नीतीश की यात्रा के बाद चंपारण में सामंती-अपराधियों का तांडव, दलित-गरीबों पर हमले बढ़े : मा

मैनाटोड़ में गन्ना मंत्री के संरक्षण में अपराधियों ने 50 एकड़ से ज्यादा गेहूं की फसल वाली जमीन जोत ली.
मंत्री के संरक्षण की वजह से प्रशासन अपराधियों के पक्ष में.
पटना 14 दिसंबर 2017

भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल और चंपारण के लोकप्रिय माले नेता वीरेन्द्र प्रसाद गुप्ता ने कहा है कि नीतीश कुमार चंपारण में समीक्षा यात्रा कर रहे हैं, लेकिन वहां से उनके लौटते ही सामंती-अपराधी ताकतों ने दलित-गरीबों पर हमला बोल दिया है. आज मैनाटांड़ के सिंहपुर गांव में बिहार सरकार के गन्ना मंत्री खुर्शीद आलम के संरक्षण में सामंती-अपराधियों के गिरोह ने लंबे अर्से से जोत-आबाद कर रहे गरीबों की 50 एकड़ गेहूं की फसल लगी जमीन को हथियार के बल पर ट्रैक्टर से जोत लिया और पूरी फसल को बर्बाद कर दिया. जबकि घटनास्थल मैनाटांड़ थाने से महज आधे किलोमीटर की दूरी पर है. अपराधियों की फायरिंग में कई गांव वाले बुरी तरह जख्मी हो गये, लेकिन थाने ने उनका मुकदमा भी दर्ज नहीं किया. चंपारण मंे एक तरफ चीनी मिलें व इस्टेट तो दूसरी ओर प्रशासन से लेकर सामंती-अपराधी ताकतें सब एक साथ मिलकर दलित-गरीबों के हक-अधिकार को छीनने व उनके आंदोलनों को कुचलने में लगी हैं.

सिंहपुर में सामंती-अपराधियों का नंगा नाच : मैनाटांड़ में आज सुबह सामंती-अपराधियों के गिरोह ने नंगा नाच किया. मैनाटांड़ थाना से मात्रा आधा किलोमीटर की दूरी पर अविस्थत सिंहपुर गांव को घेर कर पचासों राइफल-बंदूकों से फायरिंग की गयी. उस क्रम में 7 ट्रैक्टर ले जाकर तीस-पैंतीस वर्ष से सीलिंग से फाजिल जमीन पर जोत-आबाद कर जीविका चलाने वाले दलित-गरीबों की जमीन में लगी गेहूं की फसल नष्ट कर दी गयी. 6 बजे से 10 बजे तक अपराधियों का तांडव चलता रहा. थाने को सूचना की गयी, पुलिस अनमंडल पदाधिकारी, एसपी और यहां तकि गृह सचिव बिहार को सूचना की गयी, बावजूद पुलिस सबकुछ निपटने के बाद 11 बजे पहुंची. इस क्रम में दर्जनों गरीब-दलित छर्रे से घायल हो गये. इस तरीके से गरीबों को जमीन से बेदखल करने के लिए सशस्त्र तांडव किया गया. चूंकि मैनाटांड़ से जदयू विधायक व बिहार सरकार में गन्ना मंत्री खुर्शीद आलम ने सामंती-अपराधियों को खुलेआम संरक्षण दे रखा है, इसलिए प्रशासन अपराधियों के खिलाफ एक शब्द नहीं बोलता. खुर्शीद आलम न केवल अपराधी गिरोहों को बल्कि जाली नोटों के कारोबारियों, चरस गांजा से लेकर तस्कर के अन्य अपराधियों के गैंग को भी वह संरक्षण देता है. इन्हीं गिरोहों ने स्थानीय दबंगों से मिलकर सीलिंग की जमीन अपने नाम पर लिखवा ली है और आए दिन गरीबों पर जुल्म ढाते हैं.

