अम्बेडकर जयंती 2018: ‘लोकतंत्र बचाओ, संविधान बचाओ’ संकल्प दिवस

14 अप्रैल 2018 को समूचा देश डा. बी.आर. अम्बेडकर का जन्मदिन मनायेगा, जो लोकतंत्र के प्रतिबद्ध सैनिक थे, भारत के संविधान के लेखक थे और दलितों एवं महिलाओं के लिये समानता एवं न्याय की लड़ाई के योद्धा थे.

लेकिन अप्रैल 2018 के महीने में रोज-ब-रोज इस बात के सबूत मिल रहे हैं कि ‘स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे’ के उन मूल्यों के सामने चरम किस्म का खतरा आ खड़ा हुआ है, जिनके बारे में अम्बेडकर चाहते थे कि संविधान इन मूल्यों का प्रतिनिधित्व करे. अनुसूचित जाति/ अनु. जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम (एससी-एसटी ऐक्ट) को निष्प्रभावी और कमजोर बनाने के खिलाफ आहूत 2 अप्रैल के भारत बंद को सामंती-जातिवादी शक्तियों और साथ ही भाजपा-शासित राज्यों में पुलिस के हाथों बर्बर अत्याचार और दमनकारी हिंसा का सामना करना पड़ा. इन हमलों में आठ प्रतिवादकर्मी मारे गये, कई लोग घायल हुए और हजारों को गिरफ्तार किया गया. बंद के दूसरे दिन वर्चस्वशाली जातियों के गिरोहों ने राजस्थान में संगठित हिंसा का प्रकोप जारी रखा, जिसके दौरान मौजूदा और भूतपूर्व विधायकों के घर भी आग के हवाले कर दिये गये और दलितों के घरों एवं छात्रावासों पर हमले किये गये.

10 अप्रैल को कुछेक वर्चस्वशाली जातियों के संगठनों द्वारा आरक्षण के खिलाफ देशव्यापी बंद का आह्नान किया गया, जो बिल्कुल ही फ्लॉप शो साबित हुआ. मगर एक ओर जहां भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह घोषणा करते हैं कि “भाजपा कभी आरक्षण खत्म नहीं करेगी और न ही कोई अन्य इसे खत्म कर सकेगा”, वहीं विश्वविद्यालयों में “स्वायत्तता” तथा अन्य सरकारी कदमों के नाम पर आरक्षण को इसी बीच खत्म किया जा चुका है.

भाजपा सरकार सर्वोच्च न्यायालय में बहस के दौरान इस दावे को चुनौती देने से कतरा गई थी कि “झूठे” मुकदमे दायर करने के लिये अत्याचार निरोधक कानून का “दुरुपयोग” किया जाता है; उसने यह बताने से परहेज किया था कि दलितों के जनसंहार और अत्याचार के मामलों में न्याय इसलिये नहीं मिल पाता क्योंकि पुलिस द्वारा घटनाक्रम की जांच में और मुकदमे में अभियोजन पक्ष की ओर से संवेदनहीनता व लापरवाही बरती जाती है. अब किसी तरह इज्जत बचाने के लिये सरकार अत्याचार निरोधक कानून को शिथिल किये जाने के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका (रिव्यू पिटीशन) दायर करने को राजी हो गई है.

दलितों द्वारा संघर्षों के जरिये बड़ी मुश्किल से हासिल हर अधिकार पर भाजपा सरकार हर सम्भव तरीके से हमला कर रही है और उनमें कटौती कर रही है. केन्द्र सरकार के बजट में अनुसूचित जाति के कल्याण की मद में निर्धारित अनिवार्य राशि में से 1,14,717 करोड़ रुपये की कटौती कर दी गई है और इसी तरह अनुसूचित जनजाति की मद में निर्धारत अनिवार्य राशि में 54,676 करोड़ रुपये की कटौती की गई है. मोदी सरकार पिछले तीन वर्षों के दौरान पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना (अनुसूचित जातियों के छात्रें के लिये) की 8,000 करोड़ रुपये की राशि और अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिये 3,156 करोड़ रुपये की राशि को नहीं वितरित कर पाई है और इसके परिणामस्वरूप देश भर में 51 लाख दलित छात्रों और 20 लाख आदिवासी छात्रों को पढ़ाई में आर्थिक संकट भोगना पड़ा है.

