांच बैठाई थी, उस परीक्षा का परिणाम भी आ गया। छात्रों के साथ इससे बड़ा और क्रूर मजाक और क्या हो सकता है!

मंत्रालयों के ज्वाइंट सेक्रेटरी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर यूपीएससी को दरकिनार कर ‘लैटरल इंट्री’ से नियुक्ति की गहरी साजिश: सरकार अपने पसंदीदा लोगों, यहां तक कि किसी प्राइवेट या विदेशी कंपनी के अधिकारियों, को इन प्रभावशाली पदों पर जबरन बिठाने के लिए उतावली है। इसके लिए वह उस संविधान के खिलाफ जा रही है जो कहता है कि ऐसे पदों की बहाली केवल यूपीएससी की परीक्षा के द्वारा ही ली जाएगी। इससे पहले यूपीएससी के ‘कैडर आवंटन’ में परीक्षा की रैंकिंग के बजाय ट्रेनिंग के ‘फाउंडेशन कोर्स’ को आधार बनाने की बात सरकार द्वारा की गई थी। यूपीएससी की विज्ञप्ति में इस वर्ष मात्र 782 सीटों की घोषणा की गई है जो 2014 में 1,291 थी।

‘मुद्रा योजना’ और ‘स्वरोजगार’ की असलियत: सरकार अपनी जिस ‘मुद्रा योजना’ को लेकर ‘अपने मुंह मिया मिटठू’ बन रही है उसकी सच्चाई यह है कि इसके तहत दिए गए प्रति लोन का औसत रकम महज 47,249 रुपये है। भला आप ही बताइये कि इतने पैसे से कोई पकौड़ा या पान की भी दुकान खोल सकता है क्या ?

‘स्किल इंडिया’ की सच्चाई: बहुप्रचारित ‘स्किल इंडिया’ योजना के तहत 2020 तक 1 करोड़ लोगों को ट्रेनिंग देने की घोषणा की गई थी, लेकिन सितंबर 2017 तक सिर्फ 6 लाख को ही ट्रेनिंग दी जा सकी है। उसमें से भी महज 12% लोगों को ही विविध क्षेत्रों में रोजगार मिल सका। (द वायर, 28 मई 2018)

‘स्टार्ट अप इंडिया’: बंदी दर बंदी – 2016 में इस योजना के तहत सरकार की घोषणा थी कि अगले 4 साल में इस पर 10,000 करोड़ रुपये आवंटित किए जायेंगे। लेकिन अब तक इस मद में सिर्फ 90-65 करोड़ (घोषित राशि का सिर्फ 1%) रुपये ही दिए गए हैं। हाल के एक सर्वे के अनुसार 33,000 स्टार्ट-अप कंपनियों को अब तक कोई पैसा नहीं दिया गया है। नतीजतन, धड़ल्ले से स्टार्ट-अप कंपनियां बंद हो रही हैं।

रोजगार पैदा करने के नाम पर सरकार निजी कंपनियों को टैक्स और कर्ज की माफी के रूप में लाखों करोड़ रुपये दे रही है। लेकिन वहां भी रोजगार के अवसर निरंतर घटते जा रहे हैं। आईटी सेक्टर से लेकर इंजिनियरिंग सेक्टर की आज यही दास्तान है। सरकारी से लेकर प्राइवेट सेक्टर तक में रोजगार में भारी कटौती चल रही है। नियुक्ति प्रक्रियाओं को रोक कर एक पूरी पीढ़ी को सिर्फ इंतजार में बैठा दिया गया है। सरकार की पूरी प्लानिंग होती है कि इस बीच कोई धांधली या कोर्ट केस हो जाए, और फिर बहाली की पूरी प्रक्रिया ही रुक जाए ! आज जनता को जुमलों और नफरत की राजनीति में उलझाकर यह सरकार 2019 चुनाव के लिए ‘जुगाड़’ में लग चुकी है। लेकिन सवाल है कि मोदी सरकार के पास इस देश के युवाओं के लिए क्या ‘विजन’ है ! देश के युवाओं की एक पूरी पीढ़ी को बेरोजगारी की ओर धकेलकर, उनके भविष्य को अंधकारमय क्यों बनाया जा रहा है ?

रोजगार के अवसरों पर लगातार हमले और देश के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की मोदी सरकार की इन साजिशों के विरोध में आइसा और इनौस ने ‘रोजगार मांगे इंडिया’ नाम से एक देशव्यापी अभियान शुरू किया है। नियमित, सुरक्षित और सम्मानजनक रोजगार की मांग के साथ छात्र-युवा इस बैनर तले एकजूट हो रहे हैं।

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