बाढ़ राहत मामले में भी गरीबों के प्रति मंत्री का घृणा भाव खुलकर सामने आया है. नरकटियागंज अनुमंडल के सिकटा प्रखंड के सूरजपूर में मंत्री का घर है. इस गांव में उच्च जाति के भूस्वामियों को तो बाढ़ राहत मिल गया, लेकिन मुसहर जाति से आने वाले गरीबों को आज तक कुछ नहीं मिला. एकडरी, छपइनिया, मंगलपुर, डेहरी आदि गांवों के गरीबों को भी आज तक कोई सहायता नहीं मिली. नरकटियागंज प्रखंड में भी यही तमाशा किया गया. पकड़ीढाला, सिरिया, राजपुर, विशुनपुर, मठिया आदि गांवों में भी मुसहर, दलित, अतिपिछड़े व कुछ गरीब मुस्लिमों को बाढ़ राहत से छांट दिया गया, जबकि पकड़ी ढाला के संपन्न लोगों को मंत्री के निर्देश पर बाढ़ राहत मिला. इन सवालों को लेकर पिछले 4 दिनांे से नरकटियागंज अनुमंडल पर अनशन चल रहा है, लेकिन प्रशासन ने यह कहकर कि चूंकि अनशन के लिए कोई परमिशन नहीं ली गयी है, अनशनकारियों को नोटिस भेजी है. माले नेताओं ने कहा कि प्रशासन धमकी के जरिए हमारे आंदोलन को कमजोर करना चाहती है, लेकिन अपने मंसूबे में वह कभी कामयाब न होगी. बटाईदारों, किसानों को भी अब तक कोई राहत नहीं मिली. जबकि अब बुआई का सीजन बीत रहा है.

चंपारण में है चीनी मिलों/इस्टेटों व सामंती-अपराधी गिरोहों का राज : चंपारण सत्याग्रह की शताब्दी का ढोंग करने वाली नीतीश सरकार आज पूरी तरह दलित-गरीबों को उनके अधिकारों से वंचित कर देने पर आमदा है. अभी कुछ दिन पहले ही चीनी मिलों व इस्टेटों के इशारे पर बेतियाराज की जमीन पर बसे गरीबों के घर उजाड़ दिए गए थे और सभी को राज की जमीन अविलंब खाली करने का नोटिस जारी किया गया है. यह सर्वविदित है कि बेतिया राज की 3.5 लाख एकड़ जमीन का बड़ा हिस्सा नील की कोठियों अथवा चीनी मिलों व इस्टेटों के कब्जे में है. लंबे समय से इस जमीन का अधिग्रहण कर गरीबों में वितरित करने की मांग की जाती रही है. लेकिन नीतीश सरकार आज ठीक इसका उलटा काम कर रही है. बेतिया राज की जमीन के कुछेक हिस्सों पर जहां गरीब बसे हैं, वहां से भी उन्हें उजाड़कर पूंजीपतियों के हवाले करने की कोशिशें की जा रही हैं. लोहिया का नाम लेने वाले नीतीश कुमार आज उनके सिद्धांतों के खिलाफ चल रहे हैं. चंपारण में भूमि लूट पर डाॅ. राममनोहर लाहिया सहित कांग्रेस की वर्किंग कमिटी ने कड़ी आलोचना की थी. फिर भी चंपारण में जमीन की लूट जारी रही. चीनी मिलों, इस्टेटों के अलावा भाजपा-कांग्रेस व अन्य दलों के नेताओं के कब्जे में भी ऐसी जमीन है. भाजपा सांसद व केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह भी बेतिया राज की जमीन का 20 एकड़ कब्जा किए हुए है.

एक तरफ जहां, चीनी मिलों व इस्टेटों के कब्जे में जमीन की लूट अब भी जारी है, वहीं दूसरी ओर सरकार यह तर्क देकर गरीबों को उजाड़ रही है कि बेतिया राज की जमीन का वह केवल केयर टेकर है और इसलिए उस पर भूमि सुधार का कानून लागू नहीं होता. कहने का मतलब इस जमीन पर अंग्रेजी राज का कानून लागू होगा. यह बेहद हास्यास्पद है. नीतीश कुमार के चंपारण आगमन केे पहले दलित बस्ती बुद्धा काॅलनी को तोड़ा गया और अब नीतीश के जाने के बाद मैनाटांड़ में अपराधियों ने तांडव नृत्य किया. जाहिर है कि चंपारण को सामंती ताकतें अपने इशारे पर नचाना चाहती हैं.

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