केन्द्रीय कानून मंत्री वी.के. सिंह तो पहले ही दलितों की तुलना कुत्तों से कर चुके थे, उसी तर्ज पर एक और केन्द्रीय मंत्री अनंत हेगड़े ने भी दलितों को कुत्ता बताया है. हेगड़े ने खुलेआम घोषणा की है कि मोदी सरकार संविधान बदल देगी. इसी बीच भाजपा-शासित राज्यों में अम्बेडकर की मूर्तियों पर सिलसिलेवार ढंग से हमले जारी हैं.

जहां भाजपा के दलित सांसद अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों में उभरे आक्रोश को प्रतिबिम्बित करने पर मजबूर हुए हैं, और उन्हें भाजपा शासित राज्यों में दलित जिस असुरक्षा और हिंसा का सामना कर रहे हैं उसके बारे में सार्वजनिक रूप से बोलना पड़ रहा है, वहीं मोदी ने दावा किया है कि उनकी सरकार ने किसी भी पिछली सरकार की तुलना में अम्बेडकर को “सबसे ज्यादा सम्मान” दिया है. विडम्बना यह है कि जहां मोदी के समर्थक दलितों पर हमले कर रहे हैं, वहीं मोदी द्वारा अम्बेडकर को हस्तगत किये जाने के प्रयासों की झलक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी के इस आदेश में दिख रही है कि अम्बेडकर के नाम में “रामजी” को विशेष रूप से महत्व देकर पेश किया जाय, और यही प्रयास गुंडों-हुड़दंगियों द्वारा उत्तर प्रदेश के बदायूं में अम्बेडकर की मूर्ति को भगवा रंग से रंगने में दिख रहा है, जिन्होंने यह दिखलाने की कोशिश की कि अम्बेडकर संघ परिवार की हिंदुत्व की विचारधारा का समर्थन करते थे. संघियों की कल्पना में वे न सिर्फ अम्बेडकर को भगवा रंग में रंगना चाहते हैं – वे उनके हाथ में मौजूद संविधान की किताब को मनुस्मृति से बदल देना चाहते हैं, और इसी कारण मोदी ने गोलवलकर पर लिखित अपने लेख में अम्बेडकर को ‘आधुनिक मनु’ बताया था.

उत्तर प्रदेश में पुलिस ने 38 नकली मुठभेड़-हत्याओं को अंजाम दिया है. मुख्यमंत्री योगी ने, जो शेखी बघारते हैं कि अपराधियों को बिना मुकदमा चलाये मार गिराया जायेगा, इसी बीच फैसला लिया है कि वह खुद और उनकी पार्टी के नेताओं को बिना मुकदमा चलाये के निर्दोष घोषित किया जा सकता है – और उन्होंने खुद अपने खिलाफ और अपने मंत्रियों के खिलाफ चल रहे मुकदमों को वापस ले लिया है! एक नवयुवती, जिसने उत्तर प्रदेश के उन्नाव से भाजपा के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर (जो टेन्डर और खनन माफिया के साथ अपने सम्बंधों के चलते बदनाम हैं) एवं उनके गुंडों के खिलाफ सामूहिक बलात्कार की शिकायत दर्ज कराई है, उसे एक साल से कोई न्याय नहीं मिला है. जब उस नवयुवती के पिता को गलत इल्जाम लगाकर गिरफ्तार कर लिया गया, तो उसने मुख्यमंत्री के आवास के सामने आत्महत्या का प्रयास किया, और बाद में उसके पिता को विधायक के भाई के निर्देश पर थाने की हिरासत में मार डाला गया. उस विधायक को गिरफ्तारी का कोई डर ही नहीं है और वह खुलेआम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के साथ मुलाकातें कर रहा है और बलात्कार की पीडि़ता एवं उसके पिता को “नीच आदमी” कह रहा है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने एक भूतपूर्व केन्द्रीय मंत्री ‘स्वामी’ चिन्मयानंद के खिलाफ बलात्कार के आरोप को भी वापस ले लिया है, जिन पर अपने आश्रम में एक महिला के साथ बलात्कार का आरोप था.

जम्मू के कठुआ के एक मंदिर में 6-वर्षीया लड़की आसिफा को नशा खिलाया गया, उसे यातनाएं दी गईं, उसके साथ बलात्कार किया गया और उसकी हत्या कर दी गई, और जम्मू-कश्मीर की क्राइम ब्रांच ने इस अपराध के आरोपी स्पेशल पुलिस आफिसर एवं अन्य लोगों को गिरफ्तार किया है. यह अपराध 2012 में दिल्ली की एक बस में किये गये सामूहिक बलात्कार और हत्या से कहीं ज्यादा बर्बर कृत्य है. मगर धिक्कार की बात है कि इस कुकृत्य के आरोपी को बचाने के लिये ‘हिंदू एकता मंच’ द्वारा तिरंगा लहराये जाने में भाजपा के मंत्रियों ने भी साथ दिया, जबकि कठुआ बार एशोसियेशन ने कई घंटे तक चार्जशीट फाइल किये जाने से बलपूर्वक रोक दिया और जम्मू बार एशोसियेशन ने आसिफा के वकील को धमकियां दीं और आरोपी के पक्ष में जम्मू बंद का आह्नान किया है.

इस बीच पश्चिम बंगाल, बिहार और असम में संगठित मुस्लिम-विरोधी हिंसा के वाकयात सामने आये हैं, जिनकी सरपरस्ती आरएसएस और भाजपा कर रहे हैं, और आरएसएस के गिरोहों ने अन्य कई राज्यों में हिंसा की धमकियां देते हुए हथियारबंद जुलूस आयोजित किये हैं. राजस्थान के अलवर सिटी से भाजपा विधायक बनवारी लाल सिंघल ने हिंदू परिवारों से कहा है कि वे मुस्लिम परिवारों को अपने घरों में आने से रोक दें, इसके पीछे उन्होंने मुसलमानों पर आरोप लगाया है कि वे ‘लव जिहाद’ के जरिये हिंदू बेटियों को ‘फुसलाने’ की कोशिश करते हैं. लव जिहाद भाजपा द्वारा अंतर्धार्मिक विवाहों को दिया गया नाम है.

डा. अम्बेडकर ने चेतावनी दी थी कि “अगर हिंदू राज वास्तविकता बन ही जाता है, तो कोई संशय नहीं कि वह देश के लिये सबसे बड़ी विध्वंसकारी आपदा साबित होगा. वह स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के लिये भारी खतरा है. इस मायने में वह लोकतंत्र के साथ संगतिपूर्ण है ही नहीं. हिंदू राज को किसी भी कीमत पर रोकना ही होगा.” भाजपा और आरएसएस भारत के संविधान और लोकतंत्र का विनाश करने और इसकी जगह एक फासीवादी “हिन्दू राष्ट्र” कायम करने की कोशिश कर रहे हैं और इस तरह भारत को उसी विध्वंस की ओर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं.

आइये, हम इस साल अम्बेडकर जयंती को “लोकतंत्र बचाओ, संविधान बचाओ” दिवस के बतौर मनायें और भारतीय संविधान एवं लोकतंत्र के मूल्यों की उन फासीवादी शक्तियों के हमले से रक्षा करने की शपथ लें, जो शक्तियां इन मूल्यों का विनाश करने और भारत की आम जनता पर, भारत के दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों एवं महिलाओं पर मनुस्मृति के मूल्यों को थोपने की कोशिश कर रही हैं.

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